Sunday, June 13, 2021
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बासमती चावल के निर्यात के लिए जल्द खुलेंगे दरबार

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  • दो साल से ईरान से तेल लेना हो गया था बंद
  • चावल के निर्यात पर भी लग गई थी रोक

मुसाहिद हुसैन |

मोदीपुरम: कोरोना वैश्विक महामारी के प्रकोप में बासमती की डिमांड़ बढ़ी है। इस बढ़ती डिमांड के चलते दामों में भी उछाल है। खास बात है कि ईरान में भारत सबसे ज्यादा चावल का निर्यात करता था, लेकिन ईरान और अमेरिका में तकरार होने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप सरकार का साथ देते हुए भारत ने ईरान से तेल लेना बंद कर दिया था।

 

जिसके बाद चावल का निर्यात भी रुक गया था, लेकिन अमेरिका में सत्ता का परिवर्तन होने के बाद जॉन बाइडन सरकार आने के बाद संभावना व्यक्त की जा रही है कि जल्द ही ईरान से संबंधों में बढ़ी दरार ठीक होगी। जॉन बाइडन सरकार ने ढिलाई बरती है। जिसके चलते संभावना बनी हुई है कि ईरान में चावल का निर्यात करने के लिए दरवाजे खुल जाएंगे। कोरोना महामारी के प्रकोप में हर बार बासमती चावल की डिमांड में इजाफा होता है।

पिछले दो वर्ष से ईरान को भी चावल का निर्यात बंद पड़ा था, लेकिन इस बार संभावना है कि जल्द ही निर्यात शुरू होगा। बीईडीएफ संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डा. रितेश शर्मा का कहना है कि ईरान को चावल निर्यात करने के लिए दोबारा से शुरूआत हो सकती है। इस महामारी में बासमती की डिमांड बढ़ी है। इसके अलावा चावल की अन्य किस्मों की मांग में भी इजाफा हो रहा है।

यूरोप में तूडल बासमती की डिमांड बढ़ी

यूरोप में तूडल बासमती की डिमांड बढ़ी है। ऐसे में किसानों को 1637 और 1121 बासमती की किस्म को ज्यादा प्राथमिकता देनी चाहिए। क्योंकि इनकी डिमांड बढ़ने से किसानों को फायदा मिलेगा। दाम भी इस बार अच्छा खास मिलने की उम्मीद है।

चावल के एक्सपोर्ट में हुई वृद्धि

चावल के एक्सपोर्ट में लगातार वृद्धि हो रही है। 31 मार्च तक 10 प्रतिशत बासमती की डिमांड बढ़ी है। जबकि 150 प्रतिशत अन्य किस्मों के चावल की डिमांड बढ़ी है। प्रधान वैज्ञानिक डा. रितेश शर्मा ने बताया कि 1509 फसल के समय का दाम दो हजार रुपये था। अब इसका दाम 2500 रुपये हैं। बारिश इस बार ठीक रहेगी। जिसके चलते धान की खेती करने में किसानों को कोई दिक्कत भी नहीं होगी।

मिलों के पास नहीं है माल

इस बार मिलों के पास एक्सपोर्टरों के लिए माल नहीं है। इसलिए इस बार किसानों के लिए बेहद खुशखबरी है। यूरोप और यूएसए में लगातार डिमांड बढ़ रही है। ऐसे में धान की खेती करने वाले किसानों की बल्ले-बल्ले होगी।


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