Thursday, April 30, 2026
- Advertisement -

महिलाओं पर डिजिटल हिंसा की मार

05 6
महिलाओं पर डिजिटल हिंसा की मार 2

दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ डिजिटल साधनों का दुरुपयोग एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। आज डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके महिलाओं को बदनाम करने, परेशान करने और ब्लैकमेल करने की घटनाएं आम होती जा रही हैं। इस समस्या की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक के 16 दिवसीय सक्रियता अभियान की थीम ही महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध डिजिटल हिंसा को समाप्त करने पर केंद्रित की है। इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ डिजिटल हिंसा समाप्त करने के लिए वातावरण तैयार करना है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध हिंसा हर तीन में से एक महिला को प्रभावित करती है। यह एक वैश्विक मानवाधिकार आपातकाल है जिसे रोका जाना चाहिए। दुर्व्यवहार के सबसे तेजी से बढ़ते रूपों में महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध डिजिटल हिंसा प्रमुख है। भारत में जितनी तेजी से डिजिटल क्रांति हुई है, उतनी तेजी से कोई क्रांति नहीं हुई। डिजिटल क्रांति ने मोबाइल फोन और इंटरनेट को आम लोगों तक पहुंचा दिया है। इसकी बदौलत आम जनता में जागरूकता और सशक्तिकरण जहां सकारात्मक पक्ष है, वहीं इसकी वजह से महिलाओं के खिलाफ हिंसा का एक नया रूप भी उभर कर सामने आया है। इसे ही ‘डिजिटल हिंसा’ नाम मिला है।

यह वही हिंसा है जिसका सामना महिलाएं और लड़कियां सालों से वास्तविक दुनिया में करती रही हैं, पर डिजिटल युग में अब उसका रूप और माध्यम बदल गया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार किसी व्यक्ति या समूह द्वारा की गई वह हिंसा, जिसकी जड़ें लैंगिक असमानता या भेदभाव में हों और जिसमें डिजिटल या संचार तकनीक का इस्तेमाल किया गया हो, उसे डिजिटल लिंग आधारित हिंसा कहा जाता है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) के मुताबिक डिजिटल हिंसा महिलाओं और लड़कियों के लिए सामाजिक बदनामी का कारण बनती है। इस वजह से एक ओर उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, वहीं इस कारण वे आफलाइन और आॅनलाइन संसार में अलग-थलग पड़ जाती हैं। इसका परिणाम कार्यस्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और नेतृत्व की भूमिकाओं में भागीदारी प्रभावित होने के रूप में भी निकल रहा है।

भारत में स्थिति चिंताजनक है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक देश में कोरोना महामारी के बाद महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों के मामले तेजी से बढ़े हैं जिनमें ब्लैकमेलिंग, बदनाम करना, तस्वीरों से छेड़छाड़, अभद्र सामग्री भेजना और फेक प्रोफाइल बनाना जैसी घटनाएं प्रमुख हैं। महिलाओं और लड़कियों का पीछा करने, उन्हें परेशान करने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग बढ़ रहा है। आज महिलाएं डिजिटल दुर्व्यवहार के सबसे कठिन दौर से गुजर रही हैं। कब कोई किसी महिला की अंतरंग तस्वीरों को बिना उसकी अनुमति के सोशल मीडिया पर डाल दे, या कब कोई व्यक्ति किसी महिला की फर्जी या डिजिटल रूप से हेरफेर की गई न्यूड तस्वीर अथवा वीडियो बना कर सार्वजनिक कर दे, कौन जानता है। इसके बाद ब्लैकमेलिंग, धमकाने और यौन उत्पीड़न का सिलसिला भी अब कोई छिपा हुआ तथ्य नहीं रह गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभद्र भाषा और भद्दे कमेंट्स अब रोजमर्रा की बात हो गई है। ये घटनाएं केवल आॅनलाइन तक सीमित नहीं रहतीं बल्कि कई बार यही मानसिक और सामाजिक हिंसा, वास्तविक जीवन में शारीरिक शोषण और हत्या तक का कारण बन जाती है।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल दुर्व्यवहार को रोकना मुश्किल इसलिए है क्योंकि अपराधी अदृश्य, गुमनाम और तकनीकी रूप से सक्षम होते हैं। वे नकली पहचान, वीपीएन या फेक अकाउंट्स का इस्तेमाल करते हैं जिससे उनकी पहचान छिपी रहती है। साथ ही, सोशल मीडिया का तेज प्रसार, डाटा का निजीकरण न होना, और डिजिटल साक्षरता की कमी भी इस समस्या को और बढ़ा रही है। हमारे यहां ज्यादातर महिलाओं को यह भी नहीं पता होता कि उनके पास क्या कानूनी अधिकार हैं और वह ऐसे मामलों में शिकायत कैसे दर्ज कराएं।

सवाल यह उठता है कि इस समस्या का समाधान कैसे किया जा सकता है? इसमें कोई दो राय नहीं होनी चाहिए कि डिजिटल हिंसा को समाप्त करना किसी एक संस्था या सरकार का काम नहीं बल्कि इसके लिए साझा प्रयास करने होंगे। साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सरकार को सख्त और स्पष्ट कानून बनाने होंगे। पुलिस और न्याय व्यवस्था में डिजिटल अपराधों की जांच के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता है। टेक्नोलॉजी कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

किसानों के लिए वरदान हैं बैंगन की टॉप 5 किस्में

किसानों के लिए बैंगन की खेती में बेहतर उत्पादन...

धान उगाने की एरोबिक विधि

डॉ.शालिनी गुप्ता, डॉ.आर.एस.सेंगर एरोबिक धान उगाने की एक पद्धति है,...

बढ़ती मांग से चीकू की खेती बनी फायदेमंद

चीकू एक ऐसा फल है जो स्वाद के साथ-साथ...

झालमुड़ी कथा की व्यथा और जनता

झालमुड़ी और जनता का नाता पुराना है। एक तरफ...

तस्वीरों में दुनिया देखने वाले रघु रॉय

भारतीय फोटो पत्रकारिता के इतिहास में कुछ नाम ऐसे...
spot_imgspot_img