जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: गंगा का जलस्तर पिछले एक माह से लगातार उतार-चढ़ाव का खेल चल रहा है। जलस्तर कम होने पर ग्रामीणों की उम्मीद जगती है तो अगले ही दिन बढ़ते जलस्तर से ग्रामीणों की मुश्किलें दोगुनी हो जाती हैं। बुधवार को हरिद्वार बैराज से गंगा जलस्तर बढ़कर 1 लाख 94 हजार क्यूसेक हो गया जो बिजनौर होते हुए हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में तबाही मचा रहा है। खादर के दर्जनों से भी अधिक गांव महीनों से बाढ़ के पानी से घिरे है। लगातार कटान के चलते गंगा बस्तौरा के समीप पहुंच गई, जिससे भयभीत ग्रामीण लगातार पलायान कर रहे हैं।
बता दे कि शिवालिक की पहाड़ियों व मैदानी क्षेत्रों में हो रही बरसात के कारण एक बार फिर से गंगा का जलस्तर बढ़ गया। अगस्त के पहले सप्ताह से गंगा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के खेल से खादर क्षेत्रों में दर्जनों गांव जलमग्न हो गए हैं। खेतों में बाढ़ का पानी भरा होने के चलते फसलें नष्ट हो गई हैं। अधिकांश गांवों के पानी से घिरा होने के चलते ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। हालाकि प्रशासन द्वारा बाढ क्षेत्र में लगातार राहत और बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं, लेकिन स्थिति गंभीर बनी हुई है और ग्रामीण कटान और बाढ़ के डर से पलायन करने को मजबूर हैं।
हरिद्वार बैराज से गंगा डिस्चार्ज में लगातार वृद्धि
पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही भारी बरसात के चलते हरिद्वार और बिजनौर बैराज से गंगा डिस्चार्ज में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। गंगा डिस्चार्ज में वृद्धि के चलते बुधवार को हरिद्वार भीमगोडा बैराज से डिस्चार्ज बढ़कर 1 लाख 94 हजार क्यूसेक हो गया। वहीं, बिजनौर बैराज से भी डिस्चार्ज बढ़कर 1 लाख 96 हजार क्यूसेक हो गया।
प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे बाढ़ पीड़ित
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की बाढ़ ने उनकी जिंदगी संकट में डाल दी है। घरों में पानी घुसने से खाने-पीने की समस्या खड़ी हो गई है। रोजगार पूरी तरह ठप हो चुका है, जबकि पशुओं के लिए चारे तक की व्यवस्था नहीं हो पा रही। लोग अब पलायन करने पर मजबूर हो रहे हैं। बस्तौरा निवासी रामपाल ने बताया कि गांव में चारों तरफ पानी भरा है। हम लोग एक माह से प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, लेकिन कोई मदद नहीं पहुंची। अगर सरकार समय रहते बांध बनवा देती तो आज यह हालात नहीं होते।
एक माह से घरों में कैद खादर के ग्रामीण
पिछले एक माह से क्षेत्र के ग्रामीण घरों में कैद होने को मजबूर है। ग्रामीण किसी तरह से ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठकर अपने खाने का इंतजाम तो कर ले रहे हैं, लेकिन पशु चारे का इंतजाम होना मुश्किल हो रहा है। हालत ये है कि पशुशाला में बंधे पशु भी भूखे हैं। सड़कों पर पानी भरा होने से छात्र-छात्राओं को भी पढ़ने जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

