- खाड़ी देशों से तस्करी कर लाया जाता है सोना
- तस्करी में भोले-भाले व बेरोजगार युवकों का होता है इस्तेमाल
- सोना तस्करों के मुजफ्फरनगर में हैं मजबूर पैरोकार, मिर्जा गुलजार बेग
जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: सोना तस्करों का मुजफ्फरनगर में एक मजबूत नेटवर्क हैं। जनपद के दर्जनों गांवों के लोगों के अलावा मुजफ्फरनगर के दक्षिणी खालापार, लद्दावाला व मल्हूपुरा में भी बड़ी संख्या में लोग इस अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं। तस्करों द्वारा करोड़ों रूपये के टैक्स की चोरी की जाती है। यह तस्कर ऐसे तस्करी के लिए ऐसे लोगों को अपना शिकार बनाते हैं, जो भोले-भाले व बेरोजगार होते हैं। तस्कर ऐसे लोगों को विदेश में फ्री यात्रा व रूपये कमाने का लालच देकर अपने जाल में फंसाते हैं।
अभी हाल ही में शहर कोतवाली पुलिस व क्राइम ब्रांच द्वारा सर्राफा बाजार में सोना गलाते हुए दो लोगों को गिरफ्तार कर कई किलो सोने का बारूदा बरामद किया था। हालांकि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चोरी की आशंका का मुकदमा दर्ज कर उन्हें रिहा कर दिया था, परन्तु यह पहला मामला नहीं है, जिसमें विदेशों से सोने की तस्करी किये जाने का खुलासा हुआ हो, बल्कि ऐसे खुलासे पहले भी कई बार हो चुके हैं। मजबूत नेटवर्क व पैसों की खनक के चलते आज तक इन तस्करों पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी है। दूसरी बात यह है कि हमेशा पुलिस व टैक्स टीम को केवल मोहरे ही हाथ लगे हैं, जबकि इस खेल के बादशाह आज तक पुलिस व टैक्स टीम के हाथ नहीं लग सके हैं।
कैसे होता है यह अवैध कारोबार
जनपद के ग्राम बागोवाली, बझेडी, रथेडी, चरथावल, शेरपुर, शेरनगर, खुड्डा, खामपुर आदि गांवों के अलावा शहर के मौहल्ला दक्षिणी खालापार, खालापार, लद्दावाला, मल्हूपुरा आदि मौहल्लों काफी लोग गल्फ देशों में रोजी रोटी कमाने के लिए गये थे, जहां पर उन्होंने देखा कि यदि सोना यहां से तस्करी कर हिन्दुस्तान ले जाया जाये, तो काफी मुनाफे का सौदा हो सकता है। छोटे स्तर से यह काम शुरू किया, तो उन्हें काफी मुनाफा हुआ, उसके बाद यह काम बड़े पैमाने पर होने लगा। शुरू में जिन लोगों ने यह कारोबार शुरू किया था, उन्होंने बाद में अपना पेटर्न बदल लिया। हुआ यूं कि इन लोगों से इस कारोबार में अपने परिवार के लोगों को भी शामिल किया, जिनमें से कुछ गल्फ देशों में रहकर वहां से से सोना भेजने लगे, और कुछ हिन्दुस्तान में रहकर यह सोना रिसीव कर बेचने लगे। कैरियर के रूप में उन्होंने ऐसे लोगों को अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया, जो बेरोजगार या सीधे-साधे लोग थे। यह लोग ऐसे लोगों को चिन्हत करते थे और उन्हें लालच देते थे कि मुफ्त में विदेश यात्रा के साथ-साथ उन्हें पांच हजार से लेकर दस हजार रूपये तक मिलेंगे। लोग इनके जाल में फंस जाते थे। सोना तस्करी के अलावा यह लोग इनके पासपोर्ट के जरिये करेंसी एक्सचेंज का खेल भी ख्ेालते थे।
एयरपोर्ट बदल-बदलकर होता है कारोबार
सूत्रों की मानें तो सोना तस्करी के इन कारोबारियों की सेटिंग कस्टम विभाग व एयरपोर्ट पर रहती है। इनके जो लोग एयरपोर्ट पर पहुंचते हैं, उनकी सूचना यह एयरपोर्ट पर तैनात अपने लोगों को मुहैया करा देते हैं, जिसके बाद वह इन लोगों को एयरपोर्ट से कस्टम से बचाकर बाहर निकालने में सहयोग करते है। इतना ही नहीं यह बार-बार एयरपोर्ट भी बदलते हैं, मसलन कभी लखनउ एयरपोर्ट, तो कभी दिल्ली एयरपोर्ट, कभी मुम्बई एयरपोर्ट तो कभी जयपुर एयरपोर्ट। यह ऐसा इसलिए करते थे, क्योंकि इनके आदमियों को जिस एयरपोर्ट पर ड्यूटी होती थी, यह अपने पैसेजंर को उसी एयरपोर्ट के माध्यम से बुलाते थे।
सीबीआई कोर्ट में चल रहे मुकदमें
मुजफ्फरनगर के दक्षिणी खालापार निवासी एक परिवार सोना तस्करी का यह कारोबार बड़े स्तर पर कर रहा है। सूत्रों की मानें तो 2019 में इसी परिवार के लोगों द्वारा लगभग दो दर्जन लोगों को दुबई भेजा गया था और वहां से इनके साथ अवैध सोना, सिगरेट व अन्य सामान भेजा था। यह सभी यात्री वाराणसी एयरपोर्ट पर पहुंचे थे, परन्तु इनके आने से पहले एयरपोर्ट पर तस्करों के जो लोग मौजूद थे, उनकी एन्टीकरेप्शन के पास शिकायत पहुंच गयी थी और एन्टीकरेप्शन ने दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया था, जिनके मोबाइल से उक्त तस्करों के पेसेन्जर की भी पूरी डिटेल मिल गयी थी। जब यह पेसेन्जर एयरपोर्ट पर पहुंचे थे, तो उनके पास से बड़ी संख्या में विदेशी सिगरेट व सोना बरामद हुआ था। कई लोग गिरफ्तार भी हुए थे। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। इस पूरे मामले में तस्करों का खुलासा हुआ था, परन्तु कार्रवाई केवल यात्रियों पर की गयी थी, जिनमें से कई आज भी जेल में बंद हैं।
विदेशी सिगरटों की भी होती है तस्करी
सोना तस्करी के लिए तस्करों द्वारा यात्रियों के माध्यम से विदेशी सिगरेटों की भी तस्करी करायी जाती है। सू़त्रों की मानें तो गल्फ देशों से तस्करों द्वारा जिन सिगरेटों की तस्करी की जाती है, उनकी भारत में बहुत डिमांड हैं, जिसमें तस्कर बड़ा मुनाफा कमाते हैं।
तस्करों के पैरोकार करते हैं पैरोकारी
सूत्रों की मानें तो तस्करों के हाथ बहुत लम्बे हैं और वह अपनी रसूख सफेदपोश से लेकर अफसरों तक रखते हैं और जब भी उनका तस्करी का सामान पकड़ा जाता है, तो वह अपने इन संबंधों का इस्तेमाल करते हैं। इतना ही नहीं इन तस्करों के वकील भी पहले से तय होते हैं जो इनके पकड़े जाने पर तुरन्त हरकत में आ जाते हैं। सूत्रों की मानें तो कई वकील इन तस्करों की बदौलत बहुत कम समय में मोटा रूपया कमा चुके हैं।

