जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: डेंगू के लगातार बढ़ रहे मरीजों की संख्या से स्वास्थ्य विभाग भी चिंता में पड़ गया है। डेंगू के मरीजों की कुल संख्या 1316 पहुंच गई है। रविवार को जिले में डेंगू के 22 नए मरीज मिले। 299 सक्रिय मरीजों की संख्या रही। जबकि विभिन्न अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या 71 रही। घर पर इलाज ले रहे मरीजों की संख्या 228 है। अब तक 1017 मरीज रिकवर हो चुके हैं।
इस तरह डेंगू संक्रमण ने जिले में तेज रफ्तार के साथ पैर पसार लिए हैं। डेंगू ने शहरी क्षेत्रोंं से ग्रामीण इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है। डेंगू का खतरनाक स्तर लोगों को भयभीत कर रहा है। मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डा. अशोक तालियान ने बताया कि डेंगू संक्रमण की रोकथाम के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। जिन स्थानों पर लार्वा मिला है, वहां फागिंग कराई जा रही है।
इसके साथ ही जिले में एंटी लार्वा एवं विशेष सफाई अभियान भी चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिन स्थानों पर लार्वा मिलने की पुष्टि हुई है। उन्हें नोटिस जारी किया गया है। डेंगू ने लोगों को बेहाल कर दिया है। डेंगू बुखार से लोग तप रहे हैं।
डेंगू से अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है। इस वर्ष डेंगू मरीजों के आंकड़ों की संख्या ने साल 2017 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग कंटेनर सर्वे, एंटी लार्वा स्प्रे और फागिंग करा रहा है, लेकिन यह विफल साबित हो गया है। जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लार्वा रोधी गतिविधियां शुरू कर दी हैं। टीम शहर एवं गांव के लोगों को जागरूक भी कर रही है।
चिकित्सकों का कहना है कि डेंगू के लक्षण उभरते ही सतर्क हो जाएं। लक्षणों को नजरअंदाज न करें। इलाज में देरी से डेंगू जानलेवा बन सकता है। उधर, अस्पतालों में डेंगू वार्ड में बेड फुल हो चुके हैं। निजी एवं सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में डेंगू मरीज भर्ती होने से बेड की कमी हो गई है।
वहीं, इस संबंध में फिजीशियन डा. ब्रजभूषण का कहना है कि डेंगू बुखार एडीज मच्छर के काटने से होता है। अधिकतर सुबह और शाम को उड़ने वाले एडीज एजिप्टी नामक मच्छर के काटने से डेंगू संक्रमण शरीर में प्रवेश करता है।
डेंगू के खतरनाक लक्षण बेहोशी, प्लेटलेट्स का कम होना, पेट में तेज दर्द, हाथ-पैर का ठंडा पड़ना, बीपी में गिरावट लक्षण अचानक उभरते हैं। ऐसे में मरीज को सावधान होकर चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। खून की जांच कराएं। पूरी आस्तीन के कपडे जरूर पहनें।
डेंगू: क्या फागिंग से मिलेगी राहत?
मेरठ: डेंगू का कहर थम नहीं रहा है। ऐसे में क्या नगर निगम जो फागिंग करा रहा है, क्या उससे राहत मिलेगी? शहर में वैसे तो नगर निगम फागिंग करा रही हैं, लेकिन इस फागिंग से मच्छरों को खत्म किया जा सकता हैं? व्यापक स्तर पर फागिंग की आवश्यकता हैं, तभी मच्छरों से शहर को मुक्त किया जा सकता हैं।
फिर गंदगी की भरमार हैं। महत्वपूर्ण बात यह है भी है कि जहां पर फागिंग हो रही हैं, वहीं पर डेंगू के मामले हर रोज निकल रहे हैं। इसका मतलब यह है कि नगर निगम की फॉगिंग काम नहीं कर रही हैं। इसके लिए नगर निगम को भी रणनीति बनानी होगी कि मच्छरों का खात्मा कैसे किया जाए?
सरधना में डेंगू से दो की मौत, हड़कंप
गांव में फैल रही बीमारी से ग्रामीणों में दहशत, अन्य लोग भी डेंगू की चपेट में
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: ग्रामीण क्षेत्र में डेंगू और बुखार ने कहर बरपा रखा है। रविवार को सरधना के बपरसी गांव में डेंगू की चपेट में आकर एक महिला व एक शिक्षा मित्र की मौत हो गई। जिससे उनके परिजनों में कोहराम मच गया। इसके अलावा कई अन्य लोग भी डेंगू व बुखार की चपेट में है।
बढ़ती बीमारी से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।बपारसी गांव निवासी 40 वर्षीय प्रदीप पुत्र राय सिंह शिक्षामित्र थे। कुछ दिन पहले प्रदीप को बुखार हुआ था। उसने स्थानीय चिकित्सक से दवाई ली, लेकिन आराम नहीं लगा। जांच कराई तो पता चला की प्रदीप को डेंगू है।
परिजनों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उपचार के दौरान प्रदीप की मौत हो गई। इसके अलावा गांव की ही 28 वर्षीय चंचल पत्नी अमित को भी बुखार था। जांच कराने पर चंचल में भी डेंगू की पुष्टि हुई। मेरठ अस्पताल में उपचार के दौरान चंचल की भी मौत हो गई।
एक दिन में डेंगू से दो लोगों की मौत से गांव वालों में दहशत का माहौल है। इसके अलावा कई लोग डेंगू व बुखार की चपेट में है। वहीं, इस संबंध में सरूरपुर सीएचसी प्रभारी ओपी जायसवाल का कहना है कि मामला जानकारी में है। सोमवार को टीम भेजकर जांच कराई जाएगी।

