- अलग-अलग समुदाय के मरीजों की हो चुकी थी किडनी खराब
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कई बार कुदरत भी ऐसा संजोग पैदा कर देता है जो एक मिसाल बन जाता है। ऐसा ही मामला गढ़ रोड स्थित न्यूटिमा हॉस्पिटल मे देखने को मिला जब दो अलग समुदाय के मरीजो की जान उनके परिजनों ने एक दूसरे को किडनी देकर बचाई। दोनों मरीजों के परिजनों का खून मैच नहीं हो रहा था जबकि अलग-अलग रूप से खून मैच कर रहा था।
इसके बाद हॉस्पिटल ने प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद दोनों की किडनी बदलते हुए दूसरी किडनी लगाई।
न्यूटिमा हॉस्पिटल मे एक साथ चार आॅप्रेशन किए गए जिनमें से दो लोगो की किडनी निकाली गई और दो मरीजों को ट्रांसप्लांट की गई।

गुर्दा प्रत्यारोपण के जानें-माने विशेषज्ञ डा. संदीप गर्ग, डा. शालीन गर्ग व डा. शरत चंद्र गर्ग ने यह कारनामा कर दिखाया। स्वैप विधि द्वारा किए गए गुर्दा प्रत्यारोपण में अमरोहा के रहने वाले मरीज अफसर को मरीज अंकुर की मां अनीता मेहरा ने अपनी किडनी दी। जबकि मोदीनगर के रहने वाले मरीज अंकुर मेहरा को अफसर के भाई मो. अकबर ने अपनी किडनी दी। इस तरह दो समुदाय से जुड़े होने के बावजूद इंसानियत की अनोखी मिसाल पेश की गई।
क्या होता है रेनल ट्रांसप्लांट?
किसी मरीज के गुर्दे पूरी तरह काम करना बंद कर देते है तो मरीज के लिए केवल दो विकल्प बचते हैं। पहला गुर्दा विशेषज्ञ के निर्देशानुसार मरीज को लगातार डायलिसिस पर रखा जाए। दूसरा मरीज का गुर्दा प्रत्यारोपण करा कर मरीज सामान्य जीवन व्यतीत करे। यदि मरीज दूसरा विकल्प चुनता है तो उसके घर परिवार या रिश्तेदार व दोस्त गुर्दा दान कर सकता है। इसी को रेनल ट्रांसप्लांट कहते हैं।
दोनों मरीजों का ब्लड ग्रुप परिजनों से मैच नहीं
मरीज मो. अफसर का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था जबकि उसे गुर्दा देने के लिए तैयार भाई अकबर का ए पॉजिटिव। इसी तरह मरीज अंकुर का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव था। जबकि उसे गुर्दा देने के लिए तैयार मां अनीता मेहरा का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था। इसको देखते हुए डाक्टरों ने दोनों परिवारों से मिलकर आपस में बात की और एक-दूसरे को गुर्दा देने का विकल्प बताया। इसके लिए दोनों परिवार तैयार हो गए और आज उनके मरीज बिल्कुल ठीक हो चुके हैं।

