Tuesday, May 28, 2024
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एसपी सिटी आफिस की स्थापना को लगा ग्रहण !

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  • कोर्ट से आए स्टे के आधार पर तिरंगा गेट स्थित भूमि पर फिर होने लगा प्राइवेट बसों का संचालन
  • अदालत से एक और आदेश में लगी 23 सितंबर की तारीख को अपने पक्ष में मानकर चल रही बस यूनियन
  • पहले स्टे की अवधि समाप्त होने को आधार बनाकर जिला पंचायत कर सकती है कब्जा लेने का प्रयास

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नौचंदी मैदान में तिरंगा गेट के पास एसपी सिटी कार्यालय और मॉडर्न पुलिस कंट्रोल रूम की स्थापना को अदालती कार्यवाही का ग्रहण लग गया है। किराये की शर्तों का पालन न करने को आधार बनाते हुए मई के मध्य तिरंगा गेट के पास स्थित मेरठ-हापुड़-बुलंदशहर बस यूनियन को किराये पर दी गई भूमि पर जिला पंचायत ने कब्जा ले लिया था।

फिलहाल अदालत से यूनियन के पक्ष में हुए स्टे के आधार पर 16 अगस्त से बसों का संचालन किराये की भूमि से किया जा रहा है, जिसकी अवधि 31 अगस्त को पूरी हो रही है। इस दौरान जिला पंचायत शुक्रवार को फिर से अपनी भूमि पर कब्जा लेने का प्रयास कर सकती है। जबकि कोर्ट से आए एक और आदेश को बस यूनियन अपने पक्ष में मानकर चल रही है, जिसमें 23 सितंबर की तारीख लगाई गई है।

जिला पंचायत कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार तिरंगा गेट के पास जिला पंचायत की खसरा नंबर 4227 और 4228 रकबा 1068.23 वर्ग मीटर भूमि को मेरठ-हापुड़-बुलंदशहर बस आॅपरेटर यूनियन ने किराये पर लिया हुआ था। जिला पंचायत अधिकारियों के अनुसार यूनियन ने किरायेदारी की शर्तों का पालन नहीं किया। जिसके आधार पर जिला पंचायत ने किरायेदारी का अनुबंध रद कर दिया।

और मई माह के मध्य अपर नगर मजिस्ट्रेट और थाना पुलिस की टीम के साथ जिला पंचायत की टीम ने मौके पर पहुंचकर उपरोक्त भूमि पर कब्जा ले लिया था। गौरतलब है कि नौचंदी मैदान में तिरंगा गेट के पास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने आधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम और एसपी सिटी कार्यालय बनाने के लिए 4000 वर्ग मीटर भूमि की जिला पंचायत से मांग की हुई है। इस सिलसिले में 14 मार्च को हुई जिला पंचायत बोर्ड बैठक में पुलिस कंट्रोल रूम एसपी सिटी कार्यालय बनाने के लिए पुलिस विभाग को भूमि देने के संबंध में प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है।

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मई माह में जिला पंचायत के अपनी भूमि पर कब्जा लेने के आधार पर लगने लगा था कि तिरंगा गेट के पास आधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम और एसपी कार्यालय बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। लेकिन बस यूनियन ने मेरठ से लेकर हाईकोर्ट तक अपना पक्ष रखा। इसी कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत 16 अगस्त को कोर्ट से यूनियन के पक्ष में एक आदेश जारी किया गया। जिसमें 31 अगस्त तक किराये की भूमि से ही बस संचालन करने की व्यवस्था दी गई। हालांकि इसके बाद बस यूनियन ने एक बार फिर सक्षम न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए स्टे की तिथि बढ़ाने की मांग की।

इस मामले में बुधवार को जारी किए गए आदेश में कोर्ट की ओर से 23 सितंबर की तारीख लगाई गई है। इस पूरे मामले में जिला पंचायत की ओर से बस यूनियन को एक पत्र जारी करके कहा गया है कि कोर्ट से स्टे की अवधि पूर्ण हो चुकी है। इसलिए संबंधित भूमि पर जिला पंचायत को कब्जा दे दिया जाए। वहीं बस यूनियन का तर्क है कि सक्षम न्यायालय से जारी किए गए आदेश में 23 सितंबर की तारीख लगाई गई है। जिसके आधार पर स्वत: ही स्टे की अवधि भी बढ़ी हुई मानी जाएगी। बहरहाल 30 अगस्त को जारी किए गए आदेश की प्रति अभी तक बस यूनियन और जिला पंचायत के पास नहीं पहुंची है।

इस बीच जिला पंचायत की ओर से शुक्रवार को जमीन पर कब्जा लिए जाने के प्रयास किए जा सकते हैं। इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान चार माह की अवधि में एसपी सिटी आफिस और आधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम बनाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा सका है। पुलिस विभाग को इस भूमि का स्वामित्व कब तक मिलेगा, यह बता पाना फिलहाल किसी के लिए भी आसान नहीं है।

ये हैं हापुड़ स्टैंड से संचालित बसों के रूट

बस यूनियन के पदाधिकारियों ने बताया कि इस रूट पर 102 परमिट हैं। फिलहाल यहां से 65 बसों का नियमित रूप से संचालन किया जा रहा है। जिनमें मेरठ से हापुड़, गुलावठी, बुलंदशहर-खुर्जा मार्ग, मेरठ से धौलाना-गुलावठी मार्ग, मेरठ-स्याना, मेरठ-दनकौर, मेरठ-पिलखुवा, मेरठ-दतियाना, मेरठ-हरौड़ा, मेरठ-फत्तापुर आदि मार्ग शामिल हैं।

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