जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बाढ़ की स्थिति में अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिला प्रशासन राहत और बचाव अभियान में जुटा हुआ है। मंदाकिनी नदी का जलस्तर 29 अगस्त को 135.20 मीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद अब घटकर 128.00 मीटर हो गया है। जलस्तर कम होने के बावजूद प्रशासन ने निगरानी और राहत कार्यों में कोई कमी नहीं की है।
अब तक 688 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राहत की बात यह है कि जिले में बाढ़ के कारण अब तक किसी तरह की जन या पशुहानि की सूचना नहीं है। राहत एवं बचाव अभियान के लिए एनडीआरएफ के 30 सदस्य और एसडीआरएफ की दो टीमों के 27 सदस्य तैनात हैं। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन की टीमें भी प्रभावित इलाकों में लगातार काम कर रही हैं।
36 गांवों में 13,906 लोगों तक पहुंची राहत
मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से कर्वी के रामघाट समेत 19 गांव, राजापुर के सात और मानिकपुर के 10 गांव प्रभावित हुए हैं। कुल 36 प्रभावित गांवों के 13,906 लोगों तक प्रशासन ने भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई हैं।
प्रशासन की ओर से कर्वी में 24,530, राजापुर में 4,043 और मानिकपुर में 230 लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। इस तरह प्रभावित लोगों के बीच अब तक कुल 28,803 लंच पैकेट बांटे जा चुके हैं।
2,065 राहत किट वितरित
बाढ़ प्रभावित परिवारों को जरूरी सामान उपलब्ध कराने के लिए कर्वी में 1,073, राजापुर में 796 और मानिकपुर में 196 राहत किट वितरित की गई हैं। जिले में अब तक कुल 2,065 राहत किट बांटी जा चुकी हैं। प्रभावित लोगों के लिए 18 बाढ़ शरणालय भी संचालित किए जा रहे हैं।
क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 7.52 लाख रुपये की मदद
बाढ़ के कारण जिले में 653 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें से 188 मामलों में 7.52 लाख रुपये की सहायता राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। वहीं, पूरी तरह क्षतिग्रस्त एक मकान के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता दी गई है। अन्य प्रभावित परिवारों को सहायता राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 28 मेडिकल टीमें एंबुलेंस और जरूरी दवाओं के साथ तैनात हैं। ये टीमें लगातार स्वास्थ्य परीक्षण और दवा वितरण कर रही हैं। इसके साथ ही फसल क्षति का आकलन करने के लिए सर्वे का काम भी कराया जा रहा है।
गाजीपुर में टापू पर फंसे 12 चरवाहे और 2 हजार से अधिक भेड़ें बचाईं
गाजीपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण डूहिया सरैया के पास नदी के एक टापू पर फंसे 12 चरवाहों और दो हजार से अधिक भेड़ों को पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने सुरक्षित निकाल लिया।
करीब छह घंटे चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में नाइट विजन ड्रोन की मदद से टापू पर फंसे लोगों और भेड़ों की लोकेशन का पता लगाया गया। देर रात सूचना मिलने के बाद संयुक्त टीम ददरी घाट पहुंची। इसके बाद फ्लड कंपनी पीएसी, पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नाविकों की मदद से बचाव अभियान चलाया गया। राहत की बात यह रही कि इस अभियान में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
प्रदेश के 26 जिलों में बाढ़ का असर
उत्तर प्रदेश में गुरुवार को 26 जिलों में बाढ़ का असर रहा। करीब 3.53 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार अब तक 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि 4,847 लोग बाढ़ शरणालयों में रह रहे हैं। प्रदेश में कुल 1,312 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं।
राहत और बचाव अभियान के तहत प्रदेश में 1,634 बाढ़ चौकियां, 1,697 नाव-मोटरबोट और 1,068 मेडिकल टीमें सक्रिय हैं। प्रभावित लोगों तक भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के साथ संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है।
लाखों राहत पैकेट और जरूरी सामग्री वितरित
बाढ़ प्रभावित लोगों तक अब तक 72,897 बाढ़ राहत खाद्यान्न पैकेट और 3,67,551 लंच पैकेट पहुंचाए जा चुके हैं। पशुओं के लिए पांच हजार क्विंटल से अधिक भूसा उपलब्ध कराया गया है।
स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 5.52 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 1.87 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ से 45 हजार से अधिक पशु प्रभावित बताए गए हैं, हालांकि अब तक किसी पशु की मौत की सूचना नहीं है।
इन जिलों में बाढ़ का असर
प्रदेश के जिन जिलों में बाढ़ का असर दर्ज किया गया है, उनमें अमरोहा, अयोध्या, आजमगढ़, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी शामिल हैं।
प्रशासन का फोकस फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और जलस्तर की लगातार निगरानी पर है।

