रामबोल तोमर |
मेरठ: वर्ष 2016 में हस्तिनापुर (मेरठ) को रेल लाइन से जोड़ने के लिए केन्द्र सरकार ने बजट जारी किया था। पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं, मगर अभी सर्वे भी फाइनल नहीं हुआ है। 2021 के बजट की तैयारी चल रही है। भाजपा के दो सांसदों के बीच विवाद बना हुआ है कि रेल लाइन कहां से होकर जाएगी।
बागपत और मुजफ्फरनगर के सांसद रेलवे लाइन को लेकर आमने-सामने हैं। 2021 का बजट फिर पेश होने जा रहा हैं। इसकी तैयारी में केन्द्र सरकार जुट गई हैं, मगर बड़ा सवाल यह है कि पांच वर्ष का लंबा समय बीत गया, मगर अभी तक भाजपा नेता रेलवे लाइन के सर्वे में ही उलझे हुए हैं।
कहां से ट्रेन की पटरी बिछाई जाएगी, यही फाइनल नहीं हुआ है? मुजफ्फरनगर संसदीय क्षेत्र का सरधना हिस्सा हैं, मगर सरधना को भी इससे टच नहीं किया जा रहा है। फिर भी सरधना के विधायक संगीत सोम भी इसको लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।
हालांकि जब हस्तिनापुर रेलवे ट्रेक की घोषणा की थी तो मेरठ और पानीपत के यात्रियों को बड़ी उम्मीद बंधी थी, मगर पांच वर्ष के लंबे समय के बाद भी एस्टीमेंट फाइनल नहीं कर सके। जमीन अधिग्रहण करने की प्रक्रिया तो दूर की बात हैं। सर्वे फाइनल होने के बाद ही अधिग्रहण की प्रक्रिया होती हैं, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है। स्मरण रहे कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री ममता बनर्जी ने वर्ष 2011 के रेल बजट में हस्तिनापुर रेल लाइन की घोषणा की थी। 190 रेल लाइनों के प्रोजेक्ट में यह प्रोजेक्ट भी शामिल था।
12वीं पंचवर्षीय योजना में इसे शुरू करने का प्रस्ताव भी बनाया गया। तकनीकी अड़चनों के चलते तीन साल तक यह प्रोजेक्ट फाइलों में दब रहा। केंद्र में सत्ता बदलने के बाद औद्योगिक नगरी पानीपत और मेरठ को रेलमार्ग से जोड़ने के लिए नए सिरे से पहल की गई। वर्ष 2016 में केन्द्र सरकार ने इसके लिए बजट जारी किया। इसके बाद ही सर्वे कार्य करने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन अभी फाइनल कुछ भी नहीं है।
अब 92 किमी लंबी इस रेल लाइन प्रोजेक्ट के लिए एस्टीमेट कब बनेगा? विलंब क्यों हो रहा हैं? कहां-कहां इसके स्टेशन बनेंगे? कुछ कितने स्टेशन बनेंगे? यह सब अभी अंधेरे में हैं। सूत्रों का कहना है कि मेरठ व पानीपत के बीच 14 स्टेशन प्रस्तावित है, लेकिन अधिकृत रूप से इसकी अभी घोषणा नहीं की गई है।
ये हो सकते है स्टेशनों के नाम
सूत्रों का कहना है कि हस्तिनापुर के बाद दौराला को रेलवे लाइन से जोड़ा जाएगा। यहां से झिटकरी के जंगल से होते हुए मुल्हैड़ा गांव में स्टेशन बनाया जाएगा। छुर से अलग हटकर रेलवे स्टेशन प्रस्तावित है। सरधना से करीब झिटकरी के जंगल में स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। यह सरधना से करीब सात किमी की दूरी हो सकती है। बुढ़ाना, कांधला ऐलम, गढ़ीराजपुर में भी स्टेशन बनाया जाएगा। ऐसा प्रस्ताव रेल अधिकारी तैयार कर रहे हैं।
2016 के बजट में जारी हुई थी धनराशि
नई रेल लाइन के लिए वर्ष 2016-17 के बजट में भारी भरकम राशि आवंटित की गई थी। मेरठ-हस्तिनापुर के बीच नई रेल लाइन का सर्वे कराने के लिए एक करोड़ की राशि दी गई थी। तब से अब तक रेलवे लाइन का सर्वे भी फाइनल नहीं हो पाया है।
रेलवे लाइन से नहीं जुड़ेगा टीकरी और दाहा
सर्वे में जो तथ्य सामने आ रहा है, उसमें बागपत संसदीय क्षेत्र टीकरी व दाहा में रेलवे ट्रेक नहीं बनेगा, बल्कि इसे बुढ़ाना कस्बे से जोड़ा जा रहा है। इसको लेकर बागपत सांसद सत्यपाल सिंह नाराज है। वो चाहते है स्टेशन दाहा व टीकरी कस्बे में भी बने, वहीं मुजफ्फरनगर सांसद इसका विरोध कर रहे हैं, जो इसे बुढ़ाना से जुड़वाकर बालियान खाप के लोगों को खुश करना चाहते हैं। इसको लेकर दोनों सांसद आमने-सामने हैं। इसी वजह से भी इस प्रोजेक्ट में विलंब हो रहा है।
जल्द होगा सर्वे पूरा: संजीव बालियान
हस्तिनापुर को पानीपत रेलवे लाइन से जोड़ने का सर्वे चल रहा है, जो जल्द पूरा होगा। दौराला से सरधना, सरधना के निकटम होकर ट्रेन गुजरेगी। मुल्हैड़ा, छुर व बपारसी से होते हुए बुढ़ाना भी रेलवे लाइन से जुड़ेगा, लेकिन टीकरी व दाहा कस्बे रेलवे लाइन से नहीं जुड़ेंगे। वह मानते है कि लंबा समय इसमें लग गया, जिसके सर्वे में समय लगता है। अब आगे काम में तेजी आएगी। |


