- डीएम ने प्रस्ताव बनाकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को भेजा
- सरस्वती नदी को खोजने में भी रही है इसरो की महत्वपूर्ण भूमिका
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: महाभारतकालीन बूढ़ी गंगा के अस्तित्व की लड़ाई अब अपने अंजाम तक पहुंचती दिख रही है। जिस प्रकार प्रशासन अब इस प्रकरण में दिलचस्पी ले रहा है उससे इस बात की उम्मीद जगी है कि जल्द ही हस्तिनापुर की बूढ़ी गंगा अपने यौवन को पा लेगी। बूढ़ी गंगा के प्रवाह को खोजने के लिए अब इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) की मदद भी ली जाएगी। इस संबंध में जिला प्रशासन एक्टिव मोड में आ चुका है।
जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बूढ़ी गंगा के प्रवाह को खोजने के लिए शोभित यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रो. प्रियंक भारती के पत्र के आधार पर खुद हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केन्द्र के समूह निदेशक डॉ. ईश्वर चंद्र दास को पत्र लिखा है। पत्र में बूढ़ी गंगा की धारा की पहचान का हवाला दिया गया है। इससे पूर्व सरस्वती नदी को खोजने में भी इसरो की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

