Sunday, August 7, 2022
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दर्द दे रही औलाद, आंसू भरी आंखों की शिकायतें

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  • कोई पिता को पीट रहा तो कोई बेबस मां को घर से निकाल रहा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पूत कपूत को क्या धन संचे, पूत कपूत को क्या धन संचे। यह कहावत अब उन परिवारों पर लागू नहीं हो रही है जो अपनी औलाद को सबकुछ देने के बाद भी दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। औलाद के द्वारा दिये जा रहे दर्द को लेकर तमाम लाचार मां बाप पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। इन अभागे और बूढ़े मां बाप अधिकारियों के सामने खुद के आंसू नहीं रोक पा रहे हैं और नाकारा बेटे को सुधारने की गुहार लगाते हुए यह भी कहते हैं कि इसे बस जेल मत भेजना।

पुलिस आफिस में आने वाली शिकायतों में पारिवारिक मामले ज्यादा आ रहे हैं। जमीन जायदाय, पति और पत्नी के बीच के विवाद और रंजिशों के मामलों को लेकर भले पुलिस औपचारिकता दिखाये लेकिन बाप बेटे के बिगड़ते और दरकते रिश्तों को लेकर पुलिस काफी संवेदनशील है। लिसाड़ीगेट के 70 साल के बुजुर्ग फहीम खान रोते हुए एसएसपी पहुंचे, उस वक्त सीओ बैठे हुए थे। बूढ़े व्यक्ति के रोने से माहौल भावुक हो गया।

पूछा गया तो बताया कि बेटे को 50 गज का मकान बनाकर दिया और उसने अपनी पत्नी के भड़काने पर न केवल घर से निकाल दिया बल्कि मारपीट की। बुजुर्ग जब अपना दर्द बयान कर रहा था तभी सरधना की एक बुजुर्ग महिला ने आकर प्रार्थनापत्र दिया कि उसका बेटा और बहू उसे खाने को नहीं देते हैं और जबरन जमीन नाम लिखवाने के लिये मारपीट करते हैं। महिला ने हाथ पर लगी चोट के निशान दिखाते हुए रोना शुरू कर दिया।

यह एक बुजुर्ग का दर्द नहीं है, बल्कि एक हकीकत है जो रोज पुलिस अधिकारियों को सुननी पड़ रही है। अकेले मई महीने में ही इस तरह की सर्वाधिक शिकायतें लिसाड़ीगेट, कंकरखेड़ा, ब्रह्मपुरी, टीपी नगर, सरधना, मवाना और किठौर की तरफ से आ रही है। जो लोग इस तरह की शिकायतें लेकर आ रहे हैं उनकी अपनी दर्द भरी कहानियां है और बेटे के मोह में आकर उसको सबकुछ सौंप देते हैं और बाद में वहीं पिता मुफलिसी में जिंदगी जीने को मजबूर हो जाता है।

पुलिस आफिस में भले ही इस तरह की शिकायतों का कोई अलग से ब्योरा न रखा जाए, लेकिन जिस तरह पुलिस के सामने शिकायतें आ रही है वो चिंता का विषय है। नौचंदी थाना क्षेत्र के एक बुजुर्ग दंपति अपने बेटे और बहू की शिकायत लेकर आये और बोले कि अगर बेटे को पता चल गया तो मारपीट करेगा। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी ने संबंधित इंस्पेक्टर को बेटे को बुलाने के निर्देश दिये और हड़काने को कहा।

उस दिन तो बेटा पुलिस की डांट खाकर चुप हो गया, लेकिन बाद में उसने मां-बाप के साथ ज्यादती शुरू कर दी। जो मां-बाप आर्थिक रूप से सक्षम हैं वो तो वृद्धाश्रम चले जा रहे हैं और जो लोग अपनी औलाद के ऊपर निर्भर हैं वो जिल्लत की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

साहब! पेंशन छीन लेता है बेटा

करीब 80 साल का पिता लड़खड़ाता हुआ पुलिस आफिस आया और रोते हुए बोला कि बेटा पेंशन छीन लेता है और दुत्कारता रहता है। जब भी पोते मदद के लिये आते हैं तो बेटा उनके साथ भी मारपीट करता है। बुजुर्ग ने बताया कि जब तक उसकी पत्नी जीवित थी तब तक बेटे का व्यवहार ठीक था,

लेकिन पत्नी के मरने के बाद बेटे और बहू ने जीना मुश्किल कर दिया। दवा तक के लिये नहीं देता है मजबूरी में बेटी हर माह दवा खरीद कर दे जाती है। मौजूद सीओ ने बेटे को फोन कर काफी जलील किया और पिता का ख्याल रखने को कहा तो पिता बोला साहब! बेटे को जेल मत भेजना, वो उतना बुरा नहीं है, बस अपनी बहू के बहकावे में आ जाता है।

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