
हिंदू रीति-रिवाजों के मुताबिक शादी सात जन्मों तक साथ निभाने का जरिया है। एक लड़की-लड़का जब शादी के सात फेरे लेते हैं, तो सात जन्मों तक साथ रहने की कसमें खाते हैं, लेकिन जिस रिश्ते में प्यार और अपनापन न हो! फिर ऐसी कसमें और वादे सिर्फ बोझ बनकर रह जाते हैं। मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं के विपरीत जाकर कोई भी जीवन-यापन नहीं कर सकता है। यही वजह है कि संविधान सम्मत इस देश में नागरिकों को कई संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं। ये अधिकार ही व्यक्ति की गरिमा और जीवन जीने की स्वतंत्रता को आधार प्रदान करते हैं। ऐसे में सिर्फ सात जन्मों तक साथ निभाने के वचन मात्र से कोई भी पुरुष या स्त्री अपना जीवन जीते-जी नरक नहीं बनाना चाहेगा।