Saturday, April 17, 2021
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स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीजों में हाहाकार, 180 कर्मचारी बर्खास्त

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  • तमाम वार्ड में रही स्टाफ की किल्लत, मरीजों को देखने वाला नहीं कोई
  • शासन ने नहीं भेजा मेडिकल के संविदा कर्मचारियों का अप्रूवल, प्राचार्य कार्यालय पर हंगामा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेडिकल के सरदार वल्लभ भाई पटेल में तमाम वार्ड व विभागों में ड्यूटी करने वाले 180 संविदा कर्मचारियों की एक झटके में सेवा समाप्त कर दिए जाने से स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गयी हैं। मरीजों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। एकदम 180 कर्मचारियों के ड्यूटी पर न होने से मेडिकल प्रशासन के हाथ-पैर भी दिनभर फूले रहे। वहीं, दूसरी ओर जिन कर्मचारियों को हटाया गया है।

गुरुवार सुबह वह सभी प्राचार्य कक्ष पर जा पहुंचे और जमकर हंगामा किया। दरअसल, ये सभी कर्मचारी लखनऊ की अवनि परिधि कंपनी से संबद्ध हैं। मेडिकल में बतौर स्वास्थ्य कर्मी इनकी सेवाओं का अनुबंध 31 मार्च तक था। पिछले दिनों इन कर्मचारियों ने हड़ताल की थी। तब मेडिकल प्रशासन व जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इन्हें भरोसा दिलाया था, लेकिन बात आश्वासन से आगे नहीं बढ़ सकी।

दरअसल हुआ यह है कि इस बार शासन की ओर से संविदा कर्मचारियों को प्रदेश के मेडिकल व दूसरे अस्पतालों में आपूर्ति का ठेका अवनि के बजाय किसी अन्य कंपनी को दिया गया है। इस बात की कोई गारंटी नहीं कि जिस कंपनी को ठेका दिया गया है वो पहली अप्रैल को मेडिकल की स्वास्थ्य सेवाओं से बाहर कर दिए गए कर्मचारियों को अपने यहां मर्ज करेगी या नहीं।

हालांकि मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने बताया कि इन कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए शासन को एक पत्र भी लिखा गया है। प्राचार्य ने कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे हटाए गए कर्मचारियों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि वह कर्मचारियों के साथ हैं। उनके हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

वहीं, दूसरी ओर 180 कर्मचारियों के ड्यूटी न होने का साइड इफेक्ट मेडिकल अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर साफ नजर आया। इमरजैंसी समेत तमाम वार्ड में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटीलेटर पर नजर आयीं। मरीजों व तीमारदारों ने आरोप लगाया कि कोई भी सुध लेने वाला नहीं है।

नियमित रूप से जो जांच मरीजों की जाती हैं गुरुवार को वो भी नहीं की गयीं। हालांकि मेडिकल प्रशासन ने इंटर्न व नर्सिंग का कोर्स कर रहे छात्रों की मदद का प्रयास किया, लेकिन फिलहाल हालात पटरी से उतरे हुए हैं। वहीं, दूसरी ओर 180 स्वास्थ्य कर्मचारियों के सामने अब रोटी रोजगार का संकट हो गया है।

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