Wednesday, March 18, 2026
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संक्रमित पानी से बच्चे हो रहे पीलिया के शिकार

  • प्राइवेट अस्पताल से लेकर मेडिकल कालेज में बच्चे हो रहे भर्ती

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जून के महीने की भीषण गर्मी और उमस के बीच लगातार हो रही बारिश ने बच्चों के स्वास्थ्य को निशाने पर ले लिया है। बारिश के कारण नगर निगम के द्वारा की जा रही दूषित जलापूर्ति के कारण सोलह साल से कम उम्र के बच्चों को पीलिया अपने चपेट में ले रहा है। हालात यह हो गए है कि प्राइवेट डाक्टरों के क्लीनिक से लेकर मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग में पीलिया से ग्रसित बच्चों की संख्या बढ़ रही है।

मेडिकल कालेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डा. विवेक कुमार का कहना है कि अप्रैल और मई के महीने में पीलिया से ग्रसित बच्चों की संख्या काफी थी। जून में भी बच्चे आ रहे हैं। जुलाई में भी पीलिया वाले बच्चे आ रहे है। संक्रमित पानी भी पीलिया का एक महत्वपूर्ण कारण होता है। मेडिकल कालेज में हेपेटाइटिस बी और सी की जांच की सुविधा है लेकिन हेपेटाइटिस ए की नहीं है।

वैसे भी पीलिया की दवाएं नियमित ली जाएं तो बच्चे को लाभ मिलता है। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. नीरज कांबोज ने बताया कि जून से लेकर अगस्त तक बच्चों को पीलिया होने का एकमात्र कारण दूषित पानी होता है। उन्होंने बताया कि बच्चे की आंखों के नीचे, उंगलियों और त्वचा का रंग पीला पड़ने लगता है। बच्चे को ठंड लगने के साथ बुखार आता है और उसके पेशाब का रंग गहरे पीले या लाल रंग का होता है।

jaundice

उन्होंने बताया कि बच्चे के शरीर का वजन कम होने लगता है और उसे भूख कम लगती है। कुछ बच्चों में खुजली बहुत होती है। मेडिकल कालेज के अलावा प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग में पीलिया ग्रसित बच्चे इलाज के लिये भर्ती है। इसके अलावा शहर के तमाम मौहल्लों में झाड़ फूंक के जरिये पीलिया का इलाज करने वालों के यहां भी बच्चों की संख्या बढ़ रही है।

क्यों होता है पीलिया?

पीलिया एक बीमारी है जो शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा अधिक होने के कारण होती है। बिलीरुबिन का निर्माण शरीर के उत्तकों और खून में होता है। आमतौर पर जब किसी कारणों से लाल रक्त कोशिकाएं टूट जाती हैं तो पीले रंग के बिलीरुबिन का निर्माण होता है।

फलों के रस का सेवन करें

पीलिया के दौरान फलों का जूस भरपूर मात्रा में पिएं ताकि उनमें मौजूद सभी जरूरी पोषक तत्व शरीर में पहुंच सकें। संतरा, बेरी, पपीता और सेब जैसे फलों में डाइजेस्टिव एन्जाइम्स और विटामिन सी, के और बी होती हैं। वहीं रोजाना कच्चा केला, ब्रोकली और गाजर खाने से लिवर की डिटॉक्सिफिकेशन पावर बढ़ती है।

बच्चों में पीलिया के लक्षण

  • त्वचा के रंग में परिवर्तन (पीली त्वचा)
  • ठंड लगना और बुखार आना
  • गहरा पेशाब (गहरे पीले रंग का मूत्र)
  • मिट्टी के रंग जैसा मल
  • अचानक वजन कम होना या लगातार वजन में कमी महसूस होना
  • त्वचा में खुजली होना
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