- एक बरस बीत गया: 409 जिंदगियां हार गईं लेकिन मौत को मात देकर लौटे 20989
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: वेस्ट यूपी में कोरोना का पहला मरीज 24 मार्च 2020 को मेरठ में मिला था। यह उस त्रास्दी की शुरूआत थी, जिसके परिणाम पिछले एक साल से युवा, बच्चे, बुजुर्ग व महिलाएं सभी भुगत रहे हैं। ऐसी बीमारी जिसने अपनों को अपनों से दूर कर दिया, सामाजिक मेल-मिलाप पर विराम लगा दिया, हर व्यक्ति को शक के दायरे में लाकर खड़ा कर दिया था।
यही नहीं, लोगों को अपने ईश्वर से भी दूर कर दिया था। मंदिर, मस्जिद व गुरुद्वारे भी बंद कर दिये गए थे। इस दौरान धार्मिक गतिविधियां भी नहीं हुई। मेरठ में कई परिवारों से उनके दुलारों को छीन लिया। उनके परिजनों को जिंदगी भर यह दु:ख सालता रहेगा कि वे अपनों का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाए। कोरोना ने हजारों नौजवानों का रोजगार छीनकर उन्हें बेरोजगार कर दिया तो कई बहुत सारे जमे हुए उद्योग भी खत्म हो गए।
लोगों को महीनों तक अपने ही घरों में कैद की जिंदगी गुजारनी पड़ी। कोरोना से निपटने के लिए भरपूर प्रयास भी हुए, लेकिन इसके बाद भी शहर में लोगों की मौत का सिलसिला चलता रहा, जो दर्द दे रहा था। बड़ी धनराशि कोरोना की रोकथाम के लिए सरकार ने खर्च की, वहीं प्रशासन ने जो रसोई चलाई थी, उसका तो अभी तक भुगतान भी लटका पड़ा है।

इसके बावजूद अब भी कोरोना मुंह बाये खड़ा हो गया हैं। इसे बढ़ावा देने में हमारी लापरवाही भी जिम्मेदार हैं। क्योंकि कोरोना को सतर्क रहकर ही हराया जा सकता है। सबसे पहले खुर्जा के उस परिवार से कोरोना की एंट्री शहर में हुई थी।
यह परिवार महाराष्ट से घूमकर आया था। इसके बाद से ही शहर में कोरोना से दहशत पैदा हो गई थी। कुल पॉजिटिव 21470 मरीज मेरठ में आये थे तथा 409 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी हैं। 20989 मरीज स्वस्थ्य होकर अपने परिवार में पहुंचे।
मेडिकल व्यवस्था पर उठती रही अंगुलियां
सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर अंगुली भी खूब उठी। स्वास्थ्य सेवाएं इतनी खराब रही कि लोगों ने मेडिकल में बवाल तक कर दिया था तथा कई मरीज मेडिकल की एजरजेंसी से भाग भी गए थे। भाजपा विधायक डा. सोमेन्द्र तोमर ने भी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को कठघरे में खड़ा किया था। इसको लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र भी लिखा था।
इसके बाद शासन स्तर से डॉक्टरों की एक टीम आयी, जिसके बाद शासन स्तर से सुपरविजन किया जाने लगा, तब जाकर सरकारी सिस्टम में सुधार होने के दावे किये गए थे। दरअसल, कोरोना से मेरठ में मौत का आंकड़ा बढ़ रहा था। पूरे प्रदेश में मेरठ मृत्युदर में टॉप पर था, जिसको लेकर खास बवाल मचा था। विपक्षियों ने भी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी।
रेलवे स्टेशन और रोडवेज पर नहीं कोरोना का डर
कोरोना का कहर दोबारा बढ़ने लगा है। वहीं, शहर में रोजाना आने वाले मामलों की संख्या भी पिछले माह के मुकाबले बढ़ रही है। ऐसे में जहां सावधानी बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं। वहीं, परिवहन निगम और रेलवे शहर के लिए मुसीबत का सबब बन सकते हैं। रोडवेज और रेलवे दोनों से ही सफर करने वाले यात्रियों द्वारा लापरवाही लगातार बरती जा रही है। इतना ही नहीं बल्कि विभागों के खुद के कर्मचारी ही गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं।
सिटी रेलवे स्टेशन पर दो दिन से लगातार स्वास्थ्य विभाग द्वारा महाराष्ट्र से आने वाले यात्रियों की जांच की जा रही है। जिसमें कुछ लोगों में संक्रमण की भी पुष्टि की जा चुकी है। वहीं, इसके बावजूद रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस अड्डों पर न तो यात्रियों के मुंह पर मास्क देखा जा रहा है और न ही स्टाफ के लोग मास्क लगा रहे हैं। भैंसाली बस अड्डे पर भी यही आलम लगातार देखा जा रहा है। बस अड्डे पर लगातार विभाग द्वारा मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंस का पालन कराने के लिए भले ही घोषणा की जा रही है, लेकिन इसका पालन खुद निगम के चालक और परिचालक ही नहीं कर रहे हैं।
गौरतलब है कि लॉकडाउन के बाद बसों का संचालन शुरु करते समय ही परिवहन निगम द्वारा गाइडलाइन जारी की गर्इं थी। जिसमें बसों में यात्रियों और चालक-परिचालक के लिए मास्क को अनिवार्य किया गया था, लेकिन फिलहाल यात्रियों तो दूर खुद निगम के चालक-परिचालक ही मास्क के परहेज करते नजर आ रहे हैं। वहीं, अब त्योहारी सीजन भी नजदीक है, जिस कारण यात्रियों की संख्या भी बढ़ने लगी है।
ऐसे में एहतियात बरतने की भी आवश्यकता बढ़ जाती है। वहीं इस संबंध में एआरएम राजेश कुमार का कहना है कि विभाग द्वारा लगातार यात्रियों को मास्क पहनने और गाइडलाइन का पालन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। बस अड्डे पर भी मास्क पहनने को लेकर घोषणा की जा रही है।
रोजाना जांच, फिर भी गाइडलाइन का पालन नहीं
सिटी स्टेशन पर स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा दो दिन से लगातार जांच की जा रही है। जिसमें महाराष्ट्र से आने वाले सभी यात्रियों की खास तौर से जांच की जा रही है, लेकिन सिटी स्टेशन पर भी यात्रियों सहित रेलवे के स्टाफ के लोगों पर ही मास्क नहीं दिखाई दे रहे हैं। जबकि स्टेशन परिसर में लगातार घोषणा की जा रही है। बावजूद इसके स्टेशन स्टाफ के लोग ही मास्क नहीं लगा रहे हैं।
कोरोना के 12 संक्रमित, हड़कंप
कोरोना की वापसी के आसार साफ दिखने लगे हैं। जिस तरह से रोज कोरोना संक्रमित निकल रहे हैं। उससे स्वास्थ्य विभाग चौकस हो गया है। रविवार को 12 पॉजिटिव निकलने के बाद मेरठ में अब तक 21512 लोग संक्रमित निकल चुके हैं। जबकि कोरोना के कारण अब तक 409 लोग जान गवां चुके हैं।
सीएमओ ने बताया कि कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। पिछले 10 दिन से कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जनवरी से लेकर 12 मार्च तक कोरोना के मामले न के बराबर निकल रहे थे। रविवार को 12 केस निकलने के बाद लोगों को अलर्ट रहने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आज 3800 से ज्यादा लोगों की टेस्टिंग की गई थी।
स्टेशन, बस अड्डे में हुई टेस्टिंग
सीएमओ ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर 98 लोगों को एंटीजन टेस्ट और 36 लोगों के आरटी जांच की गई। स्टेशन पर 134 लोगों की टेस्टिंग हुई। रोडवेज पर 11 लोगों के एंटीजन और 10 लोगों के आरटी जांच कराई गई। अब तक 769 लोगों के एंटीजन और 477 लोगों की आरटी जांच कराई गई। अब तक 1246 लोगों की जांच हो चुकी है।

