Sunday, June 13, 2021
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मैं सिर्फ अपना बेस्ट देने की कोशिश करती हूं: भूमि पेडनेकर

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भूमि पेडनेकर ने एक्टिंग कैरियर की शुरुआत शरत कटारिया के निर्देशन में बनी ‘दम लगा के हईशा’ के साथ की थी। इसमें उनके हीरो आयुष्मान खुराना थे। भूमि की वह पहली ही फिल्म ‘बॉक्स आॅफिस’ के लिए अच्छी खासी हिट साबित हुई थी।

कैरियर की दूसरी ही फिल्म ‘टॉयलेट एक प्रेमकथा‘ (2017) में भूमि को अक्षय कुमार के अपोजिट काम करने का अवसर मिला। श्री नारायण सिंह द्वारा निर्देशित यह फिल्म जबर्दस्त हिट रही। ‘शुभ मंगल सावधान’ (2017) में वह एक बार फिर आयुष्मान के अपोजिट नजर आई। उनकी यह फिल्म भी हिट रही और इसके साथ ही आयुष्मान के साथ उनकी जोड़ी बन गई। ‘सांड की आंख’ (2019) ‘बाला’ (2019) और ‘पति पत्नी और वो’ (2019) ने भूमि पेडनेकर की पोजिशन को काफी मजबूत किया। एक ही साल में तीन तीन हिट देने के बाद भूमि पेडनेकर, फिल्म मेकर्स की पसंदीदा अभिनेत्री बन गईं।

भारतीय परिधान साड़ी में बेहद खूबसूरत नजर आने वाली भूमि पेडनेकर ने खुद को अच्छी एक्ट्रेस साबित करने के लिए सबसे कम वक्त लेकर एक कीर्तिमान बनाया है। भूमि की खासियत है कि वह अपने हर नए किरदार के हिंसाब से खुद के अंदर जबर्दस्त बदलाव लाती हैं। भूमि पेडनेकर के अंदर उनकी पहली फिल्म ‘दम लगा के हईशा’ से लेकर ‘दुर्गामती’ तक गजब का बदलाव आया है। आजकल वह भी दूसरी एक्ट्रेसों की तरह बेहद खूबसूरत और सैक्सी नजर आने लगी हैं। प्रस्तुत हैं भूमि पेडनेकर के साथ की गई बातचीत के मुख्य अंश:
आपकी पिछली फिल्म ‘दुर्गामती’ एक हीरोइन ओरियंटेंड फिल्म थी, लेकिन उसे आॅडियंस का ज्यादा अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिल सका?

पहले इस तरह की फिल्मों को बमुश्किल कामयाबी मिल पाती है, लेकिन पिछले कुछ सालों से बड़ा बदलाव नजर आ रहा है। इस तरह की फिल्में जबर्दस्त सफलता अर्जित कर रही हैं। इस बात की मुझे खुशी है कि अब हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में हीरोइन को स्ट्रॉन्ग रोल मिलने शुरू हो चुके हैं और ‘दुर्गामती’ एक ऐसी ही फिल्म थी लेकिन कोरोना ने फिल्मों की कामयाबी पर ग्रहण लगा दिया है।

  • देखा गया है कि आपकी फिल्म भले न भी चले लेकिन आप अपने किरदार के जरिये उसमें भी छा जाती हैं?

-उसकी सिर्फ एक ही वजह है कि फिल्म या मेरा किरदार चाहे जैसा हो लेकिन मैं सिर्फ अपना बेस्ट देने की कोशिश करती हूं।

  • हर एक्टर के कैरियर में उसकी पहली फिल्म अत्यंत महत्व रखती है। आपकी पहली फिल्म ‘दम लगा के हईशा’ आपको किन अर्थों में महत्वपूर्ण लगती है?

-वह, मेरे कैरियर के लिए हमेशा एक खास फिल्म रहेगी, क्योंकि इसने मुझे एक कीमती सबक सिखाया है। इसने मुझे सपने देखने, नई तलाश करने और एक कलाकार के तौर पर हर फिल्म के साथ बड़े जोखिम उठाने के लिए प्रेरित किया है।

  • खबर आ रही है कि ‘सांड की आंख’ के बाद आप एक बार फिर से तापसी पन्नू के साथ एक फिल्म करने जा रही हैं?

-टी सिरीज इसकी प्लानिंग कर रहे हैं। फिल्म की कहानी को प्रसून जोशी डवलप कर रहे हैं। संभवत: इसे आदित्य धर डायरेक्ट करेंगे और यह एक फीमेल सेंट्रिक वार फिल्म होगी। मुझे खुशी है कि इसके जरिये मुझे तापसी के साथ एक बार फिर काम करने का अवसर मिल रहा है।

  • जिस तरह से आपका कैरियर आगे बढ रहा है, क्या उसे लेकर आप संतुष्ट हैं?

-जी बिलकुल। मुझे उम्मीद से कहीं ज्यादा मिला है और मिल रहा है। मेरे पास कुछ बेहद शानदार फिल्में हैं। सारी की सारी फिल्में ऐसी हैं जो किसी कलाकार की जिंदगी में बस एक बार ही आती हैं लेकिन मैं लकी हूं कि मुझे इस तरह के अवसर बार बार मिल रहे हैं।

  • क्या आपको यकीन है कि आप बॉलीवुड में एक एक्ट्रेस को सम्मानपूर्ण दर्जा दिला पाने में कामयाब हो सकेंगी?

-इस तरह का बदलाव शुरू हो चुका है। अब एक एक्ट्रेस के नाते मुझसे यह अपेक्षा नहीं की जाती कि मैं सिर्फ ग्लैमर पैदा करने वाली चीज बनकर रह जाऊं। इससे बढकर ऐसी कई बातें हैं जो लोग मुझसे चाहते हैं। मुझे लगता है कि यदि मैं खुद पर भरोसा करूं और खुद को आखिरी हद तक ले जाऊं तो अपना मन चाहा हासिल करते हुए अपने हुनर के जरिये खुद को सम्मान दिला सकती हूं।

मेरा सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा : मेहुल निसार

भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री में लगभग 23 साल पूरे करने वाले, एक्टर मेहुल निसार ने हाल ही में एंड टीवी के ‘संतोषी मां सुनाये व्रत कथायें’ में एंट्री की है। वह इस शो में धीरज चड्ढा की भूमिका निभा रहे हैं, जिन्हें लोग प्यार से लोग डीसी कहते हैं। धीरज का अपना एक रिसॉर्ट है, जहां स्वाति (तन्वी डोगरा) और इंद्रश (अभिषेक कादियान) आते हैं और वहीं फंस जाते हैं। मेहुल ने इस शो में अपनी भूमिका और शूटिंग के अनुभवों के बारे में बताया। साथ ही आगे क्या आने वाला इसके बारे में भी बात की।

  • टीवी इंडस्ट्री में अब तक का आपका सफर कैसा रहा है?

-मेरे लिए टीवी इंडस्ट्री का यह सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। मैंने 1998 में अपने कॅरियर की शुरुआत की थी, उसके बाद मैंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मुझे आज भी अपना पहला शो याद है, जहां मैंने एक हाई स्कूल ड्रामा में यंग टीनएजर की भूमिका निभायी थी। अब मैं एक बेटी का पिता बना हूं। मुझे पता ही नहीं चला कि समय कैसे इतनी तेजी से बीत गया और इस इंडस्ट्री में अब मुझे दो दशक से भी ज्यादा समय हो गए हैं। टेलीविजन ने मुझे जीवनभर की खुशियां, कामयाबी और संतोष दिया है।

  • इस शो में अपनी भूमिका के बारे में बताए और यह आपको कैसे मिली?

-मैं एक रिसॉर्ट मालिक, धीरज चड्ढा का किरदार निभा रहा हूं। लोग उसे डीसी के नाम से भी जानते हैं। वह अपनी बेटी को बहुत प्यार करता है, जोकि अलग-अलग राज्यों में रहकर पला-बढ़ा है। वह संतोषी मां का परम भक्त है और वह भारतीय संस्कृति की सादगी और परंपराओं को मानता है। वहीं उसकी बेटी उसके बिलकुल उलट है। वह आज के जमाने की लड़की है और मॉर्डन पहनावे में रहती है, जबकि डीसी आज भी परंपराओं के करीब है और अपनी जमीन से जुड़ा है। किसी भी अन्य पिता की तरह डीसी भी चाहता है कि उसकी बेटी भी अपने भारतीय परंपराओं और मूल्यों को माने। वैसे, जब वह पहली बार स्वाति से मिलता है तो उसकी सादगी देखकर उसे अपनी बेटी मान लेता है। यह भूमिका मिलना और इस शानदार शो का हिस्सा बनना माता की कृपा ही है, क्योंकि यह सबकुछ आखिरी समय में ही तय हुआ है। महाराष्ट्र में शूटिंग की पाबंदियों के चलते कहानी को इस तरह से मोड़ दिया गया कि वह आउटडोर शूटिंग लोकेशन को सूट करे। मुझे इस शो में एक रिसॉर्ट मालिक की भूमिका निभाने के लिये संपर्क किया गया। शूटिंग पर जाने के सिर्फ एक दिन पहले ही मुझे यह रोल मिला।

  • इस शो को करने की क्या वजह रही?

-मैंने यह शो देखा है और मुझे यह बहुत पसंद आया। ‘संतोषी मां सुनाये व्रत कथायें’ में मेकर्स ने जिस तरह से स्वर्ग लोक और पृथ्वीलोक को जोड़ा है वह कमाल का है। इसकी कहानी और कॉन्सेप्ट काफी रोचक और दिलचस्प है। कलाकार काफी ज्यादा खुश हैं और इसमें कोई शक नहीं कि सभी बेहद टैलेंटेड हैं। और आज इस शो का हिस्सा बनकर मुझे बहुत खुशी हो रही है! इस टीम के साथ काम करने का अनुभव बहुत अच्छा रहा है। सारे लोगों में काफी अपनापन और विनम्रता है। शूटिंग के पहले दिन ही हर किसी ने खुले दिल से नये सदस्यों का स्वागत किया और सारे मिलते ही घुलमिल गये।

  • क्या आप डीसी के किरदार से खुद को जोड़कर देखते हैं? आप दोनों में कितनी समानता या फर्क है?

-डीसी और मुझमें बहुत कुछ मिलता-जुलता है। मैं भी अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाता हूं और अक्सर मेरी पंजाबियत बाहर आ जाती है। साथ ही डीसी और मैं काफी खुशमिजाज किस्म के लोग हैं, जोकि इस किरदार को मजेदार बनाता है। उसे नये लोगों से मिलना और नये दोस्त बनाना अच्छा लगता है, जो फिर मुझे अपनी ही याद दिलाता है। धीरज चड्डा के किरदार को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया का मुझे बेसब्री से इंतजार है। मुझे उम्मीद है कि डीसी जनता जर्नादन के दिलों में जल्द ही अपनी एक जगह बना लेगा।



  • आपका पसंदीदा जोनर कौन-सा है और क्यों?

-कॉमेडी जोनर का मेरे जीवन में एक खास स्थान है, क्योंकि मैंने पूरी जिंदगी कॉमिक और हल्के-फुलके किरदार निभाये हैं। दूसरों को हंसाने का अहसास बहुत अच्छा होता है। लेकिन सच कहूं तो किसी को हंसाना इतना आसान नहीं होता है। यदि किसी को टाइमिंग और ह्यूमर के बीच संतुलन बनाना आ गया तो उससे काफी मदद मिलती है। साथ ही जो यह जान जाए कि कहां ब्रेक लगाना है। ईश्वर का आर्शीवाद है कि मुझमें कॉमेडी स्वाभाविक रूप से है। अब यह मेरी पर्सनालिटी का हिस्सा बन गया है। मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने इतने सारे लोगों को हंसाया और अपने हुनर से उनकी चिंताओं को भुलाने का काम किया। यह वाकई एक वरदान है!


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