Friday, June 14, 2024
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नेताजी के खौफ के कारण देश से भागे अंग्रेज: डा. सुधांशु त्रिवेदी

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  • पिछले सरकारों ने की उपेक्षा, हमारी सरकार दे रही स्वतंत्रता के नायकों को वांछित सम्मान

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बच्चा पार्क स्थित पीएल शर्मा स्मारक में नेताजी सुभाष जन्म दिवस समारोह समिति की ओर से उनकी जयंती समारोह में राज्यसभा सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डा. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हमारी सरकार ने उन महापुरुषों को उनका वांछित सम्मान दिलाने का प्रयास किया है, जिनको पहले की सरकारें सम्मान नहीं दे पाई थीं। उन्होंने कहा कि पंडित नेहरू ने 1946 में वाइसरॉय ने प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई तब उन्होंने लॉयल्टी इंग्लैंड के नाम दशार्यी है। वहीं अंडमान निकोबार में आजाद हिंदी फौज ने भारत माता की शपथ ली।

उन्होंने कहा कि 1942 में असहयोग आंदोलन हुआ, इसके बाद कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ। ऐसे में एकाएक अंग्रेज कैसे देश को छोड़ चले गए। देश के इतिहास को सही तरीके से नहीं लिखा गया। अगर अंग्रेजों की चाटुकारिता छोड़कर देशभक्ति के रूप में इसे लिखा होता तो नेताजी सुभाष चंद्र बोस आजादी के प्रमुख महानायक होते। देश से जाने के बाद इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ने खुद कहा था कि अगर वे देश को आजाद न करते तो आजाद हिंद फौज एक भी अंग्रेज को जीवित नहीं छोड़ती। देश के इतिहास को सही तरीके से नहीं लिखा गया।

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अगर अंग्रेजों की चाटुकारिता छोड़कर देशभक्ति के रूप में इसे लिखा होता तो नेताजी सुभाष चंद्र बोस आजादी के प्रमुख महानायक होते। देश से जाने के बाद इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ने खुद कहा था कि अगर वे देश को आजाद न करते तो आजाद हिंद फौज एक भी अंग्रेज को जीवित नहीं छोड़ती। आजाद हिंद फौज के गठन को सुभाष चंद बोस ने रूस के प्रधानमंत्री स्टॉलिन से सहायता मांगी। स्टॉलिन ने अपने मित्र हिटलर के पास उन्हें भेजा।

हिटलर ने नेताजी से मिलकर कहा कि साउथ ईस्ट के सभी मामले जापान देखता है। इसके बाद 32 दिन तक पनडुब्बी से सफर कर वह जापान पहुंचे थे। विशिष्ट अतिथि सुशील पंडित ने भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय जागृत होने का है। दो टूक कहा कि कश्मीर में जो हाल हिंदुओं का हुआ वह देश में कहीं और न हो, इसके लिए तैयार रहें।

स्थान बदलना वीरता नहीं बल्कि तटस्थ होकर सामना करना और लड़ना ही वीरता है। सुबह चालीस स्कूलों के बच्चों ने पीएल शर्मा स्मारक से घंटाघर तक मार्च निकाला। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से छटा बिखरी। अजय गुप्ता, बीएन पाराशर, अरुण जिंदल, डा. देवराज सिंह, कर्नल अमरदीप त्यागी, विनोद उज्जवल, दिनेश कुमार, श्याम मोहन गुप्ता, दीपक शर्मा, देवेंद्र तोमर आदि का सहयोग रहा।

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