जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को बुधवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला 3 सितंबर तक सुरक्षित रख लिया है।
एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने 18 अगस्त को सत्येंद्र जैन समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद अदालत ने जैन सहित पांच आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। वहीं, मामले के एक अन्य आरोपी और दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया था।
पांच आरोपी न्यायिक हिरासत में
गिरफ्तार आरोपियों में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO उदित प्रकाश राय, नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा शामिल हैं। अदालत ने इन सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। वहीं, ACB की मांग पर अंकित श्रीवास्तव को दो दिन की पुलिस कस्टडी दी गई, ताकि जांच एजेंसी उनसे पूछताछ कर सके और मामले से जुड़े साक्ष्य जुटा सके।
सत्येंद्र जैन के वकील ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने गिरफ्तारी को चुनौती दी। सत्येंद्र जैन के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि 10 मई 2024 को FIR दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद 5 अगस्त 2026 को जैन को पहली बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था। इसके बाद मंगलवार को फोन पर दोबारा संपर्क करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
वकील ने दावा किया कि इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) बिना गिरफ्तारी के चार्जशीट दाखिल कर चुका है। उनका आरोप था कि वर्तमान गिरफ्तारी ED की चार्जशीट की ही सामग्री के आधार पर की गई है और गिरफ्तारी को उचित ठहराने के लिए कोई ठोस नया आधार मौजूद नहीं है।
पूर्व DJB CEO के वकील ने भी किया विरोध
पूर्व CEO उदित प्रकाश राय की ओर से भी गिरफ्तारी का विरोध किया गया। उनके वकील ने बताया कि राय वर्तमान में मिजोरम सरकार में सचिव के पद पर तैनात हैं।
अन्य आरोपियों के अधिवक्ताओं ने भी गिरफ्तारी के आधार पर सवाल उठाते हुए कहा कि पर्याप्त सबूतों के बिना हिरासत में लेना उचित नहीं है। हालांकि, अदालत ने ACB की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपियों को न्यायिक और पुलिस हिरासत में भेजने के आदेश दिए थे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मई 2024 में सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर ACB ने दर्ज किया था। शिकायत में दिल्ली जल बोर्ड के 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के विस्तार और नवीनीकरण से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में कथित बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे।
जानकारी के अनुसार, टेंडर की शर्तों में कथित हेरफेर, आपराधिक साजिश और करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले की आशंका सामने आई। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया, जो सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रहा है।
ACB के मुताबिक, जांच में विभिन्न परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया और कथित फर्जी बिलों से जुड़े मामलों का भी पता चला। आरोप है कि बिना वास्तविक काम किए करोड़ों रुपये के चालान पेश कर भुगतान प्राप्त किया गया।

