Thursday, April 30, 2026
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एजुकेशन लोन: ताकि रुक नहीं पाए शिक्षा की रफ़्तार

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श्री विष्णु पुराण में शिक्षा की महिमा के बारे में कहा गया है, ‘सा विद्या या विमुक्तये, अर्थात विद्या वह है जो मुक्त करती हो।’ इसका आशय यह है कि शिक्षा अज्ञानता, भय, अंधकार और अन्य प्रकार के अवगुणों से हमें स्वतंत्र करती है। अच्छी शिक्षा अच्छे करियर, शानदार जॉब्स, हाई सैलरी, हाई पॉवर, पोजीशन और बेहतर जीवन के सारे आयामों का गोल्डन गेट भी कहलाता है।

किंतु एक लेटेस्ट सर्वे के अनुसार प्रतिवर्ष शिक्षा की लागत प्राय: 15 प्रतिशत की दर से बढ़ जाती है। इसके कारण कॉलेज और यूनिवर्सिटी की शिक्षा आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही है। संकट की इस दशा में जरूरतमंद पेरेंट्स और प्रतिभावान छात्रों के लिए एजुकेशन लोन एक महत्वपूर्ण मददगार के रूप में साबित हुआ है, जिसके फलस्वरूप शिक्षा की रफ़्तार बिना रुके तेजी से आगे बढ़ रही है।

शिक्षा ऋण में क्या शामिल होता है ?

  • कोर्स फीस
  • एकोमोडेशन के अंतर्गत हॉस्टल और अन्य फीस
  • परीक्षाएं और अन्य विविध व्यय

एजुकेशन लोन के लिए अनिवार्य अर्हताएं क्या हैं ?

शिक्षा ऋण के लिए स्टूडेंट्स को मेन बॉरोवर के रूप में माना जाता है। चूंकि वे खुद कुछ भी आय अर्जित नहीं करते हैं, इसीलिए उनके माता-पिता, स्पाउज, भाई-बहन या अन्य रिलेटिव्स को सह-कर्जदार अर्थात को-बॉर्रोवर बनाया जाता है। एजुकेशन लोन देश या विदेश में एजुकेशन के लिए छात्रों को स्वीकृत किया जाता है।

किस प्रकार के कोर्स के लिए ऋण स्वीकृत किए जाते हैं?

  • फुल टाइम, पार्ट टाइम या वोकेशनल कोर्स।
  • इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, मेडिकल, होटल मैनेजमेंट, आर्किटेक्चर इत्यादि कोर्स में अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट डिग्री।
  • देश में ही एजुकेशन के लिए अधिकतम 15 लाख रुपए ऋण के रूप में स्वीकृत किए जाते हैं, जिसका 5 प्रतिशत स्टूडेंट के परिवार के द्वारा मार्जिनल पेमेंट के रूप में भुगतान किया जाता है।
  • विदेशों में स्टडी के लिए अधिकतम 25 लाख से 30 लाख रुपए स्वीकृत किए जाते हैं, जिसका कम-से-कम 15 प्रतिशत स्टूडेंट के फॅमिली के द्वारा मार्जिनल पेमेंट के रूप में भुगतान किया जाता है।

अनिवार्य शर्तें क्या होती हैं?

  • प्रार्थी को अनिवार्य रूप से भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • मान्यता प्राप्त कॉलेज और यूनिवर्सिटी में कोर्स के एडमिशन के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट के रूप में एडमिशन लैटर होना चाहिए।
  • कैंडिडेट का अनिवार्य रूप से बारहवीं परीक्षा पास किया होना जरूरी होता है। वैसे शिक्षा ऋण प्राप्त करने के लिए अधिकतम आयु की कोई सीमा नहीं है।
  • कॉलेज या यूनिवर्सिटी के द्वारा कोर्स के फीस का डिटेल्स होना जरूरी है।- यदि अंडरग्रेजुएट कोर्स करने के लिए लोन चाहिए तो दसवीं और बारहवीं कक्षाओं के मार्क्स शीट्स होने चाहिए।
  • यदि पोस्टग्रेजुएट लेवल के कोर्स करने के लिए लोन चाहिए तो दसवीं और बारहवीं कक्षाओं के साथ-साथ ग्रेजुएशन के मार्क्स शीट्स भी होने चाहिए।
  • को-बॉरोवर की सैलरी स्लिप्स।
  • को-बॉरोवर के इनकम टैक्स रिटर्न्स की कॉपी।
  • एक एफिडेविट जिसमें यह स्पष्ट लिखा हो कि किसी अन्य स्रोत से ऋण नहीं लिए गए हैं।
  • आइडेंटिटी प्रूफ और एड्रेस प्रूफ के डाक्यूमेंट्स।

क्या कॉलैटरल की जरूरत होती है ?

कोलैटरल एक फाइनेंशियल टर्म है जिसका तात्पर्य उन संपत्तियों से होता है जो ऋण लेने वाला बैंक से ऋण प्राप्त करने के लिए सिक्यूरिटी के रूप में बैंक के पास रखता है। बैंक के पास गिरवी रखी गई संपत्ति के मूल्य के बराबर का ही ऋण स्वीकृत किया जाता है। वर्तमान में 7.5 लाख रुपए के लोन के लिए किसी कॉलैटरल की जरूरत नहीं होती है।

एजुकेशन लोन पर इंटरेस्ट रेट

एजुकेशन लोन पर ब्याज की दर अन्य फैक्टर्स के अतिरिक्त बैंकों की बेस लेंडिंग रेट पर निर्भर करती है। बेस लेंडिंग रेट रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा फिक्स किया जाता है। सामान्य रूप से यह रेट 12 प्रतिशत से 16 प्रतिशत के मध्य होता है।

एजुकेशन लोन का रिपेमेंट कैसे किया जाता है ?

एजुकेशन लोन का भुगतान स्टूडेंट के द्वारा किया जाता है, जिसकी स्टडी के लिए लिए लोन लिया जाता है। इंटरेस्ट के साथ यह रिपेमेंट अकादमिक कोर्स के पूरा होने के बाद शुरू हो जाता है। कुछ बैंकों के द्वारा कोर्स पूरा होने के बाद एक वर्ष का रिलैक्सेशन दिया जाता है तो कुछ बैंकों के लिए यह रिलैक्सेशन पीरियड जॉब पाने के बाद छ: महीने तक का होता है।

सामान्य रूप से लोन सेटलमेंट का पीरियड 5 से 7 वर्ष की अवधि का होता है जो लोन लेने वाले की सुविधा के अनुसार एक्सटेंड किया जा सकता है। लोन की राशि पर सिंपल इंटरेस्ट चार्ज किया जाता है।

सावधानियां

  • किसी भी गवर्नमेंट या प्राइवेट कमर्शियल बैंक से एजुकेशन लोन लेने के को- बॉरोवर को सर्विस चार्ज, प्रोसेसिंग फीस, प्रिपेमेंट, ईएमआई के लेट पेमेंट के नाम पर वसूले जाने वाले कई प्रकार की राशियों के बारे में पूरी तरह से छानबीन कर लेनी चाहिए।
  • ये सभी फीस बैंकों की पर्सनल पालिसी पर निर्भर करती है। कुछ बैंकों के प्रोसेसिंग फीस अधिक होते हैं तो कुछ के कम। इसीलिए बैंकों की प्रोसेसिंग फीस के बारे में अच्छी तरह से पड़ताल जरूरी होता है।

एजुकेशन लोन का टैक्स बेनिफिट क्या होता है ?

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80ए के अंतर्गत एजुकेशन लोन पर किए गए भुगतान पर इनकम टैक्स में छूट मिलती है। यह छूट उस व्यक्ति को प्राप्त होती है, जो खुद के लिए या स्पाउज या बच्चों के लिए शिक्षा ऋण पर ब्याज का भुगतान करता है।

इसके अंतर्गत शिक्षा ऋण पर भुगतान किए गए केवल समस्त ब्याज की राशि को टैक्सेबल इनकम से घटा दिया जाता है। इसमें प्रत्येक माह ईएमआई के रूप में भुगतान किए गए प्रिंसिपल अमाउंट पर कोई रियायत प्राप्त नहीं होती है। वैसे कर योग्य आय में इस प्रकार की रियायत अधिक से अधिक 8 वर्षों के लिए ही उपलब्ध होता है।
     -एसपी शर्मा

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