
कर्नाटक चुनाव परिणाम आने के बाद से क्षेत्रीय दलों के सुर बदल रहे हैं। बात-बात में कांग्रेस को कोसने और राहुल गांधी को विपक्षी गठबंधन का नेता न मानने की बात करने वाले अपने स्टैंड चेंज कर रहे हैं। राहुल गांधी का मुखर विरोध करने वाले विपक्षी दल नरेंद्र मोदी को हराने को सत्ता से बाहर करने के लिए उनसे उम्मीद कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि कल तक विपक्षी गठबंधन की बैठकों में बुलाने के बाद भी आने में आनाकानी करने वाले अब कांग्रेस की तरफ आशा भरी निगाह से देख रहे हैं। इसका कारण कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के साथ ही अपने जनाधार को कायम रखने की चुनौती भी, इसका एक बड़ा कारण है। दो आम चुनाव और कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों के परिणामों का विश्लेषण करें तो इस तथ्य की पुष्टि होती है। जनता छोटे दलों के परिवारवाद, अवसरवादिता, पदलोलुपता और भ्रष्टाचार के कारण इनसे ऊबी हुई दिख रही है।