Sunday, September 19, 2021
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गांधी आश्रम जमीन घोटाला, आयोग के शिकंजे में घोटालेबाज

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  • आयोग ने गांधी आश्रम समिति और बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा पत्र
  • कभी भी बिल्डर व समिति मंत्री के खिलाफ कराई जा सकती है एफआईआर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गांधी आश्रम की करोड़ों की संपत्ति को कब्जाने के ‘महाखेल’ में अब शहर के एक बड़े सीए और गांधी आश्रम समिति के मंत्री की गर्दन फंस गई है। दरअसल, खादी और ग्रामोद्योग आयोग भारत सरकार की अनुमति के बिना गांधी आश्रम की चल और अचल संपत्ति बिक्री नहीं की जा सकती और नहीं इसकी लीज ही की जा सकती है, लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि शहर के बड़े सीए पवन गुप्ता और गांधी आश्रम समिति के मंत्री पृथ्वी सिंह रावत ने आपस में सेटिंग-गेटिंग का खेल करते हुए एक डीड तैयार की, जो 30 वर्षों के लिए की गई थी। जो वर्तमान में सवालों के घेरे में आ गई है।

इस डीड को लेकर खादी और ग्रामोद्योग आयोग भारत सरकार ने अमान्य ही नहीं किया, बल्कि इस पूरे प्रकरण में लिप्त सीए पवन गुप्ता और आश्रम समिति के मंत्री पृथ्वी सिंह रावत के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भी निदेशक मेरठ मंडल कार्यालय खादी और ग्रामोद्योग आयोग गढ़ रोड मेरठ को लिखा गया है। अब इसकी उच्च स्तरीय जांच के बाद इसमें कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।

गांधी आश्रम मेरठ की जमीन कि डीड को लेकर गांधी आश्रम समिति के मंत्री पृथ्वी सिंह रावत बुरे फंस गए हैं। जमीन को लीज पर कैसे दे दिया, जो डीड तथाकथित बिल्डर एवं सीए पवन गुप्ता से की गई, उसको लेकर गांधी आश्रम के मुख्यालय मुंबई के निदेशक ने संस्था की शिकायत के बाद स्पष्टीकरण मांग लिया है।

मुंबई मुख्यालय से जो पत्र आया है, उसमें कहा गया है कि शिकायतों पर स्पष्टीकरण मांगा गया था, जो अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया। इसको लेकर पत्र में सख्त नाराजगी व्यक्त की गई। इस मामले को गंभीर अपराध मानते हुए कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। कहा गया कि पूर्व में आश्रम का स्पष्टीकरण मांगा गया था, परंतु संबंधित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण नहीं भेजा गया, जो संदेह की स्थिति को उत्पन्न करता है।

यही नहीं, इसको लेकर पुन: स्मरण कराया जा रहा है कि उपरोक्त अनुसार स्पष्टीकरण यथाशीघ्र इस कार्यालय को भिजवाना सुनिश्चित करें। आश्रम की कोई भी संपत्ति आयोग के बिना पूर्व स्वीकृति बिक्री अथवा लीज आदि पर नहीं दी जाए। यदि आयोग कि बिना स्वीकृति के आश्रम की संपत्ति की बिक्री खुर्द बुर्द की जाती है तो संस्थान के पदाधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे प्रकरण के लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे। यह पत्र गांधी आश्रम मुख्यालय मुंबई से निदेशक ने जारी किया है। इसकी प्रतिलिपि उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी खादी और ग्रामोद्योग आयोग भोपाल तथा निदेशक खादी खादी और ग्रामोद्योग आयोग मुंबई को भेजी गई है। महेश चंद पंथ क्षेत्रीय गांधी आश्रम परिसर गढ़ रोड मेरठ को भी इसकी सूचना देकर कार्रवाई करने के लिए लिखा गया है।

ये हुई थी डीड

गांधी आश्रम समिति के मंत्री पृथ्वी सिंह रावत ने रेणुका आशियाना प्राइवेट कंपनी के साथ एक डीड हस्ताक्षर की थी, जिसमें चार हजार वर्ग गज जमीन को मात्र 1.80 लाख प्रतिमाह किराए पर देना दशार्या गया है, इस पर कब्जा होना भी दर्शा दिया गया है, जिसके बाद ही स्पष्ट हो रहा है कि इसमें बड़ा खेल हुआ है।

इस तरह से इस जमीन को लेकर 30 वर्ष की डीड साइन कर गांधी आश्रम समिति ने इसमें झोल पैदा कर दिया। इतना सब होने के बावजूद गांधी आश्रम समिति ने जमीन को कैसे 30 साल के लिए लीज पर दे दिया?

भ्रष्टाचार में समिति की गर्दन

गढ़ रोड स्थित हापुड़ स्टैंड के समीप गांधी आश्रम हैं। यहां जमीन तो करीब 20 बीघा से ज्यादा हैं, लेकिन 4 हजार वर्ग गज जमीन को समिति ने कैसे लीज कर दे दिया? इसकी डीड तैयार करने के बाद गांधी आश्रम समिति के मंत्री पृथ्वी सिंह रावत की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है।

महाखेल कितनी तेजी के साथ खेला जा रहा था कि इसका मानचित्र तक एमडीए में दाखिल कर दिया गया था। नगर निगम व प्रशासन से भी एनओसी मांगी गई थी। यही नहीं, सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि नगर निगम में इसमें एनओसी भी जारी कर चुका हैं।

खेल बड़े स्तर पर चल रहा था, जिसके चलते पैसे की खनक के चलते कागज भी आगे-आगे दौड़ रहे थे। ‘जनवाणी’ इस खबर को हाइलाइट नहीं करता तो यह तय है कि इसका जल्द ही मानचित्र भी स्वीकृत हो सकता था। क्योंकि इस महाखेल में कुछ माफिया लगे हुए हैं, जो पैसा फेंकों तमाशा देखों वाला काम चल रहा था।

आयोग में बंधक जमीन की कैसे कर दी डीड?

गांधी आश्रम की जमीन आयोग के पास बंधक हैं। जब सम्पत्ति आयोग के पास बंधक है तो फिर कैसे डीड की जा सकती हैं, इसको लेकर गांधी आश्रम समिति के मंत्री व चार हजार वर्ग जमीन को तीस वर्ष के लिए लीज पर लेने वाले बिल्डर एवं सीएम पवन गुप्ता फंस गए हैं।

करोड़ों की सम्पत्ति को हथियाने के लिए महाखेल तो खेला गया, मगर यह खेल हाईस्तर पर नहीं, बल्कि गांधी आश्रम की मेरठ स्थित समिति के पदाधिकारियों तक सीमित रहा, जिसके चलते आयोग ने इसमें कड़ी कार्रवाई करने के लिए पत्र भी जारी कर दिये। खादी निदेशालय की तरफ से पत्र व्यवहार कर इसमें कड़ी कार्रवाई करने के लिए भी लिखा गया है। हालांकि अभी तक इसमें कोई कार्रवाई सामने नहीं आयी है।

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