Wednesday, May 6, 2026
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घर से बाहर बच्चों की देखभाल

SAMVAD


शिखा चौधरी

बच्चों का स्कूल जाना माता-पिता को टेंशनफ्री कर देता है। अपने शैतान बच्चों के कारण आजकल के अभिभावक समझते हैं कि स्कूल जाने से थोड़ी देर तो उन्हें अपने बच्चों से राहत मिलेगी। छुट्टी के दिन तो वे सारे घर को सिर पर उठा ही लेते हैं।
आजकल के बच्चे ज्यादा चंचल और उद्यमी होते हैं। यदि वे सुस्त बैठे रहेंगे तो उन्हें बच्चे कौन कहेगा? जितने उग्र स्वभाव के बच्चे होंगे, उन्हें झेलना उतना ही मुश्किल होगा।

खासकर माताओं के लिए तो यह एक समस्या ही है। सारा दिन उन्हीं का तो बच्चों के साथ गुजरता है। ऐसे में, बच्चों को संभालने और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी सारी उन्हीं के सिर पर आ जाती है। जब बच्चे स्कूल चले जाते हैं तभी उन्हें चैन की सांस मिलती है पर क्या दंगली बच्चे घर से स्कूल और स्कूल से घर तक का सफर ऐसे ही शांति से गुजार लेते हैं। नहीं, बल्कि अब तो उन्हें ज्यादा संभालने की जरूरत होती है।

आप यह मत सोचिए कि आपके बच्चे को तो स्कूल की बस या रिक्शेवाला स्कूल तक लेकर जाता है तो वह सुरक्षित है। पता नहीं आपका बच्चा रिक्शे या बस में कैसे बैठता, उतरता हो। दूसरे बच्चों से वह मारपीट तो नहीं करता। ड्राइवर या रिक्शेवाला उसके साथ अभद्र व्यवहार तो नहीं करता।

ऐसे में आप अपने बच्चे को किस तरह सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं।

ध्यान दें कि आपका बच्चा रिक्शे में किस तरह बैठता है, कहीं किसी दिन वह गिरकर चोट न खा ले, या बस से उतरते समय कोई उसकी मदद करता है अथवा नहीं, दूसरे बच्चों के प्रति उसका व्यवहार कैसा है, किसी से उसकी नोकझोंक तो नहीं चल रही, स्कूल वालों ने रिक्शावाले या ड्राइवर को पूरी जांच पड़ताल के बाद ही रखा है या नहीं। उनका आपके बच्चे के साथ किस तरह का व्यवहार है, इन बातों पर खास ध्यान दें।

अपने बच्चे को भी टटोल टटोलकर पूछती रहा करें।

स्कूल में जल्दी पहुंचकर आपका बच्चा क्या करता है? स्कूल में टीचरों के साथ उसका व्यवहार किस तरह का है? वह किस तरह के गेम्स वहां खेलता है। इन सब बातों की जानकारी अभिभावकों को रखनी चाहिए। स्कूल में उसकी टीचर्स से सम्पर्क बनाए रखना चाहिए जिससे उसके विषय में पूरी जानकारी हासिल होती रहे। कोई-कोई बच्चा टीचरों के वश में भी नहीं आता और वह स्कूल के भी नाक में दम कर देता है।

ऐसे उग्र बच्चे के अभिभावकों को चाहिए कि वे समय-समय पर स्कूल जाकर अपने बच्चे की निगरानी रखें। कहीं बाद में टीचरों पर सारा दोष डाल दें। इसके अलावा यह भी ध्यान दें कि कोई टीचर आपके बच्चे को अधिक डरा या धमकाकर तो नहीं रखता जिससे आपके बच्चे का व्यवहार भी प्रभावित हो रहा हो।

आपका बच्चा स्कूल के बाकी बच्चों के साथ सांमजस्य बिठा पा रहा है या नहीं, यह ध्यान देना बेहद जरूरी है। कभी-कभी अपने बच्चे को स्वयं ही स्कूल छोड़ने एवं लेने जायें। इससे आप अपने बच्चे को अधिक सुरक्षित पायेंगे।

यदि आपका बच्चा साइकिल से स्कूल जाता है तो ध्यान दें कि वह किस स्पीड से साइकिल चलाता है। दूसरे वाहनों से वह खुद को कैसे बचाता है। किस तरह सड़क क्रास करता है। यदि वह किसी के भी बहलाने-फुसलाने में आसानी से आ सकता हो तो उसे अकेला स्कूल के लिए न निकलने दें। सडक पर वह उपद्रव करता हुआ तो नहीं चलता।

घर आने पर उस पर बरसें नहीं बल्कि शांत स्वभाव में उसके साथ बर्ताव करें। घर पर आप उसके लिए थोड़ी लापरवाह हो सकती हैं मगर घर से बाहर उसके लिए लापरवाही न रखें।

जब भी बच्चे घर से बाहर निकलें, उन पर निगरानी रखे। हो सके तो स्वयं भी बाहर टहल आएं। उन्हें कोई चीज या सामान आस-पास से लेने भी भेजें तो उन्हें देखती रहें जिससे वे आपकी आंखों से ओझल न हो सकें एवं घरेलू कार्य भी सीख लें।

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