
एस शिरढोनकर |
निमरत कौर ने एक प्रिंट मॉडल के तौर पर अपना कैरियर शुरू किया, लेकिन बाद में वह थियेटर करने लगीं। फिल्मों में उन्होंने ‘यहां’ (2005) के जरिये शुरुआत की। उस फिल्म में उन्होंने एक बेहद संक्षिप्त न्यूज एंकर का किरदार निभाया था। ‘यहां’ के बाद निमरत कौर ‘वन नाइट विथ द किंग’ (2006) और शोर्ट फिल्म ‘एनकाउंटर’ (2010) में नजर आर्इं। अनुराग कश्यप के प्रोडक्शन की ‘पेडलर्स’ में भी निमरत कौर ने काम किया। उनकी इस फिल्म को 2012 में कान्स फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया।
‘लव शव दे चिकन खुराना’ (2012) में निमरत कौर ने मुस्कान खुराना नाम की महिला का कैमियो निभाया जिसे काफी पसंद किया गया। उसके बाद वह इरफान खान के अपोजिट ‘द लंच बॉक्स’ (2013) में नजर आर्इं। इस फिल्म में पहली बार उन्हें अच्छी खासी पहचान मिली। 2016 में वह अक्षय कुमार के साथ ‘एयरलिफ्ट’ में थीं। अभी हाल ही में आई अभिषेक बच्चन और यामी गौतम स्टारर ‘दसवीं’ में उन्होंने एक राज्य के मुख्य मंत्री की ऐसी पत्नी का रोल निभाया जिसके पति को अनायास जेल की हवा खानी पड़ती है और उन्हें खुद मुख्यमंत्री का ओहदा संभालना पड़ता है। उनका यह रोल काफी कुछ बिहार की पूर्व मुख्य मंत्री राबड़ी देवी से केरेक्टर इंस्पायई था। प्रस्तुत हैं निमरत कौर के साथ की गई बातचीत के मुख्य अंश:
आपने ‘दसवीं’ के लिए जबर्दस्त बॉडी ट्रांसर्फार्मेशन किया। जिस वक्त आपपको यह रोल आॅफर हुआ, क्या आप उसके लिए फौरन तैयार हो गई थीं?
-यकीन कीजिए, फिल्म के लिए हां कहने की मुझे इतनी जल्दी थी कि मैंने स्क्रिप्ट तक नहीं पढ़ी। बस एक लाइन जो मुझे बतायी गई कि ये किरदार गांव की पॉलिटिशियन लड़की का है, मैं उसके लिए तैयार हो गई।
जब आपको पहली बार पता चला कि आपका किरदार बिहार की पूर्व मुख्य मंत्री राबड़ी देवी से इस्पायर्ड है, तब आपका रिएक्शन कैसा था?
-सच कहा जाए तो मैं पूरी तरह एक्साइटेड हो गई थी और मैंने राबड़ी देवी के काफी सारे वीडियोज देख डाले थे। जब तक फिल्म की शूटिंग शुरू नहीं हुई, मुझे बस एक ही चिंता सताए जा रही थी कि मेकर कहीं मुझे कास्ट करने के लिए अपना मन न बदल दें।
‘दसवीं’ के इस किरदार में आपको सबसे ज्यादा अपीलिंग क्या लगा था?
-एक ऐसी लड़की, जिसे पहले ठीक तरह से बोलना तक नहीं आता लेकिन जिस तरह से पॉवर में आने के बाद उसे पॉवर का नशा हो जाता है और वह एकदम बदल जाती है। मैं उससे इंप्रेस हुई थी।
‘दसवीं’ के बिमला देवी वाले किरदार के लिए आपको लगभग 15 किलो वजन बढ़ाते हुए अपनी बॉडी को पूरी तरह ट्रांसफार्म करना पड़ा। वह सब कुछ आपके लिए कितना मुश्किल था?
-मुश्किल तो नहीं लेकिन मेरे लिए वह काफी चैलेंजिंग था। वह सब कुछ चैलेंजिग इसलिए लगता था कि फिल्म के बाद मुझे वापस पहले वाले शेप में आना था लेकिन थैंक गॉड अब मैं बिलकुल पहले की तरह हो चुकी हूं।
आप हॉलीवुड प्रोजेक्टस का हिस्सा भी रही हैं। वहां और यहां आपको मुख्य रूप से क्या अंतर महसूस होता है?
-मुझे लगता है कि हॉलीवुड से हम कुछ सीखें या न सीखें लेकिन एक चीज हमें उनसे अवश्य सीखनी चाहिए और वो है कि हमें खुद की कहानियों पर भरोसा करना चाहिए। इसके लिए हमारी फिल्म इंडस्ट्री को थोड़ा और कल्पनाशील बनना होगा। जिस तरह से साउथ की फिल्मों के लिए कहानियां लिखी जा रही हैं, हमें उस परिपाटी पर चलना होगा।


