जनवाणी संवाददाता |
बड़ौत: क्षेत्र के ट्योढ़ी गाव में दो दिवसीय कबड्डी प्रतियोगिता के पहले दिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों ने यहां प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। यह प्रतियोगिता रविवार को समाप्त होगी। कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक डाक्टर रामकरण के नाम किया जा रहा है।
शनिवार को प्रतियोगिता के पहले दिन काफी संख्या में खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिका का परिचय दिया। इसमें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके संजीव बालियान, लोकेंद्र कुमार व अर्जुन सिंह जैसे बड़ी खेल प्रतिभाएं शामिल हुईं।
एशियाड गोल्ड मेडलिस्ट व अर्जुन अवार्डी संजीव बालियान प्रो कबड्डी लीग में मुंबई व पटना पायरेट टीम के कोच रह चुके हैं। वर्तमान समय में वे रेलवे कबड्डी टीम के कोच हैं। सेफ गेम के गोल्ड मेडलिस्ट लोकेंद्र कुमार वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश पुलिस टीम के कोच हैं।
प्रो कबड्डी में दिल्ली डेयरडेविल्स के कोच रहे अर्जुन सिंह वर्तमान में यूपी योद्धा के कोच हैं। इनके अलावा कई और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों रविवार को यहां पहुंच सकते हैं। कबड्डी प्रतियोगिता की शुरूआत से पहले गांव और बाहर से आए सम्मानित व्यक्तियों ने हवन कर क्षेत्र के सुख शांति और समृद्धि और डॉ रामकरण को नई ऊंचाइयों को छूने की कामना की।
प्रतियोगिता में डॉक्टर रामकरण शर्मा के प्रतिनिधि उनके बड़े भाई शिवराम शर्मा और हरिओम शर्मा को सम्मानित किया गया। कोरोनावायरस की ट्रैवल रिस्ट्रिक्शंस के कारण डॉक्टर रामकरण शर्मा गांव में नहीं पहुंच सके। प्रतियोगिता का पहला मुकाबला ग्राम टयोढ़ी और शिकोहपुर के बीच हुआ जिसमें टयोढ़ी की टीम ने जीत हासिल की।
मुकाबले ढ़िकाना, नंगला, दिल्ली पुलिस, यूपी पुलिस, पखरपुर और बसी के बीच हुए। मैच के आॅफिशियल मैन रेफरी रानू चौधरी उत्तराखंड कोच, जितेन्द्र दिल्ली कोच, सचिन रावत, मंजूर अली रहे। कार्यक्रम का संचालन मुजफ्फरनगर के बसेड़ा गांव निवासी मौहम्मद इदरीश ने किया।
डा. रामकरण शर्मा ने भेजा खिलाड़ियों व ग्रामीणों को संदेश
दुनियाभर में अपने देश का नाम रोशन कर चुके ट्योढ़ी गांव के अंतरराष्ट्रीय विज्ञानी डॉ. राम करण शर्मा ने इस खेल प्रतियोगिता में शामिल हुए खिलाड़ियों और ग्रामीणों को शुकाकामना संदेश भेजा। उन्होंने कहा जिस तरह से क्रिकेट, कुश्ती, कबड्डी और निशानेबाजी में पश्चिम उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों ने विश्व पटल पर अपना परचम लहराया है। यह उनके लिए गौरव की बात है।

उन्हें जो भी उपलब्धि मिली है। उसमें उनके परिवार और ग्रामीणें का बहुत बड़ा योगदान है। उनको जो भी राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला है वह प्रत्येक गांव वासी और बागपत क्षेत्र के वासियों का सम्मान है।
प्राथमिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल में प्राप्त करने वाले डॉ. राम करण इस सवाल का जवाब खोजने में लगे हैं कि मंग्रल ग्रह के वातावरण में आदमी जिंदा कैसे रह पाएगा। उनको अपने शोध कार्यों के लिए कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। इनमें अमेरिका, जापान और इटली में मिले पुरस्कार भी शामिल हैं।

