खेलों की दुनिया में पाला बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है जो एक निश्चित समय पर यथा आधा घंटा या आधा समय का खेल हो जाने पर दोनों टीम अपना-अपना पाला/साइड बदलती है। इसके पीछे कारण यह है कि मैदान के दोनों छोर पर प्राकृतिक सुविधाएं जैसे धूप, हवा आदि समान रूप से नहीं भी हो सकती है। किसी एक छोर पर हवा,पानी रोशनी आदि ज्यादा मिल रहा हो दूसरे छोर पर कम भी हो सकता है; तो ऐसी स्थिति में सबों को समान सुविधा मिले इसलिए पाला बदलने की व्यवस्था है, यानी समाजवादी व्यवस्था है सबको एक समान सुविधा मिले।
राजनीति में कौन कब पाला बदल ले कहना बड़ा मुश्किल है। टिकट नहीं मिला तो नेताओं को पाला मार जाता है साथ ही पाला भी बदल लिया जाता है। पाला बदलने वाला एक पाला से दूसरी पाला में जब जाता है तो जहां जाता है वहां के लोगों को पाला मार देता है क्योंकि वहां प्रतिद्वंदियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो जाती है; वो टिकट की लालच में पाला बदलते हैं और पुराने निष्ठावान कार्यकर्ता पाल नौका की तरह हवा की दिशा में बढ़ते चले जाते हैं और पाला बदलने वाले को टिकट मिल जाता है और हवा की विपरीत दिशा में अपनी नाव को चलाने लगते हैं।
मौसम वैज्ञानिक भविष्यवाणी कर रहे हैं कि अलनीना के कारण ठंडक अधिक पड़ेगी। यह सुनकर लोगों को पाला मार गया कि इस बार की ठंडी कैसे कटेगी? ओलंपिक खेल का आयोजन चार साल के बाद होता है वैसे ही राजनीतिक का ओलंपिक हर पांच साल के बाद होता है। ओलंपिक में पदक जीतना तो महत्वपूर्ण होता है लेकिन भाग लेना भी कम महत्वपूर्ण नहीं होता है वैसे ही जैसे राजनीति के ओलंपिक में यदि पदक जीत गए, चुनाव जीत गए तो चांदी ही चांदी है लेकिन किसी राष्ट्रीय दल का टिकट भी मिल जाए तो बहुत बड़ी बात मानी जाती है। जीत गए तो सात पुशत के लिए व्यवस्था हो जाती है और हार भी गए तो कहावत है कि हाथी जिंदा है तो एक लाख का, मर गया तो सवा लाख का।
पाला बदलने का काम सिर्फ टिकट बंटने के समय ही नहीं होता है बल्कि नामांकन भरने के बाद भी पाला बदलने का दौर चलता रहता है। रूठे हुए विधायक, बागी विधायक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन कर देते हैं; फिर उनके मान मनौव्वल का दौर चलता है। कुछ गुप्त समझौता होता है और फिर वह अपना पाला बदल लेते हैं और जिस उम्मीदवार को टिकट मिला रहता है उसके साथ हाथ मिलाते हुए फोटो खिंचवाते हैं कि हम सब एक हैं, हम सब एक ही पाला में है। पाला बदलने का खेल विधानसभा और संसद में भी चलता रहता है। पार्टी के निर्देश के बावजूद तथाकथित अंतरात्मा की आवाज के नाम पर लोग पाला बदलते रहते हैं।
संसद में मतदान के दौरान पार्टी के नीतियों और निर्देशों को नहीं मानते हैं और पाला बदलने का खेल चलता रहता है और यह सब देखकर मतदाता को पाला मार जाता है कि मैंने किसे वोट दिया?

