Tuesday, March 28, 2023
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अधिक आमदनी के लिए करें बटन मशरूम की खेती

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बटन मशरूम (खुम्ब) स्वदेशी व विदेशी बाजारों में सर्वाधिक लोकप्रिय है। इस मशरूम का उत्पादन देशों में विभिन्न योजनाओं के तहत लघु, मध्यम व वृहत स्तर पर इकाइयां स्थापित कर किया जा रहा है।

आवश्यक सामग्री
मशरूम घर, ट्रे, रैक व 3045 से.मी. पॉलीथिन के थैले, कम्पोस्ट, मशरूम स्पान, केसिंग मिट्टी आदि।
मिश्रण तैयार करना
ऊपर दिए गए फार्मूला में से भूसा या भूसे तथा पुआल के मिश्रण को पक्के फर्श पर 2 दिन (48 घंटों) तक रुक-रुक कर पानी का छिड़काव करके गीला किया जाता है। भूसे को गीला करते समय पैरों से दबाना चाहिए। साथ ही गीले भूसे की ढेरी बनाने के 12-16 घंटे पहले जिप्सम को छोडकर अन्य सभी सामग्री जैसे-उर्वरकों व चोकर को एक साथ मिलाकर गीला कर लेते हैं तथा ऊपर से गीली बोरी से ढक देते हैं। 16 घंटे बाद इसको गीले भूसे में अच्छी तरह मिला दिया जाता है।
ढेर बनाना
गीले किए गए मिश्रण (भूसे व उर्वरक आदि) को मिलाकर 5 फुट चौड़ा ऊंचा ढेर बनाते हैं। ढेर की लंबाई सामग्री की मात्रा पर निर्भर करती है, लेकिन ऊंचाई व चौड़ाई ऊपर लिखे माप से अधिक या कम नहीं हो। यह ढेर पांच दिन तक (ढेर बनाने के दिन के अतिरिक्त) ज्यों का त्यों लगा रहता है। बाहरी परतों में नमी कम होने पर आवश्यकतानुसार पानी का छिड़काव किया जा सकता है।
कम्पोस्ट की पलटाई
पहली पलटाई (6वां दिन) छठवें दिन ढेर को पहली पलटाई दी जाती है। पलटाई देते समय इन बातों को विशेष ध्यान रखते हैं कि ढेर के प्रत्येक हिस्से की उलट-पलट अच्छी तरह हो जाये ताकि प्रत्येक हिस्से को सड़ने-गलने के लिए पर्याप्त वायु व नमी प्राप्त हो जाए। ढेर बनाते समय यदि कम्पोस्ट में नमी कम हो तो आवश्यकतानुसार पानी का छिडकाव करते हैं। नये ढेर का आकार व नाप पहले के ही भांति ही हो। आगे की पलटाइयों को भी पहले पलटाई की तरह करते हैं।
दूसरी पलटाई (10वां दिन), तीसरी पलटाई (13वां दिन)-इस पलटाई के समय जिप्सम भी मिला देते हैं, चौथी पलटाई (16वां दिन), पांचवीं पलटाई (19वां दिन), छठवीं पलटाई (22वां दिन), सातवीं पलटाई (25वां दिन)-इस पलटाई के दौरान नुवान या मैलाथियान (0.1 प्रतिशत) का छिड़काव करें, आठवीं पलटाई (28वें दिन)-28वें दिन खाद (कम्पोस्ट) में अमोनिया व नमी का परीक्षण किया जाता है। अमोनिया की जांच के लिए कम्पोस्ट को सूंघते हैं, सूंघने पर यदि अमोनिया की गंध (पशुशाला में आने वाली मूत्र जैसी गंध) आती है तो 3 दिन के अंतर पर एक या दो पलटाई और कर देनी चाहिए।
स्पानिंग (बिजाई)
कम्पोस्ट बन जाने के बाद इसमें मशरुम का बीज मिलाया जाता है। इस प्रक्रिया को ‘स्पानिंग’ कहते हैं। मशरूम बीज (स्पान) देखने में सफेदकवक जालयुक्त होता है। बिजाई करने से पूर्व बिजाई स्थान तथा बिजाई  में प्रयुक्त किए जाने वाले बर्तनों को 2 प्रतिशत फार्मेलिन के घोल में धोयें व बिजाई का कार्य करने वाले व्यक्ति अपने हाथ साबुन से अच्छी तरह धोयें जिससे कम्पोस्ट में किसी प्रकार का संक्रमण न जा सके। कम्पोस्ट में 0.75-0.80 प्रतिशत की दर से स्पान मिलाना चाहिए यानि 100 कि.ग्रा. कम्पोस्ट में 750/ 800 ग्राम स्पान मिलाना चाहिए। प्रयोग किये जाने वाले स्पान से किसी प्रकार की अवांछित गंध आने पर इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए। सदैव शुद्ध एवं ताजे स्पान का ही प्रयोग करना चाहिए।
भरी हुई पालीथिन के थैलों को रखने के लिए लोहे या बांस का मचान पहले से ही बना लेना चाहिए तथा कम्पोस्ट भरे थैले रखने से 2 दिन पहले इस कमरे के फर्श को 2 प्रतिशत फार्मेलिन घोल से धोते हैं तथा दीवारों एवं छत पर इस घोल का छिडकाव करते हैं इसके तुरंत बाद कमरे के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर देते हैं। बिजाई करने के साथ-साथ 10-15 किलोग्राम बीजित कम्पोस्ट प्रत्येक पॉलीथिन के थैलों में भरते हैं साथ ही साथ ध्यान रखते हैं कि थैले में कम्पोस्ट की ऊंचाई 1 फिट से ज्यादा न हो। इसके बाद थैलों का  मुंह, कागज की थैली के समान पॉलीथिन मोडकर बंद कर देते हैं। थैलों को कमरे में बने बांस के टांड पर एक-दूसरे से सटाकर रख देते हैं। स्पानिंग के समय कमरे का तापमान 22-25 डिग्री सेल्सियस तथा नमीं 80-85 प्रतिशत होनी चाहिए। नमी कम होने पर कमरे की दीवारों पर पानी का छिडकाव करना चाहिए। लगभग 12-15 दिन में कवक जाल (बीज के तन्तु) खाद में फैल जाते हैं और खाद का रंग गहरे भूरे से बदलकर रुई जैसा सफेद हो जाता है।
केसिंग
कम्पोस्ट में सफेद रंग का कवक जाल फैलने के बाद इसमें केसिंग की जाती है।  कवक जाल को कम्पोस्ट (खाद) में फैल जाने के बाद मिट्टी की परत चढ़ाने की क्रिया को केसिंग कहते हैं। इसके बाद खुम्ब निकलना आरम्भ होती है। यह केसिंग मिट्टी एक प्रकार की मिश्रण होती है जो दो साल पुरानी गोबर की खाद व दोमट मिट्टी (बराबर हिस्सों में) को मिलाकर तैयार की जाती है। इस केसिंग मिश्रण को कम्पोस्ट पर चढ?े से पहले रोगाणु व सूत्रकृमि मुक्त करने के लिए 2 प्रतिशत फार्मेलिन के घोल से उपचारित करते हैं। इसके बाद इस मिश्रण को पॉलीथिन से चारों तरफ से ढंक देते हैं। केसिंग प्रक्रिया शुरू करने के 24 घण्टे पूर्व पॉलीथिन हटा देते हैं और इस मिश्रण को साफ बेलचे से उलट पलट देते हैं जिससे फार्मेलिन की अनावश्यक गंध निकल जाय। केसिंग मिश्रण बनाने का काम स्पानिंग के बाद शुरू कर देना चाहिए। कवक जाल फैले थैलों का मुंह खोलकर खाद की सतह को हल्का दबाकर चैरस कर लेते हैं तथा केसिंग मिश्रण की 3-4 से.मी. मोटी परत चढ़ा देते हैं इस दौरान भी कमरे में 22-25 डिग्री सेल्सियस तापमान और 80-85 प्रतिशत नमी को बनाये रखते हैं।
केसिंग के बाद प्रतिदिन थैलों में नमी का निरीक्षण करते रहते हैं और जरूरत पड़ने पर पानी का छिड़काव करते रहते हैं। केसिंग करने के बाद (लगभग एक सप्ताह) जब कवक जाल केसिंग की परत में फैल जाये तब कमरे का तापमान कम करके 14-18 डिग्री सेल्सियस ला देना चाहिए और यह तापमान पूरे फसल उत्पादन काल तक बनाए रखना चाहिए। इस तापमान पर खुम्ब कलिकाएं (पिनींग) बनना शुरू हो जाती है और बाद में परिपक्व खुम्ब में बदल जाती है। इस दौरान 85-90 प्रतिशत नमी की आवश्यकता होती है। इसलिए थैलों पर सुबह और शाम पानी का छिड़काव करते रहना चाहिए तथा कमरे में ताजी हवा के लिए सुबह-शाम कुछ देर के लिए दरवाजे व खिड़कियां खोल देना चाहिए।
खुम्बों की तुड़ाई, प्रसंस्करण व उपज
खुम्ब कलिकायें बनने के लगभग 2-4 दिन बाद ह्यबटनह्ण के आकार के बड़े-बड़े खुम्ब बन जाते हैं। जब इन खुम्बों की टोपी का आकार 3-4 सेमी का हो और टोपी बंद हो तब घुमाकर तोड़ना चाहिए। इस प्रकार थैलों में खुम्ब गुच्छों के रूप में हर 3 से 5 दिन पर निकलता है। तुड़ाई के बाद शीघ्र इसे उपयोग में लाना चाहिए। सामान्य तापमान पर खुम्ब की 12 घंटों तक फ्रिज में 2-3 दिन तक रख सकते हैं। लम्बे अवधि तक भंडारण के लिए मशरूम को 18 प्रतिशत नमक के घोल में रखा जा सकता है।
इस प्रकार 8-10 सप्ताह में पूरा उत्पादन मिल जाता है। एक क्विंटल कम्पोस्ट से लगभग 12 किग्रा मशरूम की उपज प्राप्त होती है। मशरूम को सफेद एवं चमकदार बनाने के लिए तुड़ाई से पूर्व 0.1 प्रतिशत एसकार्बिक एसिड का छिड़काव करते हैं।
बटन खुम्ब उगाने का तरीका
देश के मैदानी एवं पहाड़ी भागों में बटन खुम्ब को शरद ऋतु (अक्टूबर से मध्य फरवरी ) तक उगाया जाता है क्योंकि इस ऋतु में तापमान कम तथा हवा में नमी अधिक होती है खुम्ब उत्पादन में  कवक जाल के फैलाव के दौरान 22-25 डिग्री सेल्सियस तथा फलन के लिए 14-18 डिग्री सेल्सियस तापमान साथ ही  80-85 प्रतिशत नमी की आवश्यकता होती है। शरद ऋतु के आरम्भ और अंत तक  इस तापमान व नमी को आसानी से बनाये रखा जा सकता है। बटन खुम्ब को कृत्रिम ढंग से तैयार की गई खाद (कम्पोस्ट) पर उगाया जाता है।
रोग एवं उपचार
बटन मशरूम में कुछ बीमारियां लग जाती हैं, जिनका उपचार किया जाना जरूरी होता है। उपचार न करने की सूरत में फसल बरबाद हो सकती है। इसलिए बीमारियों का उपचार समय रहते कर लेना चाहिए।
ड्राई बबल, भूरा लेप (ब्राउन प्लास्टर) रोग : रोगग्रस्त भागों को हटाकर (0.1) प्रतिशत बाविस्टीन घोल का छिड़काव करें। बैक्टीरियल ब्लाइट रोगग्रस्त खुम्बों को निकालकर 0.05 प्रतिशत  क्लोरीन का छिड़काव करें।
खुम्ब की मक्खियां : मैलाथियान 50 ईसी या डाईक्लोरोवास 0.5 मिली प्रति लीटर पानी का 3-4 दिन के अंतर पर छिड़काव करें । माईट्स (अष्टपदी- कैलथेन 1-2 मिली प्रति 10 लीटर पानी का छिड़काव करें।
                                                                     -भरत सिंह , अनामिका शर्मा, राघवेन्द्र प्रताप सिंह


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