- भावनपुर थाने की महिला दारोगा कर रही थी मुकदमे की विवेचना, रिश्वत लेने गए थे दारोगा विक्रम सिंह
- मारपीट के मामले में दर्ज हुए मुकदमे से नाम निकालने की एवज में मांगी थी रिश्वत
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: भावनपुर थाने के एक दारोगा को मुकदमे से नाम निकालने की एवज में रिश्वत लेना भारी पड़ गया। एंटी करप्शन ने पीड़ित की शिकायत पर आरोपी दारोगा को थाने के बाहर ही रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ दबोच लिया। दरोगा ने टीम के साथ हाथापाई करते हुए भागने की कोशिश की पर सफल नहीं हुए। इसके बाद एंटी करप्शन की टीम आरोपी दारोगा को लेकर सिविल लाइन थाने में पहुंची। हालांकि पूछताछ करने पर पता चला कि 22 अगस्त को थाने में दर्ज हुए इस मुकदमे की विवेचना महिला दारोगा अर्चना कर रही थी। शनिवार को आरोपी दारोगा विक्रम सिंह ने पीड़ित को रिश्वत लेने के लिए थाने के बाहर बुलाया था।
अब्दुल्लापुर नई बस्ती में रहने वाले इमरान पुत्र साबिर ने एंटी करप्शन टीम को तीन दिन पहले शिकायत करते हुए बताया कि उसके खिलाफ मारपीट के मामले में भावनपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मुकदमे से नाम निकालने की एवज में दारोगा विक्रम सिंह उससे रिश्वत मांग रहे है, जबकि इसकी विवेचना दारोगा अर्चना शक्ति कर रही हैं। इसके बाद एंटी करप्शन के प्रभारी निरीक्षक दुर्गेश सिंह ने योजना बनाकर पीड़ित इमरान को प्लान के हिसाब से शनिवार को रिश्वत के लिए केमिकल लगे 20 हजार रुपये देकर भेजा। इमरान ने दारोगा विक्रम सिंह को फोन किया, जिसमें दारोगा ने उसे थाने के बाहर चाय की दुकान पर रुकने के लिए बोला।
थोड़ी देर बाद दारोगा भी रिश्वत लेने के लिए चाय की दुकान पर पहुंचा। पीड़ित इमरान ने बताया कि दारोगा ने उससे दो गवाहों के आधार कार्ड की फोटो स्टेट भी मंगाई थी। उसके अंदर रिश्वत के 20 हजार रुपये छिपाकर उसने दारोगा को दिए। जैसे ही दारोगा ने रिश्वत के पैसे पकड़े, तुरंत एंटी करप्शन की टीम आ धमकी। टीम को देखते ही दारोगा के होश फाख्ता हो गए। उसने हाथ में पकड़े पैसों को फेंक दिया और भागने की कोशिश की। इस दौरान दारोगा ने टीम के साथ हाथापाई भी की, लेकिन वह टीम के चुंगल से नहीं छूट सका।
सोशल मीडिया पर वीडियो देख आया था विचार
इमरान ने बताया कि दारोगा को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कराने का विचार सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर आया था। उसने बताया कि वह आए दिन सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो देखता था, जिसमें रिश्वतखोर अफसरों को एंटी करप्शन के गिरफ्तार किए जाने के समाचार आते थे। यहीं से उसमें साहस आया और उसने मेरठ एंटी करप्शन को दारोगा विक्रम सिंह की शिकायत की।
दारोगा ने दुकान में बना दी थी पुलिस चौकी
दरोगा विक्रम सिंह ने अब्दुल्लापुर के हुसैनी चौक पर एक दुकान के अंदर अपना आॅफिस खोल दिया था जिसे पुलिस चौैकी का रूप दे रखा था। आरोप है कि तमाम अवैध कार्यों की डीलिंग यहीं बैठकर होती थी। दारोगा से हिस्ट्रीशीटर नदीम संग दोस्ती चर्चा मेें थी।
50 हजार मांगी थी रिश्वत, 20 में बनी थी बात
इमरान ने आरोप लगाया कि उसके खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमे की विवेचक दारोगा अर्चना शक्ति ने उसे अब्दुल्लापुर चौकी में बुलाकर 50 हजार रुपये रिश्वत मांगी थी। इतने पैसे देने से इंकार करने पर 20 हजार रुपये में बात बनी थी। इमरान ने बताया कि दारोगा अर्चना ने ही उसे दारोगा विक्रम सिंह से मिलने की बात कही थी। इसके बाद विक्रम सिंह ने रिश्वत की रकम लेने के लिए उसे थाने के बाहर बुलाया था। शनिवार को वह एंटी करप्शन की योजना के अनुसार रिश्वत देने के लिए पहुंचा, जहां से दारोगा को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया।
एंटी करप्शन टीम ने 50 हजार रिश्वत लेते पुलिस इंस्पेक्टर को दबोचा
उन्नाव: लखनऊ की एंटी करप्शन टीम ने सदर कोतवाली क्षेत्र से अपराध विवेचना शाखा के इंस्पेक्टर को एक प्लाट में अवैध कब्जे की शिकायत की जांच करने के दौरान धारा में खेल करने के लिए पेशगी के तौर पर 50 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया। टीम ने उस पर दही थाने में रिपोर्ट दर्ज करा मेडिकल कराने के बाद गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को हुई गिरफ्तारी के बाद से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है।
बता दें कि सदर कोतवाली क्षेत्र के शेखपुर मोहल्ला निवासी असलम ने 28 मई-2024 को कोतवाली क्षेत्र के गांव ख्वाजगीपुर करोवन निवासी फहद, भूपेंद्र, गौरव सिंह, गौरव शुक्ला, ताबिश व सचिन विमल पर उसके भूखंड पर धोखाधड़ी से कब्जा करने की शिकायत दर्ज कराई थी। तत्कालीन एसपी सिद्धार्थ शंकर मीना ने इसकी जांच मुख्यालय में तैनात अपराध अनावरण शाखा (क्राइम ब्रांच) को सौंपी थी। आरोप है कि इंस्पेक्टर हीरा सिंह ने पीतांबर नगर निवासी आरोपी सचिन विमल से उसका नाम हटाने व धाराओं में खेल करने की बात कह दो लाख रुपये मांगे थे।
सचिन ने इसकी शिकायत लखनऊ में एंटी करप्शन विभाग से की थी। शनिवार को टीम ने इंस्पेक्टर को रंगे हांथ दबोचने की योजना बनाकर सचिन को पेशगी के तौर पर 50 हजार रुपये इंस्पेक्टर को देने के लिए भेजा। योजना के तहत वह लहरी क्लब में रहने वाले इंस्पेक्टर को रिश्वत देने पहुंचा। जैसे उसने नोटों की गड्डी हीरा सिंह को दी पीछे से पहुंची एंटी करप्शन टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया। टीम उसे लेकर दही थाना पहुंची।
जहां से जिला अस्पताल में उसका मेडिकल कराया गया। एंटी करप्शन टीम के ट्रैप टीम प्रभारी लखनऊ डिजीवन प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी इंस्पेक्टर हीरा सिंह के खिलाफ दही थाना में रिपोर्ट दर्ज कराकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। वहीं पुलिस इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी के बाद से महकमे में हड़कंप मच गया। मामला विभागीय होने से विभाग के अफसर अभी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। बता दें कि बीते दिनों सफीपुर कोतवाली के हेड कांस्टेबल वीरेंद्र यादव को भी रिश्वत लेते पकड़ा गया था।

