- 2011 में मायावती ने शुरू की थी कांशीराम गरीब आवास योजना
- 1504 गरीब परिवारों को मिली थी अपनी छत
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: गरीबों को अपनी छत मुहैया कराने के लिए 2011 में उस समय की मुख्यमंत्री रही मायावती ने कांशीराम गरीब आवास योजना की शुरूआत की थी। इस योजना में 1504 गरीब परिवारों को मकान दिये गए थे।
लेकिन अब यह योजना विफल साबित हो रही है, यहां पर करीब एक हजार से अधिक मकानोंं को आवंटियों ने या तो बेच दिया है या फिर किराए पर दे रखा है। विधायक सोमेन्द्र तोेमर ने इसकी जांच कराई है जिसकी रिपोर्ट आना अभी बाकी है जिसके बाद बड़ी संख्या में आवंंटन निरस्त हो सकते है।
हापुड़ रोड स्थित कांशीराम कॉलोनी गरीबों के लिए एक महत्वकांशी योजना है। इस योजना का लाभ लेनें के लिए डूडा में आवेदन किया गया था जिसके बाद लाभार्थी को लेकर सभी औपचारिकताएं पूरी होनें के बाद मकान का एलॉटमेंट हुआ था। लेकिन अब बड़ी संख्या में इस योजना के लाभार्थी अपने मकानों को बेच चुके है।
केस-1
मकान संख्या बीएफ-15 को सीमा के नाम से आवंटित किया गया था। लेकिन सीमा ने इसे प्रिया नाम की महिला को एक लाख पैंतालिस हजार रूपये में बेच दिया। कागजों मे अभीतक भी यह मकान सीमा के नाम से ही आवंंटित है, इस मकान में इस समय प्रिया की सहेली ने किराएदार रखा हुआ है।
केस-2
मकान संख्या केजी-157 जावेद के नाम से आवंटित है लेकिन इसे किसी और को बेच दिया गया है। मगर कागजों में आज भी जावेद का नाम ही दर्ज है।
केस-3
मकान संख्या केजी-108 हिमांशु के नाम से आवंटित है जबकि वह इसमें नहीं रहता है। हालांकि इसमें रहनें वाला परिवार किराए पर है या खरीदार है यह जानकारी नहीं है।
केस-4
मकान संख्या केजी- 291 शाहिद के नाम से आवंटित है लेकिन इसे किसी और को बेच दिया गया है। शाहिद फिलहाल कहां रहता है यह जानकारी नहीं है लेकिन कागजों में नाम उसी का दर्ज है। इस मामलें को लेकर मेरठ दक्षिण विधायक सोमेन्द्र तोमर को शिकायत मिली थी जिसके बाद कुछ समय पहले उन्होंने डूडा से जांच कराई। जिसके बाद डूडा नें कॉलोनी का सर्वे कराया है जिसकी रिपोर्ट आना बाकी है।
जानकारी मिली है कि कॉलोनी में इस समय करीब एक हजार ऐसे मकान है जिनको या तो बेच दिया गया है या फिर उनमें किराएदार रहते है। दूसरी ओर कॉलोनी के रहनें वाले कुछ लोगों ने बताया कि पहले की अपेक्षा इस समय कॉलोनी का माहौल खराब हो गया है। ऐसे में जो लोग अपनें मकान बेच चुके है वह उनकी मजबूरी बन गया था। शाम ढलते ही यहां अनैतिक काम होनें लगते है जिससे माहौल खराब हो जाता है।
आम लोगों का अपने परिवारों के साथ रहना दुश्वार हो जाता है। बतातें चलें कि कांशीराम कॉलोनी मे जिन परिवारों को मकान आवंटित हुए है वह उन मकानों को बेच नहीं सकते। लेकिन यही हो रहा है, ऐसे में पिछले ग्यारह साल से चली आ रही इस योजना का कितना लाभ गरीब परिवारों को मिला है यह सवाल उठनें लगे है।

