Sunday, September 19, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutनाले में गिरा मासूम: आठ घंटे चला रेसक्यू अभियान

नाले में गिरा मासूम: आठ घंटे चला रेसक्यू अभियान

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  • बच्चे का अता-पता नहीं, एनडीआरएफ की टीम बुलाई
  • तेज बारिश के कारण नाले ओवरफ्लो, गोताखोर हुए फेल

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लिसाड़ीगेट थानांतर्गत कमेला रोड पर ताज होटल के पास अहमद नगर के नाले में एक 10 साल का बच्चा खेलते समय गिर गया। बच्चा गिरते ही नाले की आगोश में समा गया। आसपास के लोगों ने शोर भी मचाया और एक दो लोग नाले में कूदे भी, लेकिन बच्चे को निकाल नहीं पाये।

सुबह साढ़े ग्यारह बजे से लेकर शाम सात बजे तक चले सर्च अभियान के बाद भी बच्चे का सुराग नहीं लगा। बाद में गाजियाबाद से एनडीआरएफ की 10 सदस्यीय टीम भी आ गई। वहीं, बच्चे के परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था। मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ कोतवाली ने परिजनों को सांत्वना दी।

अहमद नगर के नाले के नजदीक मदरसे के सामने लोहे का एक अस्थायी पुल है। सुबह जब बारिश थोड़ी देर के लिये बंद हुई तो बच्चे पुल के पास खेलने लगे। तभी तस्लीम का 10 साल का बेटा अर्श का पैर पानी के कारण फिसल गया और वो नाले में गिर गया। अर्श को गिरते देख एक युवक ने उसे पकड़ने के लिये अपना हाथ भी नीचे डाला।

अर्श ने पहले हाथ पकड़ा लेकिन कीचड़ और नाले के दबाव के कारण उसका हाथ छूट गया और वो कीचड़ में धंसता हुआ चला गया। बच्चे के नाले में गिरने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई और काफी संख्या में लोग पहुंच गए। लिसाड़ीगेट पुलिस भी भाग कर आई।

पुलिस ने स्थानीय गोताखोरों को मदद के लिये नाले में उतारा, लेकिन बच्चे का कहीं पता नहीं चला। मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट एस के सिंह, सीओ कोतवाली अरविन्द चौरसिया, नगर निगम के अपर नगर आयुक्त अधिकारियों ने पोर्कलेन मशीन मंगवा ली और नाले का सारा कूड़ा निकलवा कर सड़क पर डलवा दिया, लेकिन बच्चे का पता नहीं चला।

बारिश के कारण चूंकि शहर के सारे नाले ओवरफ्लो हो गए हैं ऐसे में रेसक्यू आपरेशन में काफी दिक्कतें भी आई। सीओ कोतवाली अरविन्द चौरसिया ने बताया कि बच्चे को ढूंढने का काफी प्रयास किया जा रहा है लेकिन अभी तक बच्चा नहीं मिला है। वहीं गाजियाबाद से एनडीआरएफ की दस सदस्यीय टीम भी मौके पर पहुंच गई है और अंधेरा होने के कारण राहत कार्य मंगलवार की सुबह शुरु हो जाएगा।

मां का रो-रोकर बुरा हाल

जैसे ही तस्लीम और उसकी पत्नी को पता चला कि उसका बड़ा बेटा नाले में गिर गया है तो कोहराम मच गया। मां तो गश खाकर बेहोश हो गई और उसे आसपास की महिलाओं ने किसी तरह संभाला। तस्लीम भागकर आया और रो-रोकर लोगों से मदद की गुहार लगाने लगा।

मौके पर मौजूद सीओ कोतवाली से कहने लगा कि साहब मेरे बेटे को बचा लो। हम लोग उसके बिना नहीं रह पाएंगे। सीओ और सिटी मजिस्ट्रेट ने तसल्ली दी कि धैर्य रखो हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। गौरतलब है कि अर्श के अलावा उसका एक भाई और बहन भी है।

युवकों ने दिखाया जोश

यह जानते हुए भी कि नाला खतरनाक है इसके बाद भी कुछ युवक कमर में रस्सी बांधकर नाले में उतरे और कूड़ा हटाकर बच्चे को ढूंढने लगे। एक युवक तो रेसक्यू के दौरान फिसल भी गया तभी उसके बगल के युवक ने उसे फौरन उठा लिया। भीषण दुर्गंध और जहरीली टाइप की गैसों के बाद भी युवकों ने अपनी क्षमता से अधिक कोशिश की।

नाले बने खूनी, कई बच्चों की हो चुकी मौत

शहर के नाले खूनी हो चुके हैं। इन नालों में गिरकर कई मासूम अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बाद भी नगर निगम के अधिकारी इन नालों को लेकर कभी भी गंभीर नहीं दिखते है। पूर्व नगर विकास मंत्री आजम खान के समय में जरुर बजट पास हुआ था, लेकिन वो भी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ था।

अगर आप घर से निकलकर शहर की सड़कों पर घूमने के आदी हैं तो खुले नालों से खुद को बचाएं। सिल्ट से लबालब और खुले नालों में लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। जब हाईकोर्ट ने जवाब मांगा तो अपनी जान बचाने के लिए निगम अफसर सक्रिय हुए और 125 करोड़ रुपये की योजना बनाकर कोर्ट में पेश कर दी।

यह नालों को सुरक्षित करने का प्लान था लेकिन इसके बाद प्लान का क्या हुआ, निगम अफसरों को भी नहीं पता। शहर में कुल 285 नाले हैं। इनमें से 12 नाले बड़े हैं। सभी नाले खुले हुए हैं और उनकी बाउंड्री भी भगवान भरोसे है। नाले सभी के लिये मुसीबत बन गए हैं।

इनमें गिरकर बच्चे, बड़ेऔर तमाम वाहन चालकों की जान जा चुकी है। तारापुरी की जाटव गली में नाले ने दो साल की मासूम बच्ची की बलि ले ली थी। वह बीमार थी तथा डॉक्टर को दिखाने के लिए ताऊ के साथ आई थी। नेहरू नगर के नाले में मंदबुद्धि 11 वर्षीय गौरव तथा मोहकमपुर नाले में गिरकर मासूम जॉनी की मौत की घटना को शहर के लोग अभी भूल नहीं पाए हैं।

ब्रह्मपुरी थाने के सामने क्रिकेट खेल रहे थे। इस दौरान थाने के सामने स्थित ओडियन नाले में बच्चों की गेंद गिर गई। गेंद निकालने के लिए एक बच्चा नाले के निकट पहुंचा तो नाले में एक युवक की लाश पड़ी देख बच्चे ने शोर मचा दिया। मामले की जानकारी मिलते ही घटनास्थल पर सैकड़ों लोगों की भीड़ लग गई।

जानकारी के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने नगर निगम की जेसीबी को घटनास्थल पर तलब कर लिया। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद जेसीबी की मदद से नाले में से लाश को बाहर निकाला। मृतक की उम्र लगभग 22 वर्ष थी। लिसाड़ी गेट क्षेत्र के मुमताज नगर में करीब डेढ़ साल पूर्व ढाई वर्ष का बच्चा मकान के पास खेलते हुए नाले तक पहुंच गया।

बच्चे को नाले से निकाला गया, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। इनके अलावा दर्जनों जानवर भी नाले में गिरकर जान गंवा चुके हैं। नगर निगम के अधिकारी सिर्फ झूठे आश्वासन देने के अलावा कोई काम नहीं करते है। बारिश आने से पहले नालों की सफाई का नाटक किया जाता है जो खानापूर्ति करने के बाद बंद कर दिया जाता है।

2018 में दिया था प्रस्ताव

नगर निगम पार्षद व कार्यकारिणी सदस्य भाई गफ्फार ने वर्ष-2018 में ही नगर आयुक्त व महापौर को प्रस्ताव दिये थे कि हापुड़ रोड ओडियन नाले पर बने पुल से महानगर के आधे क्षेत्रफल के गंदे पानी की निकासी होती है। इस पुल का निर्माण डॉट टैक्निक द्वारा हुआ था। तब शहर का क्षेत्रफल काफी छोटा हुआ करता था।

अब इस पुल के नीचा पड़ने से गंदे पानी की निकासी नहीं हो पाती है। जिस कारण महानगर के चार दर्जन से ज्यादा वार्डों में गंदे पानी की निकासी बरसात में और भी ज्यादा कठिनाई पैदा कर देती है। जिस कारण पूरा ही शहर गंदे पानी में डूब जाता है।

भाई गफ्फार ने यह भी कहा कि उपरोक्त पुल की चौड़ाई भी काफी कम है। जिससे यहां जाम लगने की स्थिति रहती है। इसके बाद भाई गफ्फार ने 30 जुलाई 2018, 9 नवंबर 2020 तथा 16 जुलाई 2021 में भी प्रस्ताव दिये, लेकिन इनको ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

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