Tuesday, May 28, 2024
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बेटी बचाओ मुहिम के बीच गायब होतीं लड़कियां

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YOGESH KUMAR SONIहाल ही में संसद में महिलाओं व बच्चियों के गायब होने का आंकड़ा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा पेश किया गया, जिसमें देश भर में 2019 और 2021 के बीच 18 साल से अधिक उम्र की 1061648 महिलाएं और उससे कम उम्र की 251430 लड़कियां लापता हो गर्इं। स्थिति यह है कि 2019 और 2021 के बीच तीन वर्षों में ही देश की 13.13 लाख से अधिक लड़कियां और महिलाएं गायब हो गर्इं। गायब होने में सबसे अधिक लगभग दो लाख मध्य प्रदेश से थी, उसके बाद पश्चिम बंगाल से लगभग 192000 गायब हुई हैं। यदि आंकड़ों का और सूक्ष्म रुप से वर्गीकरण करके बताया जाए तो मध्य प्रदेश में 2019 और 2021 के बीच 160180 महिलाएं और 38234 लड़कियां गायब हो गई हैं।

वहीं पश्चिम बंगाल से कुल 156905 महिलाएं और 36606 लड़कियां लापता हुर्इं हैं। महाराष्ट्र में इस दौरान 178400 महिलाएं और 13033 लड़कियां लापता हुई हैं। ओडिशा में 70222 महिलाएं और 16649 लड़कियां गायब हुर्इं, इसी दौरान छत्तीसगढ़ से 49116 महिलाएं और 10817 लड़कियां गायब हो गर्इं।

केंद्र शासित प्रदेशों की बात करें दो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थिति काफी खराब है। केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे ज्यादा लड़कियों और महिलाओं के लापता होने की संख्या दिल्ली में ही दर्ज की गई हैं। सरकार की नाक के नीचे दिल्ली में भी बड़ी संख्या में महिलाएं और लड़कियां गायब हो रही हैं।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 2019 और 2021 के बीच 61054 महिलाएं और 22919 लड़कियां गायब हो गर्इं हैं, जबकि इसी अवधि में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर से 8617 महिलाएं और 1148 लड़कियां लापता हो गर्इं हैं। महिला सुरक्षा और बेटी बचाने के नारों के बीच देश भर से बड़ी संख्या में वह गायब भी हो रही हैं।

गायब होने वाली महिलाओं और बेटियों के ताजा आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। हम इसे ऊपरी तौर पर समझने में बिल्कुल भी सक्षम नही हो पाएंगे लेकिन आज हम आपको इसकी सच व भयावह कहानी के विषय में बताने जा रहे हैं। दरअसल, देश के कुछ राज्यों से लड़कियों को वेश्यावृति के लिए महानगरों व अन्य दूसरे राज्यों के लिए लाया जाता है।

जिसमें पश्चिम बंगाल, आसाम व मध्य प्रदेश के अलावा भी दो-तीन राज्य और हैं। इन राज्यों की कहानी यह है कि दलाल घरवालों से लड़कियों का काम दिलवाने के नाम पर ले जाते हैं, लेकिन और फिर वह लड़कियों को वेश्यावृत्ति के धंधे में उतार देते हैं। यदि हम आंकड़ों की बात करें तो वेश्यावृत्ति में पकड़े जाने वाली अधिकतर लड़कियां बंगाल की मिलती हैं। आज देश में वेश्यावृति का धंधा बड़े स्तर पर फल-फूल रहा है।

शायद ही कोई एरिया इससे वंचित हो। गरीब, लाचार व मजबूर परिवारों पर दलालों की निगाहें बनी रहती हैं। जिस घर में कोई कमाने वाला न हो, उसे पैसों का लालच दिया जाता है। बीते दिनों दिल्ली में सेक्स रैकेट में पकड़ी जाने वाली जितनी महिलाएं थीं, उन सभी के पति शराबी थे। एक महिला ने बताया कि उसका पति पूरे दिन शराब पीता है, कोई काम नही करता और घर खर्च के नाम पर एक रुपया भी नही देता तो ऐसे में वह क्या करे। महिला ने यह भी बताया कि वह पढ़ी-लिखी नहीं है तो उसे कोई काम भी नहीं मिलता।

देश में आज भी बाहुबलीपना चलता है, जिस प्रक्रिया में दबंग लोग गरीब व जरूरतमंदों को बेहद अधिक ब्याज पर पैसा देते हैं और फिर इनसे नहीं लौटाए जाते तो उनकी घर की बहन-बेटियों को उठा लेते हैं। यह बात सुनकर निश्चित तौर पर आपको फिल्मी लगेगी, लेकिन आज भी ऐसा देशभर के कई राज्यों में होता है। इसके अलावा बच्चा चोर गैंग ने पूरे देश में आतंक मचा रखा है।

पूरे देश से सैकड़ों खबरें ऐसी आती हैं कि बच्चे चोरी हो रहे हैं जो बेहद पीड़ाजनक व दर्दनाक मामला है। चूंकि कोई भी व्यक्ति कहीं भी सब्र कर सकता है, लेकिन बच्चों के मामले में टूट जाता है। अब सरकार के किरदार व जिम्मेदारी की बात करते हैं तो इसमें शासन-प्रशासन पूर्णत फेल है। चूंकि घटनाक्रम चाहे कोई भी हो, लेकिन इतने अधिक आंकडेÞ सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं।

यदि कोई मकान मालिक अपने किराएदार की वेरिफिकेशन न कराए और दोनों के बीच कोई घटना घट जाए तो पुलिस मकान मालिक को इतना परेशान कर देती है जैसे उसने कोई बहुत बडा गुनाह कर दिया हो लेकिन हर कोने में वेश्यावृत्ति के अड्डे खुले हुए हैं, वहां किसी भी प्रकार की वेरिफिकेशन नहीं होती, चूंकि वहां से हर महीने पैसा आता है।

प्रशासन ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए अलग से हेल्पलाइन नंबर व ऐप बनाया है, लेकिन इसके बावजूद स्थिति इतनी भयावह क्यों होती जा रही है? महिला एवं बाल विकास मंत्रालय व अन्य तमाम यूनिट महिलाओं के उत्थान व सुरक्षा के लिए बनाई गई हैं, लेकिन बावजूद हाल इतना खराब है तो आखिर किस दिशा में जा रहा है।

बीते दिनों मणिपुर में महिला को नग्न करके घुमाए जाने वाले विडियो से देश की जनता आक्रोशित है और इस ही बीच इन आंकड़ों का आने से देश की जनता नाराज है। यदि थाने में किसी की गुमशुदगी की रिपोर्ट कराने जाओ तो पुलिस वाले एक कानून का हवाला देते हैं, जिसमें यह बताया जाता है कि वह 24 घंटे से पहले एफआईआर दर्ज नहीं करते, लेकिन इस कानून की वजह से पीड़ित परिवार या व्यक्ति सबसे महत्वपूर्ण समय खो देता है चूंकि यदि किसी के मिलने की कोई गुंजाइश होती भी है तो वह खत्म सी हो जाती है।

जनता को सरकार से कोई बहुत ज्यादा तो नहीं, लेकिन हां, रक्षा व सुरक्षा की उम्मीद जरूर रखती है और सरकार को किसी भी स्थिति में इस कसौटी पर खरा उतरना अनिवार्य समझना चाहिए।


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