- आसाम के सिद्ली का पता बता रही है महिला, खुद के एक पुत्र व दो पुत्री होना बताया
जनवाणी संवाददाता |
बड़ौत: कोरोना कॉल से जहां लोगों के काफी काम-धंधे चौपट हो गए हैं वहीं कुछ लोग परिवार से बिछड़ रहे हैं। एक ऐसी ही महिला रमाला मिल के पास एक ढ़ाबे पर शरण लिए हुए है। वह अपना पता बता रही है। लेकिन पुलिस है कि उसे उसके पते पर भेजने के बजाय उसे उसके हाल पर ही छोड़ने के प्रयास में हैं। हालांकि महिला की जानकारी के लिए रमाला एसएचओ ने पुलिस कर्मियों को लगा दिया है।
कोविड-19 की महामारी के दौरान देश में लॉकडाउन शुरु हो गया। इस लॉक डाउन में हजारों मजदूर अपने कामधंधों से बेदखल हो गए। उन्हें अपने गंतव्यों तक पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं मिले। कई-कई सौ किलोमीटर का सफर पैदल चलकर पूरा किया। इस दौरान कई के बच्चे अपने माता-पिताआें से दूर हो गए तो कई की पत्नी भी व मां भी बिछड़ गई।
एक ऐसी ही एक महिला रमाला मिल के पास एक ढ़ाबा चलाने वाले के पास पहुंच गई। महिला ने अपना पता बताया। साथ ही यह भी बताया कि उसे नहीं पता कि कहां और कैसे जाएगी। अब ढाबे वाला उसे शरण दिए हुए है। पुलिस को भी पता लगा तो पुलिस ने ढ़ाबे वाले को अपने पास ही रखने के लिए कह दिया। दो दिन से महिला इस ढ़ाबे पर ही शरण लिए हुए है।
वह खुद का नाम पोथीनाथ देवीनाथ बताती है। उसने अपनी पुत्रियों के नाम मधुमती चौधरी व उरीमती चौधरी, पुत्र आनंद चौधरी बताती है। जबकि घर का पता उसने सिद्ली का बताया है। सिद्ली आसाम में शहर है। उसने अपने पति का नाम अरुण चौधरी बताया।
उसने बताया कि वह दिल्ली में काम करते थे। लॉकडाउन में घर जाते हुए वह अपने परिवार से बिछड़ गई। वह यहां तक तक घूमते हुए निकल गई। इस संबंध में रमाला एसएचओ ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी। पुलिस को वहां भेज कर महिला को थाने बुलवाया गया है। उसके बताए पते के अनुसार उसे भेजने की तैयारी की जा रही है। वह मानसिक रूप से कमजोर लग रही है।

