- बोले उलेमा-आतंकवाद के खिलाफ करबला में लड़ी गई सबसे बड़ी जंग
- शहर भर की इमामबारगाहों और अजाखानों में शुरू हुआ मजलिसों का दौर
- देश के विभिन्न हिस्सों व विदेशों से उलेमा पहुंचे मेरठ
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ‘अब्बास तेरे बाद सितम यह भी हुआ है, मासूम सकीना का भी रस्सी में गला है। छह माह के असगर ने सितम कितने उठाए, नन्ही सी लहद खोद के सर काटा है हाय’। गम ए करबला में डूबी सुबह व शामों के सिलसिले रविवार (पहली मोहर्रम) से शुरू हो गए। मोहर्रम के पहले दिन शहर भर की विभिन्न इमामबारगाहों व अजाखानों में सुबह से ही मजलिसों का सिलसिला शुरू हो गया जो देर रात तक भी जारी रहा।
इन मजलिसों में देश व विदेश से आए उलेमाओं ने जंग ए करबला के पूरे वाक्यात को बयां कर अजादारों की आंखे नम कर दी। इन मजलिसों में उलेमाओं ने कहा कि करबला में जो लड़ाई लड़ी गई वो आतंकवाद के खिलाफ अब तक के इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाई थी।
जैदी सोसायटी स्थित इमामबारगाह पंजतनी में ईरान से आए मौलाना अम्मार हैदर रिजवी ने अजादारों को खिताब करते हुए कहा कि इमाम हुसैन को करबला में परिवार सहित शहीद कर दिया गया। उनकी यह लड़ाई जुल्म व ज्यादती के खिलाफ थी। इस लड़ाई को अगर हम वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देंखे तो जो लड़ाई आज आंतकवाद के खिलाफ लड़ी जा रही है, वहीं लड़ाई मैदान ए करबला में शब्बीर के शूरवीरों ने लड़ी।

उधर, इमामबारगाह अलहाज डा. सैयद इकबाल हुसैन (पूर्वा फैयाज अली) में आयोजित मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना गुलाम अब्बास ने कहा कि मोहर्रम का महीना हमें जहां सब्र रखना सिखाता है वहीं जुल्म के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाना भी सिखाता है। इस दौरान अंजुमन दस्ता ए हुसैनी के साहिब ए बयाज हुमायूं अब्बास ताबिश ने नोहेख्वानी की। इस दौरान मोहर्रम कमेटी के संयोजक सैयद शाह अब्बास सफवी भी मुख्य रुप से मौजूद थे।
इसके अलावा जैदी फॉर्म स्थित इमामबारगाह दरबार ए हुसैनी में मौलाना नदीम असगर (लखनऊ) व मौलाना अली रिजवान (बाराबंकी) ने करबला की जंग पर विस्तार से रोशनी डाली। घंटाघर स्थित इमामबारगाह वक्फ मनसबिया में मौलाना मुर्तजा रजा (लखनऊ) व छोटी करबला चौड़ा कुआं में मौलाना अब्बास बाकरी (हैदराबाद) ने भी पहले दिन जंग ए करबला के वाक्यात को बयां किया।
आज से शुरू होगा मातमी जुलूसों का सिलसिला
मोहर्रम के मातमी जुलूसों का सिलसिला आज से शुरू होगा। मोहर्रम कमेटी के संयोजक सैयद शाह अब्बास सफवी व मीडिया प्रभारी अली हैदर रिजवी ने बताया कि शहर में सोमवार से व जैदी फॉर्म में मंगलवार से जुलूस निकलने शुरू हो जाएंगे। कमेटी ने जिला प्रशासन से पुन: मांग की है कि इन जुलूसों के दौरान सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए जाएं।
आज का जुलूस
जुलूस-ए-जुलजनाह
स्थान-जाहिदियान इमामबारगाह
प्रबंधक-सैयद नियाज हुसैन

