- अगर जुमा की नमाज अदा होने की सूरत न बन सके तो तनहा-तनहा पढ़े जोहर की नमाज
- कार्यवाहक मोहतमिम द्वारा पूछे गए लिखित सवाल के जवाब में दारुल उलूम ने जारी किया फतवा
जनवाणी संवाददाता |
देवबंद: इस्लामिक शिक्षा के प्रमुख केंद्र दारुल उलूम देवबंद ने कोरोना की दूसरी लहर के बीच शुरू हुए पवित्र माह रमजान के पहले जुमा की नमाज स्थानीय प्रशासन के निर्देशानुसार अदा करने की हिदायत दी है।
दारुल उलूम देवबंद के कार्यवाह मोहतमिम कारी उस्मान मंसूरपुरी द्वारा पूछे गए लिखित सवाल के जवाब में दारुल इफ्ता के मुफ्तियों की खंडपीठ ने फतवा जारी किया है।
जिसमें साफ किया गया है मुल्क के मौजूदा हालात में जुमा की नमाज अदा करने के लिए मुसलमानों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। यानि अगर किसी मस्जिद में प्रशासन ने सोशल डिस्टेंस के साथ 50 लोगों को नमाज अदा करने की इजाजत दे रखी है तो वहां पर 50 लोग ही नमाज अदा करें।
फतवे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई जगह ऐसी है जहां पर मस्जिद में नमाज अदा होने की गुंजाइश न हो तो वहां पर किसी अन्य स्थान जैसे हॉल, बैठक आदि में जुमा की नमाज अदा की जाए।
जिसमें इमाम के अलावा कम से कम तीन बालिग लोग शामिल रहें। और अगर कहीं पर यह सूरत भी न बन सके तो वहां पर लोग जोहर की नमाज तनहा-तनहा अदा करे।

