
हमें यह स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए कि यह जो मोबाइल और लैपटॉप है, आज के युग की सच्चाई है। इसे एकदम से नकार के कोई बात नहीं हो सकती। वक्त की गाड़ी में रिवर्स गेयर नहीं हुआ करते, इसलिए हम पीछे के दिनों में लौट के बच्चों की बेहतरी के लिए कुछ नहीं कर सकते। आज हम जिस दुनिया में हैं, उसका बच्चों के लिए क्या और कैसा सकारात्मक उपयोग हो सकता है-यह हमको सोचना है। अब फिर से मासूम और खुशहाल बचपन के लौटाने का यही एक रास्ता बचा है। आज के बच्चे बड़े सुपर-डुपर हैं। जिस उम्र में हम डरते-डरते साइकिल सीख रहे थे, उस वय के बच्चों की स्टाइलिस बाइकिंग देख आंखें खुली की खुली रह जाती हैं। मोबाइल और लैपटॉप पर सधे अंदाज में चलती उनकी अंगुलियां भी कम हैरत अंगेज नहीं हैं। उनकी एक क्लिक गैजेट की स्क्रीन को अक्षरों, रंगों और चित्रों से रोशन कर देती हैं।