Tuesday, July 8, 2025
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आचरणहीन व्यक्ति को वेद भी पवित्र नहीं कर सकते: श्रीरामभद्राचार्य

जनवाणी ब्यूरो |

लखनऊ/उनवल: आचरण हीन व्यक्ति को वेद भी पवित्र नहीं कर सकते। सनातन हिन्दू परिवार की बेटियां लव जिहाद से बचें अब हमें ओम क्रांति क्रांति करना है। 21वीं सदी में हिंदूओं की विजय होगी और इसका विगुल हमारे पूर्वांचल से बजेगा। उक्त विचार उनवल के टेकवार में चल रही रामकथा के अंतिम दिन व्यास पीठ से तुलसी पीठाधीश्वर रामानंदाचार्य जगद्गुरु श्रीरामभद्राचार्य ने उपस्थित श्रोताओं से रामकथा सुनाते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि राम मंत्र से दीक्षित सरयू पारीण ब्राह्मण ही श्रेष्ठ होते हैं। कथा को विस्तार देते हुए बताया कि भगवान शिव जी श्रीराम जी के समझाने पर ही दूसरी बार माता पार्वती से विवाह के लिए तैयार हुए।शिव जी की बारात में भगवान लोकाभिराम उनके हृदय में निवास करते हैं। भद्राचार्य ने बताया कि लोग शव यात्रा में राम राम और राम नाम सत्य है कहते हैं किंतु विवाह में कोई नहीं कहता किंतु भगवान शिव जी ऐसा नहीं करते। उन्होंने कहा कि जगत में लोग काम वासना के लिए विवाह करते हैं किन्तु शिव जी ने राम के लिए विवाह किया था और काम को अपने तीसरे नेत्र से भस्म कर दिया था।

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मांसाहार की निंदा करते हुए जगद्गुरु ने बताया कि मछली सभी जीवों के मांस खाती है अतः मछली खाने वाले जीव को सभी जीवों के भक्षण का पाप लगता है। उन्होंने बताया कि आहार से चित्त की शुद्धि होती है चित से आचरण,आचरण से विचार तथा विचार से व्यवहार शुद्ध हो जाता है।

शिव जी ब्रह्मचारी वेश में माता पार्वती की परीक्षा के लिए गए पार्वती जी पास हो गई तब फिर पार्वती जी बोली कि मैं पिता की आज्ञा से ही आपको पति रूप स्वीकार करूंगी। जगद्गुरु ने कहा कि इस प्रसंग से यह सीख लेनी चाहिए कि पत्नी भोग के लिए नहीं योग के लिए होती है। शिव पार्वती विवाह में जब परक्षन के लिए शिव जी गए तब सखियां पार्वती जी से विनोद की तब पार्वती जी बोली मेरे कर्म में बौराहा ही वर लिखा है तब भी मुझे मंजूर है।गुरु ने कहा ये सब विनोद शिव जी इसलिए सह रहे है क्योंकि भगवान राम ने शिव जी को विवाह के लिए आदेश दिया है।

जब शिव जी का पाणीग्रहण हुआ तब सभी देवता प्रसन्न हो गए। जगद्गुरु ने कहा शिव विवाह होने पर उत्थान हुआ। और लोगों का विवाह होने पर पतन होता है।पार्वती जी का हांथ अर्थात भक्ति का हांथ शिव जी ने पकड़ लिए। जगद्गुरु ने कहा जिसके जीवन में भक्ति आ जाती हैं उसका सारा जीवन मंगल हो जाता है। विवाह संपन्न होने के बाद पार्वती जी ने सोचा शिव जी कुछ देंगे।शिव जी ने कहा मैं मनोरम राम में रमता था और रमता रहूंगा रहना है रहें अन्यथा जाएं। आप भी राम नाम का जप करोगी तो निश्चित ही आपका कल्याण हो जाएगा।शिव जी अपनी पत्नी को आभूषण नहीं दिया अपनी पत्नी को आभूषण बना लिया। इसलिए शिव जी महादेव हैं ईश्वर हैं।

कार्यक्रम का संचालन आचार्य घनश्याम मिश्रा ने किया। उक्त अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष युधिष्ठिर सिंह, प्रदीप शुक्ल (विधायक), श्रीराम चौहान(विधायक) ,सन्त प्रसाद बेलदार(पूर्व विधायक) ,रामप्रकाश दास बैदेही अखाड़ा अयोध्या, इत्यादि लोग मौजूद रहे।

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