Sunday, August 7, 2022
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यूएस ट्रेजरी रिपोर्ट में दावा, कोरोना का भारतीय अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर नहीं

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जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कांग्रेस को सौंपी एक रिपोर्ट में कहा है कि तीन जोरदार कोविड-19 लहरों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने जोरदार वापसी की है। अपनी अर्ध-वार्षिक रिपोर्ट में ट्रेजरी ने कहा कि हालांकि भारत में दूसरी लहर ने 2021 के मध्य तक विकास पर भारी दबाव डाला, जिससे आर्थिक सुधार में देरी हुई, लेकिन अब यह सही राह पर है।

यूएस ट्रेजरी ने शुक्रवार को भारत के टीकाकरण प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि टीकाकरण रोलआउट में तेजी आने के साथ ही बीते वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में आर्थिक गतिविधियों में जोरदार उछाल आया। 2021 के अंत तक भारत की लगभग 44 प्रतिशत आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया जा चुका था।

इसमें कहा गया है कि 2020 में सात प्रतिशत की गिरावट के बाद साल 2021 की दूसरी तिमाही तक , उत्पादन पूर्व-महामारी के स्तर पर लौट आया, इसमें पूरे वर्ष में आठ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में कोरोना की तीसरी लहर का जिक्र करते हुए कहा गया कि साल 2022 की शुरुआत के बाद से भारत को ओमिक्रॉन वैरिएंट के बड़े प्रकोप का सामना करना पड़ा, लेकिन मौतों की संख्या और व्यापक आर्थिक गिरावट सीमित रही है।

रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार ने 2021 में महामारी की पृष्ठभूमि के खिलाफ अर्थव्यवस्था को वित्तीय सहायता प्रदान करना लगातार जारी रखा। इसमें अनुमान व्यक्त किया गया है कि 2022 के वित्तीय वर्ष के लिए कुल राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 6.9 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा, जो कि पूर्व-महामारी के घाटे से अधिक है।

आरबीआई के प्रयासों का जिक्र करते हुए ट्रेजरी ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने मई 2020 से अपनी प्रमुख नीतिगत दरों को चार प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा, लेकिन जनवरी 2021 में कोरोना के शुरुआती भाग के दौरान विकास का समर्थन करने के लिए डिजाइन किए गए असाधारण तरलता उपायों को धीरे-धीरे खोलना शुरू कर दिया था।

इसके अलावा, आर्थिक सुधार और बढ़ती वस्तुओं की कीमतों, विशेष रूप से ऊर्जा की कीमतों के बीच, 2021 की दूसरी छमाही में माल आयात विशेष रूप से तेजी से बढ़ा, जिससे 2021 में साल-दर-साल आयात में 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई। भारत का निर्यात भी 2021 में बढ़ा, हालांकि आयात की तुलना में इसकी दर कम रही और इसमें 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। विभाग ने कहा कि भारत का सेवा व्यापार अधिशेष (जीडीपी का 3.3 प्रतिशत) और आय अधिशेष (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) आंशिक रूप से व्यापक माल व्यापार घाटे की भरपाई करता है।

रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार अधिशेष पिछले एक साल में काफी बढ़ा है। 2013 और 2020 के बीच, भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ लगभग 30 अरब डॉलर के द्विपक्षीय सामान और सेवाओं के व्यापार अधिशेष चलाया। 2021 में, माल और सेवाओं का व्यापार अधिशेष 45 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत का द्विपक्षीय माल व्यापार अधिशेष 33 अरब डॉलर (37 प्रतिशत ऊपर) तक पहुंच गया, जबकि द्विपक्षीय सेवाओं का अधिशेष 2021 में बढ़कर 12 अरब डॉलर (29 प्रतिशत ऊपर) हो गया। ट्रेजरी ने कहा कि विस्तार मुख्य रूप से अमेरिका की बढ़ी हुई मांग से प्रेरित है।

भारत ने अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की मुद्रा मॉनिटरिंग लिस्ट में शुक्रवार को अपना स्थान बनाए रखा। ट्रेजरी विभाग की ओर से कहा गया कि भारत ने दिसंबर 2021 और अप्रैल 2021 की रिपोर्ट में तीन में से दो मानदंडों को पूरा किया। इसमें अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय ट्रेड सरप्लस था। वाशिंगटन ने भारत को 11 अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ रखा है जो अपनी मुद्रा और व्यापक आर्थिक नीतियों को लेकर मजबूत माने जाते हैं।

मॉनिटरिंग लिस्ट में चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, इटली, भारत, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, ताइवान, वियतनाम और मैक्सिको शामिल हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपनी अर्ध-वार्षिक रिपोर्ट में विदेशी मुद्रा नीतियों पर विसतृत रिपोर्ट पेश की। इसको लेकर ट्रेजरी विभाग की ओर से कहा गया कि ताइवान और वियतनाम को छोड़कर दिसंबर 2021 की रिपोर्ट में निगरानी सूची में सभी देश थे। ट्रेजरी के सचिव जेनेट एल येलेन ने भारत को सूची में रखने के अपने निर्णय के बारे में बताते हुए कहा कि भारत लगातार दो रिपोर्टों के लिए दो से कम मानदंडों को पूरा करने तक निगरानी सूची में रहेगा।

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