Friday, July 19, 2024
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हाल-ए-यूक्रेन: पनाह के लिए अपनों को तलाश रहे लोग

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  • छह किमी दूर मिसाइल गिरी और जोरदार धमाके से सभी की धड़कन मानो थम सी गई। अचानक ब्लैक आउट करा दिया गया, जो जहां था वहीं थम गया। सब सहम गए और वहीं पर बैठ गए। भगवान का स्मरन शुरू कर दिया। एक बारगी लगा कि अब बचेंगे नहीं। घंटों बाद तक कुछ नहीं हुआ तो राहत की सांस ली। इसी तरह सूचना मिली कि हॉस्टल से कुछ ही दूरी पर रूसी सैनिक बेस बना रहे हैं। बात सच निकली, लेकिन आम नागरिकों के बीच किसी तरह के टकराव की बात सामने नहीं आई। यह खौफनाक तस्वीर मेरठ समेत देशभर से एमबीबीएस करने यूक्रेन गए छात्र-छात्राओं ने फोन पर अपने परिजनों से बयां की है। कुछ देश वापसी के लिए बॉर्डर रवाना हो गए तो कुछ इंतजार की राह तक रहे हैं। 20-20 घंटे तक लाइन में लगकर इंतजार करना पड़ रहा है, जो अभी भी फंसे हैं। उनके लिए खाने-पाने का संकट गहराता जा रहा है।
  • भूख-जंग सब झेल रही बच्चों की जिजीविषा
  • डेनीपर के भारतीयों ने किया लवीव का रुख, खारकीव और कीव में भी हालात खराब

जनवाणी संवाददाता |

किठौर: यूके्रन के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। वहां की स्टील सिटी डेनीपार की में बाजार और यातायात पूरी तरह बंद हैं। टेन रद्द कर दी गईं हैं। रविवार शाम रशियन सेना ने डेनीपार के मिलिटी बेस पर बमबारी कर भारी क्षति पहुंचाई। डेनीपार से पलायन कर लवीव जाने के लिए स्टेशन पहुंचे छात्रों ने स्टेशन के शैल्टर में घुसकर अपनी जान बचाई।

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किठौर का राधना गांव निवासी अब्दुल खालिक डेनीप्रो स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष का छात्र है। उसने बताया कि डेनीपार यूके्रन के तीन बड़े शहरों में सबसे बड़ा शहर शुमार किया किया जाता है। यूके्रन का औद्योगिक गढ़ होने के कारण इसे यहां की स्टील सिटी कहा जाता है।

डेनीपार में यहां की मिलिटी का बहुत बड़ा बेस है। इसलिए यह मुख्य रूप से रशियन सेना के निशाने पर है। अब्दुल खालिक ने बताया कि डेनीपार सिटी पर हमले की आशंका के चलते रविवार सुबह करीब 6:00 बजे डेनीप्रो यूनिवर्सिटी के सैकड़ों छात्रों ने लवीव कूच करने का इरादा बनाया। तमाम छात्र अपना सामान लेकर डेनीपार सिटी रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां पता चला कि टेने रद्द कर दी गई हैं।

बहरहाल तमाम छात्र स्टेशन पर बने शैल्टर में ठहर गए। दोपहर लगभग 1:30 एक टेन स्टेशन पहुंची और यूके्रन व अन्य देशों के महिला-पुरुष यात्रियों को लेकर रवाना हो गई। इंडियन छात्रों ने इसमें प्रवेश की कोशिश की तो उन्हें रोक दिया गया। टेन नहीं मिलने पर छात्र स्टेशन परिसर में टहलकर वक्त बिता रहे थे कि 4:30 बजे अचानक सारयन बज गया।

तमाम लोग दौड़कर पुन: शैल्टर में घुसे तुरंत बमबारी शुरू हो गई। जो लगभग 40 मिनट चली। बताया कि यह छात्र अपने दोस्तों के पास सुरक्षित क्षेत्र लवीव जाने के लिए अभी स्टेशन पर डटे हैं, लेकिन टेन नहीं है। वहीं खारकीव विवि में पढ़ाई कर रही किठौर की उरुज फातिमा और अमन चैधरी ने बताया कि खारकीव व कीव के हालात भी खराब हैं।

परेशानी में फंसे लाडले

लवीव इंटरनेशनल विवि में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र मुंडाली के लोटी निवासी अब्दुल्ला व मोहम्मद वसीम ने बताया कि लवीव भी पूरी तरह बंद है। यहां खाने और पानी के लाले पड़े हुए हैं। शुक्रवार को भारतीय दूतावास से जारी एडवाइजरी पर किठौर व आसपास के आधा दर्जन से अधिक छात्र-छात्राएं कैब द्वारा 25 किमी और फिर रात भर 30 किमी पैदल चलकर नौ घंटे में पोलैंड बॉर्डर पहुंचे थे।

जहां उनको -7, 8 डिग्री तापमान में पांच घंटे रोका गया। पूरा शरीर दर्द से व्याकुल था। न खाने को भोजन न ठहरने को ठिकाना। भारतीय दूतावास या यूके्रन सरकार का कोई कारिंदा वहां मदद के लिए नहीं था। बर्ताव ऐसा कि बयां करने में शर्म आए। इंडियन, नाइजीरियन इजिप्शियन और यूके्रन के हजारों छात्र-छात्राएं वहां थे। लेकिन बार्डर पार करने की इजाजत सिर्फ यूके्रन वालों को दी गई।

दबाव बनाने पर मारपीट

अब्दुल्ला ने वीडियो कॉल पर बताया कि भारतीय छात्र-छात्राओं ने वीजा पाने के लिए दबाव बनाया तो उन्हे लाईन से निकालकर मारपीट की गई। कई छात्राओं को वीजा देने के बहाने अंदर बुलाकर इस तरह पीटा गया कि उनके हाथ फ्रैक्चर हो गए।

मायूस लौटे बेबस छात्र

मोहम्मद वसीम ने बताया कि थके मांदे छात्र पोलैंड बार्डर पहुंचे तो भारतीय दूतावास ने खराब हालात का हवाला देकर वापस लौट जाने का आदेश दिया। जिसके बाद सैकड़ों बेबस छात्र फिर रातभर पैदल सफर कर रविवार तड़के अपने गंतव्य पर पहुंचे। यहां कुछ देर को दुकानें खुलीं। मगर सामान इतना की जीने भर को खाना मिल पाया।

घर वापसी की जद्दोजहद में लगे यूक्रेन में फंसे फलावदा के छात्र

यूके्रन में फंसे कस्बे के दो छात्र वतन वापसी के लिए वहां जद्दोजहद में लगे हुए हैं। परिजन उनकी सलामती को लेकर यहां चिंतित है। यूके्रन में फंसे भारतीयों में कस्बे के दो छात्र भी शामिल है। नगर के डा. सुरेश विश्वास बंगाली व हाजी जरीफ का पुत्र शान मोहम्मद यूके्रन में एमबीबीएस के छात्र है।

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युद्ध शुरू होने के बाद दोनों छात्र वतन वापसी के जतन कर रहे हैं। डा. विश्वास की पत्नी प्रीति विश्वास अपने पुत्र शंकर की सलामती को लेकर काफी चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा खुद को सकुशल बता रहा है। उससे बराबर वीडियो कॉल पर संपर्क बना हुआ है। वह सोमवार को रोमानिया बार्डर के पास पहुंच जाएगा। मोहल्ला बंजारान निवासी हाजी जरीफ का पुत्र शान भी पांच वर्षों से यूके्रन में है उसका अंतिम वर्ष है।

वह भी एयरबेस शुरू होने पर वतन वापसी कर लेगा। फिलहाल वह युद्ध भूमि से सैकड़ों किमी दूर सुरक्षित है। उसकी मां रुखसाना अपने बेटे शान मोहम्मद के यूके्रन में होने से परेशान है। जैसे ही उन्हें इंटरनेट बंद होने की खबरों की जानकारी मिली तो उनकी चिंताओं में इजाफा हो गया। दोनों परिवार अपने बच्चों से वीडियो कॉल के जरिए संपर्क बनाए हुए हैं तथा उसकी खैरियत ले रहे हैं।

शान मोहम्मद ने जनवाणी को बताया कि हालात से निपटने के लिए यूके्रन सरकार ने सिविलियन को देश के लिए लड़ने के लिए हथियार देने का ऐलान किया है। वह जल्द सही सलामत अपने वतन पहुंचेगा।

यूक्रेन में फंसे छात्रों की वापसी को छात्रों की अपील

सीसीएसयू के छात्रों ने यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को सकुशल वापस लाने के लिए पीएम को ट्वीट कर अपील की है। छात्र नेता शान मोहम्मद का कहना है कि यूक्रेन संकट एक राजनीतिक संकट है। इसमें भारतीय छात्रों का किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं है, ऐसे में पीएम मोदी से अपील की है कि वह भारतीय छात्रों को सकुशल वापस लाने के लिए उचित कदम उठाएं। अपील करने वालों में आरफीन चौहान, अरबाज खान, अजीम, फिरोज, मोहित, विकास कुमार आदि मौजूद रहे।

कैसे लौटे घर प्रियांशु बॉर्डर पर है भीड़

यूक्रेन में फंसे प्रियांशु घर लौटने का हर संभव तरीका अपना रहे हैं, परंतु घर लौटने का कोई भी राश्ता नजर नहीं आ रहा है। यूक्रेन में बमबारी के चलते प्रियांशु अपने मित्र के साथ हॉस्टल में ही कैद हैं। प्रियांशु के पिता विनोद प्रभाकर का कहना है कि अभी वहां से आना मुश्किल है।

एमबीबीएस के छात्र प्रियांशु ने 25 फरवरी को मेरठ आने का टिकट बुक कराया था युद्ध के चलते उनकी फ्लाइट कैंसिल हो गई है। वही प्रियांशु के पिता विनोद प्रभाकर का कहना है कि वह अपने बेटे प्रियांशु से सुबह शाम फोन के माध्यम से बात कर रहे हैं। प्रियांशु ने बताया कि वह कॉलेज के हॉस्टल के बंकर में रह रहे हैं।

जहां पर बने बंकर में उन्हें सुरक्षित रखा जा रहा है और उनके लिए सारी सुविधा का प्रबंध किया जा रहा है। वहीं, वापसी लौटने के लिए वहां हो रही भीड़ के चलते प्रियांशु बंकर में ही रह रहे हैं। भीड़ के कम होने के बाद ही उन्हें आने का रास्ता मिल पाएगा।

पोलैंड बॉर्डर पर गंभीर स्थिति में सरस्वती विहार की छात्रा

रोहटा रोड के सरस्वती दिलावर प्लेस की एमबीबीएस की छात्रा यूक्रेन में पोलैंड बॉर्डर पर काफी दिक्कत में है। यहां पर काफी भारतीय स्टूडेंट मौजूद है, लेकिन पोलैंड पोस्ट बंद करने के कारण सभी भारतीय छात्रों को दिक्कत आ रही है। मेरठ के रोहटा रोड सरस्वती विहार दिलावर प्लेस निवासी एमबीबीएस की छात्रा भी इन विकट हालात में पोलैंड बॉर्डर पर फस गई है। अब उनके परिजनों ने डीएम से बातचीत की है।

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सरस्वती विहार दिलावर पैलेस निवासी विनोद वर्मा ने बताया कि उनकी बेटी काजल वर्मा पांच वर्षीय एमबीबीएस का कोर्स करने के लिए यूक्रेन गई थी। वह 28 अगस्त 2021 को मेरठ से रवाना हुई थी। उन्होंने बताया कि इस युद्ध के हालात के बाद जिस स्थान पर बेटी है। वहां की बदतर स्थिति हो गई है। उन्होंने बताया कि बिटिया पोलैंड बॉर्डर के निकट है, लेकिन वहां पर यूक्रेन के सैनिक भारतीय छात्रों की कोई मदद नहीं कर रहे। उनको परेशान किया जा रहा है।

खाने-पीने की भी समस्या उत्पन्न हो रही है और सर्दी बहुत ज्यादा पड़ने के कारण रुकने में उन्हें कठिनाई हो रही है। बिटिया से बातचीत का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पोलैंड का बॉर्डर बंद कर दिया गया है। जिस कारण वह वहां से निकल नहीं पा रहे। इसकी सूचना समाजसेवी दुष्यंत रोहटा को लगी तो वह विनोद के घर पर पहुंचे। उन्होंने इस संबंध में डीएम के. बालाजी से वार्ता की। तब डीएम ने समस्या का जल्द समाधान करने का भरोसा दिलाया।

तटस्थ नीति से देश पर फर्क नहीं पड़ेगा युद्ध का

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की गूंज भले पूरी दुनिया में सुनाई दे रही हो लेकिन इसके सामरिक और आथर््िाक प्रभाव पर चर्चाएं शुरु हो गई है। हर कोई इस बात को लेकर चर्चा कर रहा है कि दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध का असर भारत और विश्व पर क्या असर पड़ेगा। युद्ध के चार दिन बीत जाने के बाद हालात जस के तस बने हुए हैं और जंग फिलहाल जारी है। शिक्षाविदों का कहना है कि तटस्थ नीति के कारण भारत पर इस युद्ध का कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है क्योंकि दोनों देश भारत को अपना मित्र मानते हैं।

मेरठ कालेज के डिफेंस स्टडीज विभाग के डा. संजय कुमार का कहना है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को चार दिन हो चुके हैं और अभी कोई हल नहीं निकला है। रूस अपनी रणनीति पर काम कर रहा है और यूक्रेन के दो टुकड़े करने के बाद वो युद्ध को समाप्त कर देगा। रूस की ताकत के सामने यूक्रेन कहीं भी ठहरने वाला नहीं है। हालांकि दूसरे देश जो हथियार देने की बात कर रहे हैं वो कारगर नहीं है क्योंकि हथियार देना अलग बात है उसको चलाने की कूवत भी होनी चाहिये। वैसे भी सामरिक युद्ध से ज्यादा यह दो विचारधाराओं साम्यवाद और पूंजीवाद के बीच की लड़ाई मानी जा रही है।

अमेरिका अपनी धमकी भरी नीतियों का सहारा ले रहा है और दुनिया की तीसरी ताकत चीन खुलकर रूस का साथ दे रहा है। यह युद्ध जल्द खत्म हो जाएगा। भारत ने तटस्थ रहने की नीति अपनाकर सही किया है। चौधरी चरण सिंह विवि के राजनीति विभागाध्यक्ष प्रो. पवन कुमार का कहना है कि कूटनीतिक रुप से भारत रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को देख रहा है। इस कारण देश पर इस युद्ध का कोई असर नहीं पड़ेगा। दोनों देशों के बीच लड़ाई प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जे को लेकर है। संयुक्त राष्ट्र संघ में जिस तरह से भारत ने दो बार की वोटिंग में तटस्थ रुख अपनाया है उससे पूरी दुनिया में नई इमेज बनी है।

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