Thursday, April 25, 2024
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जंक फूड दे रहा है बच्चों को बीमारियां

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BALWANI


सोनी मल्होत्रा |

आज की जीवन शैली आधुनिक तो हो गयी है पर आधुनिकता अपने साथ कई बीमारियां भी ले आयी है। आज माता-पिता दोनों नौकरी पेशा हैं और बच्चे के लिए क्या, उनके पास अपने लिए भी समय नहीं बचा और इस समायाभाव के कारण घर में भोजन बनाने से छुटकारा पाने के लिए बाहर के भोजन का सहारा लिया जाता है। इसके अतिरिक्त बच्चे की मांगें पूरी करते जाना व उन्हें ओवर प्रोटेक्ट करना भी इसी जीवन शैली में शामिल है।

आजकल फ्रेंच फ्राइस, पोटेटो चिप्स, समोसा, कुकीस, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक्स, केक व पिजा बच्चों का मनपसंद भोजन बना हुआ है परंतु इस प्रकार के खाद्य पदार्थों के बढ़ते प्रचलन ने बच्चों को पोषक तत्वों से दूर रखा हुआ है। बच्चा जो भी भोजन करता है उसका प्रभाव उसके विकास पर पड़ता है। इसी कारण जब बच्चे को पोषक तत्व उचित मात्रा में नहीं मिल पाते तो वह कई बीमारियों का शिकार बन सकता है। कभी कभार इस प्रकार के भोजन का सेवन बुरा नहीं पर इसका अधिक सेवन बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास में बाधा बन सकता है।

जंक फूड के बढ़ते प्रचलन ने बच्चों को घर के बने भोजन से दूर रखा हुआ है। दूध की बजाय उन्हें कोल्ड ड्रिंक पसंद है और दाल रोटी, सब्जी की बजाय पिजा और बर्गर। टीन एजर्स में भी इस प्रकार के भोजन को खाने के कारण मोटापाग्रस्त हो जाना अधिक देखने को मिल रहा है इसीलिए फिटनेस सेंटर्स की तादाद भी बढ़ती जा रही है।

मोटापा न केवल शरीर को बदसूरत बना देता है बल्कि कई गंभीर रोगों के होने की संभावना को भी बढ़ा देता है। हृदय रोग, मधुमेह आदि कई रोगों की जड़ मोटापा है। मोटे बच्चे दूसरे बच्चों के मजाक का विषय भी बनते हैं जिससे उनमें हीन भावना पनपती है और उनका मानसिक विकास भी प्रभावित होता है। जंक फूड बच्चे को कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं का शिकार बना सकते हैं और बच्चे के सोचने समझने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकते हैं। अधिक कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन भी बच्चे के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। जंक फूड में कैलोरी और फैट्स की मात्रा बहुत अधिक होती है और विटामिन, मिनरल पोषक तत्व जो बच्चे के विकास के लिए आवश्यक हैं, उनका अभाव होता है। 1 मध्यम बर्गर में अनुमानत: 245 कैलोरी और 1 कोल्ड ड्रिंक में 15० कैलोरी की मात्र पायी जाती है।

हाल ही में हुए एक शोध में पाया गया कि जो लोग जंक फूड का अधिक सेवन करते हैं उनमें एचडीएल अच्छे कोलेस्ट्रोल का स्तर भी कम पाया गया और रक्त में पाए जाने वाले एक रसायन होमोसिस्टीन का स्तर अधिक पाया गया जिसके कारण हृदय रोग की संभावना बढ़ जाती है। मोटापाग्रस्त व्यक्तियों के लिए तो इसका सेवन बहुत नुकसानदेह है।
बच्चों में जंक फूड के बढ़ते शौक के पीछे कुछ हद तक अभिभावक ही जिम्मेदार हैं क्योंकि वे प्रारंभ से ही बच्चों में स्वस्थ आदतें नहीं डाल पाते। यही नहीं, बच्चा वही सीखता है जो माता-पिता को करते देखता है। अगर माता-पिता का लाइफ स्टाइल आधुनिक है तो वह वही अपनाता है।

आज की जीवन शैली आधुनिक तो हो गयी है पर आधुनिकता अपने साथ कई बीमारियां भी ले आयी है। आज माता-पिता दोनों नौकरी पेशा हैं और बच्चे के लिए क्या, उनके पास अपने लिए भी समय नहीं बचा और इस समायाभाव के कारण घर में भोजन बनाने से छुटकारा पाने के लिए बाहर के भोजन का सहारा लिया जाता है। इसके अतिरिक्त बच्चे की मांगें पूरी करते जाना व उन्हें ओवर प्रोटेक्ट करना भी इसी जीवन शैली में शामिल है।

अगर प्रारम्भ से ही बच्चे में अच्छी व स्वस्थ आदतें डाली जाएं तो उन्हें कई बीमारियों से बचाया जा सकता है। उन्हें प्रारंभ से ही पोषक तत्वों के लाभ से परिचित करवाएं। स्वयं स्वस्थ आदतें सीखें। घर में जो भी भोजन बनाएं, उसे आकर्षक बनाने की कोशिश करें ताकि बच्चे का बाहर के बने भोजन के प्रति आकर्षण कम हो। जो भोज्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, उन्हें प्रारंभ से ही प्रयोग न करें।


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