Wednesday, March 3, 2021
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सड़क चौड़ीकरण के लिए काटे गए 200 से ज्यादा पेड़

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  • मेरठ-करनाल हाइवे पर कम संख्या में बचे पेड़, अब हरा-भरा नहीं रहा हाइवे

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ-करनाल हाइवे का चौड़ीकरण चल रहा है। इससे पहले करीब 200 पेड़ काट दिये गए हैं। जब मेरठ-करनाल हाइवे बना था, तब बड़ी तादाद में पेड़ काटे गए थे। इस तरह से हाइवे पर अब पेड़ नहीं बचे हैं। नये सिर से भी पेड़ नहीं लगाये गए। हरा-भरा मेरठ-करनाल हाइवे अब नहीं दिखता। नये सिरे से जो पेड़ लगाये जाने चाहिए थे, वो भी नहीं लगे।

दरअसल, बड़ी तादाद में हाइवे पर पेड़ सड़क के दोनों तरफ थे, लेकिन मेरठ-करनाल हाइवे जब नये सिरे से निर्माण हुआ था, तब भी व्यापक स्तर पर पेड़ काट दिये गए थे। हरियाली पूरी खत्म हो गई थी, जो हरे पेड़ तब बच गए थे, तब उन पर भी कुल्हाड़ी चौड़ीकरण के चलते चला दी गई है।

200 पेड़ काट दिये गए हैं, जो पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है। कई ऐसी कंपनी देश में है जो बड़े पेड शिफ्ट करने का काम करती है, मगर इस तकनीक का उपयोग यहां नहीं किया जाता। यही वजह है कि हरे पेड़ काटकर पर्यावरण को बड़ा नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

एक तरफ तो 15 व 10 वर्ष से ज्यादा चल चुकी गाड़ियों के सड़कों पर दौड़ने के लिए एनसीआर में रोक लगा दी गई हैं। यह सब पर्यावरण को देखते हुए कदम उठाये जा रहे हैं, लेकिन हरे पेड़ जो पर्यावरण के लिए बेहद आवश्यक है, उन्हें क्यों काटने की अनुमति दी जा रही है।

बड़ा सवाल यह है कि जब इन पेड़ को शिफ्ट किया जा सकता है तो फिर शिफ्ट क्यों नहीं कराया जा रहा है। हाइवे चौड़ीकरण भी जरूरत है, जिसके लिए पेड़ काटने की नहीं, बल्कि शिफ्ट करने की जरूरत है। इस तरफ जनप्रतिनिधि व एनएचएआई भी ध्यान नहीं दे रहा है।

जिसके चलते पर्यावरण को भविष्य में बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। वर्तमान में मेरठ-करनाल हाइवे पर नानू गांव से लेकर बपारसी के बीच में सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। पुलिया बनाई जा रही है, जिसके बाद पेड़ भी काटे जा रहे हैं, जो चौड़ीकरण के बीच अवरोध बने हुए थे।

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