Saturday, June 19, 2021
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दुल्हैड़ा में कोरोना लील गया 20 लोगों की जिंदगी

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मुसाहिद हुसैन |

मोदीपुरम: एनएच-58 से मात्र एक किमी की दूरी पर स्थित दुल्हैड़ा गांव में कोरोना वैश्विक महामारी से हालात बेकाबू हो गए हैं। गांव का आलम यह हो गया है कि अब तक 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। नियमित रूप से प्रतिदिन यहां मौतों का सिलसिला बदस्तूर जारी है, लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक ने इस गांव की समस्या को जानना भी गवारा नहीं समझा।

हालात बद से बदतर होने के कारण गांव के लोगों में इस भयंकर बीमारी का खौफ साफ दिखाई दे रहा है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद तो इस गांव में हालात यह हो गए हैं कि बच्चों से लेकर नौजवान और महिलाओं तक किसी को भी इस बीमारी ने अभी तक छोड़ा नहीं है।

अगर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो 20 से अधिक मौत इस गांव में होने के कारण अब लोगों ने शहरी क्षेत्र की ओर अपना रुख करना शुरू कर दिया है। कोरोना वैश्विक महामारी का प्रकोप ईस गांव में साफ नजर आ रहा है।

अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधि तक का इस गांव की ओर कोई ध्यान नहीं दिखाई दे रहा है। गांव के हालात खराब होने के कारण लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। गांव के गौरव चौहान का कहना है गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है जो आठ गांवों के ग्रामीणों का यहां इलाज होता है।

पिछले एक महीने से इस केंद्र के अंदर ताला लगा हुआ है। यह केंद्र मात्र तीन दिन खुला कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए चिकित्सक यहां आए इस केंद्र के बंद होने के कारण ग्रामीणों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते स्वास्थ्य केंद्र दौराला के प्रभारी को भी फोन से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन उसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई है।

चुनाव के बाद से हालात हुए खराब

गांव में चुनाव के बाद से हालात ज्यादा खराब हुई त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भीड़ होने के कारण देहात क्षेत्र में कोरोना बेकाबू हो गया। जिसके चलते गांव-गांव में यह समस्या उत्पन्न हो गई अगर चुनाव ना होते तो शायद गांव में कोरोना की दस्तक न होती।

महिलाएं बच्चों, नौजवानों के लिए बीमारी बनी मुसीबत

गांव में महिलाएं बच्चे और नौजवानों की मौत एक के बाद एक करके हो रही है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने दहशत तो बनी हुई है वही लोग एक-दूसरे की मदद करने से भी कतराते हुए नजर आ रहे हैं। अगर गांव में समय रहते हालात को काबू नहीं किया गया तो स्थिति खराब हो जाएगी।

आखिर स्वास्थ्य केंद्र पर किसने लगवाया ताला

गांव में स्थित यह स्वास्थ्य केंद्र आसपास के आठ गांवों के ग्रामीणों का इलाज करता है। कोरोना की भयंकर बीमारी फैल रही है। ऐसे में किसने स्वास्थ्य केंद्र का ताला लगा है। यह प्रश्न सवालिया निशान लगा रहा है। इस भयंकर बीमारी के प्रकोप की रोकथाम के लिए सरकार लाख प्रयास कर रही है, लेकिन उसके बाद भी लापरवाह चिकित्सक सरकार के प्रयासों को पलीता लगा रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

इनकी हो चुकी मौत

जयचंद, महावीर, बबली, बाबू, निर्मला, नीलम, सुरेशवती, महेंद्र समेत 20 लोगों की कोरोना वैश्विक महामारी के प्रकोप से मौत हो चुकी है। अब भी आधा दर्जन से अधिक ग्रामीण इस भयंकर बीमारी से जूझ रहे हैं। जिसके चलते गांव के हालात बेहद खराब है।

गांव में जांच करने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम

गांव के बेकाबू हालात को देखते हुए रविवार को स्वास्थ्य केंद्र की टीम जांच करने के लिए पहुंची और 70 लोगों की कोरोना की जांच की। ग्रामीणों ने जनपद के आला अधिकारियों से जब इसकी शिकायत की तो तब जाकर गांव में टीम जांच करने पहुंची।

गांव के ही पूर्व प्रधान प्रेमपाल सिंह का कहना है लोगों की घर-घर जाकर जांच होनी चाहिए गांव की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। चुनाव के बाद से मेरी पत्नी खुद कोरोना पॉजिटिव हो गई है। गांव के लोगों को इस समय बेहतर उपचार मिले उसके बाद ही गांव की स्थिति नियंत्रण में आ सकती है। गांव की समस्याओं को शासन-प्रशासन में बैठे अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।

गांव के ही अनिल चौहान का कहना है कि यह बेकाबू हुई बीमारी गांव में तभी रुक सकती है। जब गांव में समय समय से सैनिटाइजेशन हो। स्वास्थ्य विभाग की टीम 24 घंटे गांव में बने स्वास्थ्य केंद्र पर एक प्रभारी चिकित्सक के साथ मौजूद हो। तब जाकर गांव की स्थिति काबू में आ सकती है। गांव में अब तक जो भी मौत हुई है। वह सिर्फ आॅक्सीजन न मिलने के कारण हुई है।

गांव के समस्या अधिकारियों को अवगत कराई जा चुकी है। बाल किशोर ग्राम प्रधान का कहना है कि गांव का प्रधान निर्वाचित होने के बाद से उन्होंने गांव में दो बार सैनिटाइजेशन करा दिया है। गांव के ग्रामीणों को कोरोना की भयंकर बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया है।

इसलिए गांव के अंदर स्थित स्वास्थ्य केंद्र को 24 घंटे के लिए नियमित रूप से खोला जाए और मरीज भर्ती होने की यहां व्यवस्था होनी चाहिए। इसके बाद ही स्थिति काबू में आ सकती है। ग्रामीणों के लिए अपने प्रयास से वह लगातार मदद करने में लगे हुए हैं।

क्या कहना है स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी का

गांव में कोरोना महामारी का प्रकोप बढ़ा है। ऐसे में गांव के अंदर चिकित्सकों की टीम ग्रामीणों की जांच कर रही है। स्वास्थ्य केंद्र को खोलने के लिए दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं। गांव के लोगों को कोई समस्या न हो, इसके लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।  -डा. आशुतोष, प्रभारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दौराला

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