Thursday, March 12, 2026
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बालिकाओं का सशक्तीकरण जरूरी

Nazariya 1


MONIKAआज की बालिका जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही है चाहे वो क्षेत्र खेल हो या राजनीति, घर हो या उद्योग। एशियन या ओलम्पिक खेलों के गोल्ड मैडल जीतना हो या राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के पद पर आसीन होकर देश सेवा करने का काम हो। देश में 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की शुरूआत 2009 से की गई। सरकार ने इसके लिए 24 जनवरी का दिन चुना क्योंकि यही वह दिन था जब 1966 में इंदिरा गांधी ने भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। राष्ट्रीय बालिका दिवस बालिकाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान देने और लड़कियों के सशक्तीकरण और उनके मानवाधिकारों की पूर्ति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करता है। भारत में स्त्री के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए राष्ट्रीय बालिका दिवस को 24 जनवरी को मनाया जाता है लेकिन पूरे विश्व के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्त्री को सम्मान देने और उसे समाज में बराबरी का दर्जा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर को मनाया जाता है। समाज में जितना योगदान एक पुरुष का होता है उससे कहीं ज्यादा एक स्त्री की सहभागिता होती है। लेकिन ये हमारी बदकिस्मती है कि हमारे समाज में लड़कियों और लड़कों में अंतर को लेकर बहुत भेदभाव होते हैं। भले ही समय के साथ अब सोच में लड़कियों को लेकर आधुनिक परिवर्तन ने जन्म लिया है लेकिन आज भी समाज में उन्हें उनका सम्मानित दर्जा नहीं मिल पाता जहां वह अपने लिए निर्णय खुद ले सकें और सामाजिक गतिविधियों में समान रूप से भागीदार बन सकें। आज भी महिलाओं को समाज में वह वास्तविक बराबरी का दर्जा नहीं मिल सका है। बालिकाओं के सामाजिक विकास के उत्थान के लिए आज देश-विदेश में लड़कियों को प्रोत्साहित कर समाज में उन्हें उनका वास्तविक दर्जा दिलाने के लिए कई प्रकार के अभियान और कार्यक्रम चलाए जाते हैं। इसका मकसद समाज में संचालित प्रत्येक गतिविधि में लड़कियों की समान सहभागिता सुनिश्चित की जाती है।

बालिका दिवस मनाने का उद्देश्य स्त्री के जीवन में आने वाली कठिनाइयों के बारे में समाज के लोगों को जागरूक करना है। एक महिला के साथ होने वाले भेदभाव के बारे में लोगों को बताया जाता है ताकि वह समझ सके कि समाज में किस स्तर पर स्त्रियों के साथ किस प्रकार के भेदभाव होते हैं। इस खास दिन पर परिवार, समाज और देश के लिए बालिकाओं के महत्व को दर्शाया जाता है। धीरे-धीरे राष्ट्रीय बालिका दिवस का असर लोगों पर दिख रहा है और स्त्री को समाज में सम्मान और एक नया दर्जा देने का प्रयास किया जा रहा है। आज देश की बेटियां हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। धीरे धीरे समय बदल रहा है। पहले जहां बेटियों के पैदा होने पर उन्हें बाल विवाह जैसे कुप्रथा में झोंक दिया जाता था, वहीं आज बेटी होने पर लोग गर्व महसूस करते हैं। क्योंकि स्त्री सबसे शक्तिशाली होती है, स्त्री साक्षात दुर्गा का अवतार होती है जिसे ऊर्जा का सृजन और स्वरूप माना जाता है। आज हम अगर देखें तो पाएंगे कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। इसलिए हमें बेटियों पर भी उतना ही गर्व होना चाहिए जितना बेटो पर।

हमें बालिकाओं को शिक्षित करने, उनके सशक्तीकरण और उनके मानवाधिकारों की पूर्ति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। दुनिया भर में लड़कियों को उनकी शिक्षा, उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य और आवश्यक सुरक्षा के लिए अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हम सबको मिलकर समाज में लड़कियों के साथ होने वाली लैंगिक असमानताओं को खत्म करने के लिए संपूर्ण समाज को जागरूक करना है जिससे बालिकाओं को समाज में उनका उचित अधिकार मिल सके। ये सच है कि भारत सरकार भी बालिकाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान दे रही है और सरकार ने भी बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए कई प्रकार की योजनाओं को लागू किया है,जिनमें मुख्य योजनाएं‘ बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ’ एक उल्लेखनीय योजना है।

योजना का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही इसका उद्देश्य देश में हर बालिका को शिक्षा प्रदान करना है। दरअसल कन्या भ्रूण हत्या के कारण बेटियों की संख्या लगातार बेटों से कम होती रही है जिसके बाद सरकार को बेटी बचाओ जैसे कार्यक्रमों को शुरू करना पड़ा। यह बाल लिंग अनुपात में गिरावट के मुद्दे को भी संबोधित करता है। केंद्र सरकार समेत राज्य सरकारें भी अपने अपने राज्यों में बेटियों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाते हैं और अपने स्तर पर कई अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू कर रही हैं। भारत अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस और राष्ट्रीय बालिका दिवस दोनों मनाता है। इसके अलावा बालिका समृद्धि योजना, लड़कियों के लिए यह सरकारी योजना, बीपीएल परिवारों में जन्म के लिए है। इस योजना में जन्म के बाद 500 रुपए की अनुदान राशि दी जाती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जन्म के समय बालिका और उसकी माँ के प्रति लोगों का जो नकारात्मक रवैया होता है उसको बदलना है। ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:’ अर्थात जहां स्त्रियों की पूजा होती है वहाँ देवता निवास करते हैं और जहाँ स्त्रियों की पूजा नहीं होती है, उनका सम्मान नही होता है वहाँ किये गये समस्त अच्छे कर्म निष्फल हो जाते हैं। अत: राष्ट्रीय बालिका दिवस को हम तभी सार्थक कर पाएंगे जब हम ह्रदय से महिलाओं को सम्मान देंगे।


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