Sunday, January 23, 2022
- Advertisement -
- Advertisement -
Homeसंवादखेतीबाड़ीरजनीगंधा की उन्नत खेती 

रजनीगंधा की उन्नत खेती 

- Advertisement -

रजनीगंधा अपने सुगंधित और आकर्षक फूलों की वजह से ज्यादा पसंद किया जाता है। इसके फूल सबसे ज्यादा टाइम तक ताजा दिखाई देते हैं। इसके फूलों का रंग सफेद होता है। रजनीगंधा के फूलों से गजरा बनाया जाता है। जिसका इस्तेमाल औरतें अपने श्रृंगार के रूप में करती हैं। रजनीगंधा के फूलों का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाइयों में भी किया जाता है।
रजनीगंधा की खेती के लिए किसी खास तरह की मिट्टी की जरूरत नही होती। इसकी खेती हल्की क्षारीय और अम्लीय मिट्टी में भी की जा सकती है। इसकी खेती के लिए गर्म और आद्र जलवायु सबसे अच्छी होती है। भारत में इसकी खेती पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में ज्यादा की जा रही है।
उपयुक्त मिट्टी
रजनीगंधा की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट और बलुई दोमट मिट्टी की जरूरत होती है। दोमट और बलुई दोमट मिट्टी के अलावा इसकी खेती और भी कई तरह की मिट्टी में की जा सकती है। इसके लिए जमीन की उर्वरक क्षमता अच्छी होनी चाहिए। इसकी खेती हल्की क्षारीय और अम्लीय मिट्टी में भी सकती है। जिसके लिए मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 तक होना चाहिए।
जलवायु और तापमान
रजनीगंधा की खेती समशीतोष्ण जलवायु वाली जगहों पर सबसे ज्यादा की जाती है। गर्म और आद्र मौसम में रजनीगंधा के फूल ज्यादा और अच्छी तरह से खिलते हैं। जिससे इसकी पैदावार अच्छी होती है। रजनीगंधा की खेती के लिए जमीन खुली जगह पर होनी जरूरी हैं। क्योंकि छायादार जगह पर इसकी खेती नही की जा सकती। छायादार जगहों पर इसकी पैदावार कम होती हैं। इसके फूलों को विकसित होने के लिए सूर्य के प्रकाश की ज्यादा जरूरत होती है। रजनीगंधा की खेती के लिए 20 से 35 डिग्री तापमान उपयुक्त होता है। इस तापमान पर इसके पौधे अच्छी पैदावार देते हैं। जबकि ज्यादा गर्मी और ठंड इसकी खेती के लिए उपयुक्त नही होती।
रजनीगंधा की उन्नत किस्म
एकहरी और दोहरी किस्म : रजनीगंधा की कई किस्में हैं, जिन्हें भारत में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। इनमें से कई तो ऐसी किस्में हैं जिन्हें भारत में संकरण के माध्यम से तैयार किया गया है। रजनीगंधा की सभी किस्मों को एकहरी और दोहरी किस्मों की श्रेणी में रखा गया है।
एकहरी श्रेणी की किस्में
इस श्रेणी की किस्मों में पंखुडियां एक ही कतार में आती हैं।
रजत रेखा : रजनीगंधा की ये एक एकहरी श्रेणी की किस्म है। जिसको एन बी आर आई और एन बी आर ने मिलकर तैयार किया है। इसके फूलों पर सिल्वर और सफेद रंग की धारियां पाई जाती हैं। और इसकी पत्तियां सुरमई रंग की होती हैं।
शृंगार : रजनीगंधा की एकहरी श्रेणी की ये एक संकर किस्म है। जिसको एन बी आर आई बेंगलूर द्वारा मैक्सिकन सिंगल और डबल के संकरण से तैयार किया गया है। इसके फूल का आकार बड़ा होता है। जिसकी कलिका पर हल्का गुलाबी रंग पाया जाता है। इस किस्म के फूलों की पैदावार 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक आसानी से हो जाती है।
प्रज्जवल : इस किस्म को भी एन बी आर आई बेंगलूर द्वारा मैक्सिकन सिंगल के संकरण से तैयार किया गया है। इस किस्म के फूल शृंगार किस्म के फूलों से बड़े और वजनदार होते हैं। इसके फूलों की प्रति हेक्टेयर पैदावार शृंगार किस्म से 22 प्रतिशत ज्यादा पाई जाती है।
दोहरी श्रेणी की किस्में
इस श्रेणी की किस्मों में फूलों को पंखुडियां कई कतारों में आती है।
स्वर्ण रेखा : दोहरी श्रेणी की इस किस्म का ज्यादातर उपयोग सजावट के लिए किया जाता है। इसके किस्म को एन बी आर आई लखनऊ द्वारा गामा किरणों के माध्यम से तैयार किया गया है। इस किस्म के पौधे की पत्तियों के किनारों पर पीली कलर की रेखा पाई जाती है।
सुवासिनी : इस किस्म का उत्पादन अन्य कई दोहरी श्रेणी की किस्मों से ज्यादा पाया जाता है। इस किस्म के फूल आकर में बड़े होते हैं। इस किस्म को एन बी आर आई बेंगलूर द्वारा मैक्सिकन सिंगल और डबल के संकरण से ही तैयार किया गया है।
वैभव : रजनीगंधा की ये किस्म सुवासिनी किस्म से भी ज्यादा पैदावार देने के लिए जानी जाती है। इसके फूल सफेद होते हैं। जबकि फूल की कलिका हरे रंग की होती हैं। इसके फूलों का उपयोग कट फ्लावर के रूप में किया जाता है।
खेत की जुताई
रजनीगंधा की फसल के लिए खेत की अच्छे से जुताई करना जरूरी होता है। खेत की पहली जुताई पलाऊ लगाकर करनी चाहिए। उसके कुछ दिन बाद कल्टीवेटर चलाकर अच्छे से खेत की जुताई करें। जुताई करने के बाद खेत में गोबर की खाद डालकर उसे मिट्टी में मिला दें। उसके बाद खेत में पानी देकर खेत की अच्छे से जुताई कर उसकी मिट्टी को भुरभुरा बना लें। और साथ में खेत को समतल बना दें।
बीज लगाने का टाइम और तरीका
रजनीगंधा को मैदानी भागों में फरवरी और मार्च के महीने में लगाया जाता है। जबकि पर्वतीय भागों में इसे मई और जून में लगाना चाहिए। मार्च और जून में लगाने पर पौधे पर फूल ज्यादा मात्रा में खिलते हैं। क्योंकि इसके फूलों को पर्याप्त धूप की जरूरत होती है।
रजनीगंधा के फूलों को दो तरीके से उगाया जाता है। अगर रजनीगंधा की पैदावार पौधों से तेल निकालने के लिए की जाए तो उन्हें 20 सेंटीमीटर की दूरी वाली कतारों में 15 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना सही होता है। लेकिन पैदावार पौधों से फूल लेने के लिए की जाए तो पौधों को 20 सेंटीमीटर की दूरी वाली कतारों में 20 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना चाहिए। इसके पौधों को खेत में समतल भूमि पर ही लगाते हैं। प्रति एकड़ इसके एक लाख पौधे लगाये जा सकते हैं।
पौधे की सिंचाई
रजनीगंधा के बीज को खेत में लगाने के तुरंत बाद पहली सिंचाई कर देनी चाहिए। उसके बाद बीज के अंकुरित होने तक खेत में नमी बनाकर रखना जरूरी होता है। जिसके लिए आवश्यकता के अनुसार पानी देना चाहिए। अगर खेत में अंकुरित बीज लगा रहे हों तो खेत में पहले से नमी का होना जरूरी है। इस दौरान तुरंत सिंचाई की जरूरत नही होती।
पौधे के अंकुरित होने के बाद इसको ज्यादा सिंचाई की जरूरत होती है। अंकुरित होने के बाद फूल तैयार होने तक इसको 7 से 10 सिंचाई की जरूरत होती है। लेकिन बारिश के टाइम इसको सिंचाई की जरूरत नही होती है।
उर्वरक की मात्रा
रजनीगंधा की पैदावार के लिए खेत की उर्वरक क्षमता अच्छी होनी चाहिए। इसके लिए खेत की पहली जुताई के बाद 10 से 15 गाड़ी पुराने गोबर की खाद और कम्पोस्ट खाद खेत में डालनी चाहिए। इसके अलावा एन।पी।के। के 1:2:1 के अनुपात की मात्रा प्रति हेक्टेयर आखिरी जुताई के साथ छिड़ककर खेत में मिला दें।
उसके बाद जब बीज पूरी तरह से अंकुरित हो जाए तब खेत में 50 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से यूरिया का छिडकाव करें। इसके 20 से 30 दिन बाद पौधों पर जब फुल खिलने लगे तब यूरिया, आॅर्थोफॉस्फोरिक अम्ल और पोटेशियम साइट्रेट को उचित मात्रा में मिलाकर उसका पौधों पर छिडकाव करें। इससे पौधे पर फूल ज्यादा मात्रा में आते है।
नीलाई गुड़ाई
रजनीगंधा की खेती में खरपतवार ज्यादा नुकसानदायक होती है। क्योंकि इससे पौधे में कई तरह के रोग लग जाते हैं। इस कारण पौधों की नीलाई गुड़ाई कर खरपतवार निकाल देनी चाहिए। और पौधों पर मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए। रजनीगंधा की खेती को 2 से 3 गुड़ाई की जरूरत होती है। पहली गुड़ाई बीज लगाने के एक महीने बाद ही कर देनी चाहिए। उसके बाद 15 दिन के अंतराल में नीलाई गुड़ाई करनी चाहिए।
इसकी खरपतवार को रासायनिक तरीके से खत्म करने लिए पौधे को खेत में लगाने से पहले एट्राजीन या डायुरान का छिड़काव खेत में करना चाहिए।

What’s your Reaction?
+1
0
+1
1
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
- Advertisement -

Leave a Reply

- Advertisment -spot_img
- Advertisment -
- Advertisment -

Most Popular

- Advertisment -
- Advertisment -spot_img
- Advertisment -

Recent Comments