Friday, June 14, 2024
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दो हजार से चमका सोने की छड़ों का बाजार

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Samvad


AMITABH Sदो हजार रुपये के नोट चलन से बाहर होने की घोषणा के साथ ही दिल्ली में 24 कैरेट सोने के बिस्कुट-छड़ों का भाव पहली बार 72,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पार हो गया। सोने की यह बढ़त बेशक पूर्णत: देशी है और 2,000 रुपये के नोटों को सोने में तब्दील करने की आपाधापी का नतीजा है। सीधे शब्दों में, इसे सोने की ब्लैक कह सकते हैं। क्योंकि सोने के अंतराष्ट्रीय भाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत और कस्टम ड्यूटी, सेस और जी एस टी की दरें स्थिर हैं। इनकी गणना के मुताबिक 24 कैरेट सोने का भाव करीब 61,000 प्रति 10 ग्राम ही बैठता है, जो नोटबंदी 0.2 की घोषणा के दिन था। चूंकि निवेश विशेषज्ञ बताते रहे हैं कि सोना जिस भाव में खरीदा जाए, सस्ता ही होता है। क्योंकि छोटी और बड़ी अवधि में भी मुनाफा दे कर ही जाता है। दो हजार के नोटों के बदले सोने के बिस्कुट, सिक्के और छड़ें ही ज्यादा बिक रही हैं।

सोने के जेवरों की तरह सोने की छड़ों, बिस्कुटों और सिक्कों की अपनी अलग दुनिया है। जूलर इन्हीं छड़ों, बिस्कुटों और सिक्कों को गलाकर गहने बनाते हैं । ‘वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल’ के अनुसार दुनिया भर में सोने की छड़ें, बिस्कुट और सिक्के बनाने वाली केवल 58 कंपनियां हैं।

छड़ों, बिस्कुट और सिक्कों को 40 विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है। सबसे मशहूर और भरोसेमंद सोने की छड़ें बनाने वाली कंपनियों में द रॉयल मिंट, पर्थ मिंट, उमिकोर, एमिरेट्स, मेटलोर और पेम सुइस हैं।

इन्हीं गिने- चुने उत्पादकों द्वारा निर्मित सोने की छड़ें और बिस्कुट दुनिया की 4 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण एजेंसियों- लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन, कॉमेडिटीज एक्सचेंज न्यूयार्क, टोक्यो कामोडिटी एक्सचेंज और ज्यूरिख गोल्ड पूल- द्वारा स्वीकृत की जाती हैं। सोने के बिस्कुट और छड़ें औद्योगिक जरूरतों, पूंजी निवेश के साधनों और बदलते फैशन को मद्देनजर रखकर बनाए जाते हैं।

आमतौर पर दुनिया की सबसे बड़ी और भारी सोने की एक छड़ का वजन साढ़े 12 किलोग्राम है। ऐसी वजनी छड़ों को 51 कंपनियां बनाती हैं। इनकी न्यूनतम शुद्धता 99.5 प्रतिशत होती है। ये छड़ें ‘लंदन वुड डिलीवरी’ में मंजूर की जाती हैं। तमाम देशों के सेंट्रल बैंक इन्हीं वजनी छड़ों के में अपना स्वर्ण भंडार रखते हैं। वैसे, एक किलोग्राम वजन की सोने की छड़ सबसे ज्यादा प्रचलित ‘कास्ट बार’ है । इसकी शुद्धता 99.99 प्रतिशत होती है।

‘किलो बार’ के अलावा 34 स्वर्ण उत्पादक कंपनियां 500 ग्राम व उससे कम, और 20 औंस व उससे कम वजन की कास्ट बार बनाती हैं। ग्रामों में 500 ग्राम से 10 ग्राम तक 8 विभिन्न वजन इकाइयों में और औंस में 20 से आधा औंस तक 7 वजन इकाइयों में सोने के बिस्कुट उपलब्ध हैं।

सबसे हल्का 10 ग्राम का बिस्कुट ब्राजील की ‘डीगस’ नामक कंपनी बनाती है। इसी प्रकार आधा औंस का बिस्कुट आॅस्ट्रिया की पर्थ मिंट में ढलता है। हालांकि सोने के भाव सातवें आसमान पर पहुंचने के चलते अब महज 1 ग्राम के प्योर सोने के सिक्के भी बनते- मिलते हैं।

ढलाई के अतिरिक्त टकसाल में बने सिक्कों की तकनीक से भी सोने के बिस्कुट बनाए जाते हैं। इस तकनीक के जरिए, सबसे पहले 1950 के दशक में सोने के बिस्कुटों का उत्पादन किया गया था। दुनिया की 25 स्वर्ण निमार्ता कंपनियां ऐसे बिस्कुटों का निर्माण ग्राम और औंस वजन इकाइयों में करती हैं।

ग्रामों के तहत 14 विभिन्न वजनों में 500 ग्राम से 0.3 ग्राम तक बिस्कुट बनते हैं। उधर औंस के अंतर्गत 20 औंस से लेकर 1/10 औंस की कुल 8 वजन इकाइयों में बिस्कुट बनाए जाते हैं। कनाडा की जानसन मारही सबसे भारी 500 ग्राम और 20 औंस के बिस्कुट बनाती हैं।

सबसे हल्के 0.3 ग्राम वजन के बिस्कुटों का निर्माण जापान की तानाका कंपनी करती है। सोने की टेल छड़ें तीन आकारों में बनती हैं- बिस्कुट, नाव और छेदनुमा तश्तरी। इनकी शुद्धता 99 फीसदी होती है और वजन आधा टेल से 10 टेल तक। टेल छड़ों का इस्तेमाल मुख्यत: हांगकांग और ताइवान जैसे चीनी भाषी देशों में बढ़- चढ़ कर होता है। ‘टेल’ वजन की चीनी इकाई है।

सोने के बुलियन सिक्के भी खूब बनते और बिकते हैं। जापान के ‘पीन येन’, आस्ट्रेलिया के ‘नगेट’, आॅस्ट्रिया के ‘पिल्कमोनिकर’, कनाडा के ह्यमेल्प लीफ’, चीन के ‘पंडा’, सिंगापुर के ‘लॉयन’, दक्षिण अफ्रीका के ‘क्रूगरेंट’, ब्रिटेन के ‘ब्रटानिया’ और अमेरिका के ‘ईगल’ दुनिया के नामी- गिरामी बुलियन सिक्के हैं।

अब तो भारत के सरकारी और गैर सरकारी ज्यादातर बैंक सोने के सिक्के बेचते हैं। हालांकि बीते दसेक साल से तो नहीं, लेकिन उससे पहले सोने के 10 तोले के बिस्कुट यूरोपीय देश खासतौर से भारत के लिए बनाते थे। तब तोला बिस्कुटों की लगभग सारी खपत भारत और पाकिस्तान में ही होती थी।

भारत में बीते कई दशकों से ग्राम पद्धति लागू है, फिर भी सालों-साल सोने के बिस्कुटों में तोला ही प्रचलित रहा। दस तोले का मतलब 116.64 ग्राम होता था, जिसके सोने की शुद्धता 99.9 प्रतिशत थी। भारत में, आजकल 500 रुपये के नोटों से खरीदने पर एक बिस्कुट की कीमत करीब सात लाख रुपये है। सोने के बिस्कुट या स्टैंडर्ड का ताजा भाव रोजाना अखबारों में छपता है।

भारत सरकार के उपक्रम सेक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड ने बाकायदा अखबारों में विज्ञापन जारी कर सोने के सिक्के बेचने शुरू किए हैं। दिल्ली, नोएडा, मुम्बई, हैदराबाद और कोलकाता के बिक्री केंद्रों से 5, 10, 50, 100 और 1000 ग्राम के 999 शुद्ध सोने के सिक्के और छड़ें बेची जा रही हैं।

हालांकि भारत में 1960 से 1990 के तीन दशकों तक लागू रहा गोल्ड कंट्रोल एक्ट बीते तीन दशकों से पूरी तरह हट चुका है, तब से सोने के बिस्कुट, छड़ें और सिक्के खरीद, रख और बेच सकते हैं।


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