Sunday, May 31, 2026
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मेडिकल में फूटा कोरोना बम, 15 छात्राएं संक्रमित

  • लापरवाही: फिर भी हॉस्टल खुला, छात्राएं दहशत में

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेडिकल में बुधवार को कोरोना बम फटने से हड़कंप मच गया। यहां मेडिकल में बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही 15 छात्राएं कोरोना संक्रमित हो गई है। कोरोना की रिपोर्ट आने के बाद छात्राओं में दहशत का माहौल पैदा हो गया है।

ये छात्राएं मेडिकल की इमरजेंसी व ओपीडी में भी मरीजों को देखने का काम कर रही थी। ऐसे में बड़ी तादाद में मेडिकल आने वाले मरीजों को भी कोरोना होने की संभावनाएं हैं। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मेडिकल में पढ़ाई करने वाली बीएससी नर्सिंग की छात्राएं कैंपस में ही हॉस्टल में रहती है।

एक कक्ष में 10-10 छात्राएं संयुक्त रूप से रह रही हैं। इनमें से ही छात्राएं कोरोना संक्रमित हुई हैं, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद छात्राएं दहशत में आ गई। छात्राओं ने प्रधानाचार्य से भी मिली और फिलहाल छात्राओं को उनके घर भेजने की मांग की, ताकि कोरोना संक्रमण से बचा जा सके। कोरोना संक्रमण से जो छात्राएं संक्रमित हुई है, इसको भी मेडिकल प्रशासन छुपा रहा हैं।

क्योंकि छात्राओं को यदि घर भेज दिया तो मेडिकल में स्टाफ की कमी हो जाएगी। क्योंकि बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही छात्राएं व्यवस्थाओं को संभालने में बड़ी मदद करती है। हालांकि इसमें मेडिकल प्रशासन बड़ी लापरवाही कर रहा है। जब छात्राएं हर रोज संक्रमित हो रही है तो फिर उन्हें अलग-अलग रूम उपलब्ध कराये जाने चाहिए थे या फिर छात्राओं को उनके घर भेज देना चाहिए, मगर इसमें मेडिकल प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं।

यह लापरवाही छात्राओं के लिए भारी पड़ सकती है। क्योंकि एक-एक रूम में 10-10 छात्राएं संयुक्त रूप से रह रही है। इनमें से ही हर रोज कोई न कोई छात्रा कोरोना संक्रमित हो रही है, जो गंभीर संकेत दे रहा है। यह भी साफ है कि मेडिकल में कोरोना व्यापक स्तर पर पांव पसार गया है। छात्राओं के हॉस्टल में सफाई व कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव भी नहीं कराया जा रहा है, जिसकी वजह से भी संक्रमण ज्यादा फैल रहा है।

ओपीडी बंद होने से मचा हाहाकार

शासन के आदेश के बाद बुधवार को मेडिकल व जिला अस्पताल समेत सभी सरकारी ओपीडी बंद कर दी गयी हैं। मेडिकल में केवल कोविड ओपीडी लगी। बड़ी संख्या में इलाज की आस में पहुंचे नॉन कोविड मरीज वापस लौटा दिए गए। वहीं, दूसरी ओर प्राइवेट अस्पतालों ने भी नॉन कोविड मरीजों के इलाज से पहले कोविड जांच की शर्त लगा दी है। इसकी सबसे ज्यादा मार गरीब मरीजों पर पड़ रही है।

मेडिकल व जिला अस्पताल सरीखी सरकारी ओपीडी बंद कर दिए जाने से कोरोना संक्रमण की बड़ी मार उन गरीबों पर पड़ी है बीमारी में जिनको सिर्फ सरकारी अस्पताल का सहारा होता है। कोरोना से निपटने के नाम पर सबसे पहले इन गरीबों से मेडिकल व जिला अस्पताल की ओपीडी का सहारा छीना गया है। सभी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी बंद कर दी गयी हैं।

ओपीडी बंद किए जाने की पुष्टि मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने की हैं। उन्होंने बताया कि ऐसा शासन के निर्देश पर किया गया है। विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन आनंद कुमार के महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण उत्तर प्रदेश शासन तथा डीएम मेरठ व प्राचार्य एलएलआरएम मेडिकल कालेज को भेजे पत्र में कहा है कि कोविड महामारी से बचाव व अस्पतालों में अनावश्यक भीड़ रोकने एवं उन्हें किसी भी प्रकार के अन्य संक्रमण से बचाने तथा कोविड ग्रस्त रोगियों के उपचार के लिए चिकित्सकों की उपलब्धता बढाने के निमित आवश्यक चिकित्सा सेवाओं जिनमें नोवल कोरोना वायरस महामारी की स्क्रीनिंग ओपीडी, एन्टीनेटल क्लीनिक व नियोनेटल सेवाएं, क्रीमोथेरेपी व रेडियोथेरेपी तथा डायलेसिस सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी ओपीडी अग्रिम आदेश तक स्थगित की जाती हैं।

निजी चिकित्सकों की कोरोना जांच की शर्त

सरकारी ओपीडी बंद किए जाने से इलाज के लिए अब महंगे प्राइवेट डाक्टरों का ही सहारा है, लेकिन महंगे डाक्टरों से इलाज कराना हर एक के बूते की बात नहीं। वहीं, दूसरी ओर निजी चिकित्सकों ने मरीजों की संभावित भीड़ को देखते हुए कोविड टेस्ट की शर्त थोप दी है। उनका कहना है कि मरीज को मना नहीं करेंगे, लेकिन मरीज पहले कोविड टेस्ट कराए।

इलाज के लिए कोरोना पॉजिटिव की लंबी होती जा रही वेटिंग लिस्ट

मोबाइल पर संक्रमित मैसेज आने के बाद भी मरीज को इलाज के नाम पर लंबा इंतजार कराया जा रहा है। गंगानगर के मिनाक्षीपुरम निवासी पंकज अग्रवाल एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं। सिम्टम नजर आने पर उन्होंने प्राइवेट लैब में 900 रुपये फीस देकर आरटीपीसीआर जांच करायी तो रिपोर्ट पॉजिटिव आयी।

इसके बाद वह स्वास्थ्य विभाग की काल का इंतजार करने लगे। जब काल नहीं आयी तो उन्होंने खुद कंट्रोल रूम पर सूचना दी। कई बार सूचना के बाद तीन दिन बाद उनके यहां टीम पहुंची। उन्हें घर में ही क्वारंटाइन किया गया है। वहीं, दूसरी ओर नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सैंपलों को लेकर घोर लापरवाही बरती जा रही है। वहीं, दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि कोरोना की तेजी से बढ़ती रफ्तार इंतजामों पर भारी पड़ रही है।

सैंपलों को लेकर लापरवाही

कोरोना की जांच के लिए जमा किए जा रहे सैंपल बजाय मेडिकल लेब भेजने के कूडेÞदान में फेंके जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के कुछ नाकारा कर्मियों की इस कारगुजारी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। जिनके परिवार में बीमार पडे हैं और सैंपल रिपोर्ट न आने के कारण इलाज नहीं हो पा रहा है। महानगर के शारदा रोड सरदार पटेल स्थित नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ की लापरवाही के चलते बड़ी संख्या में कोरोना जांच के लिए एकत्र किए गए सैंपल मेडिकल लेब तक नहीं पहुंच सके।

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