- किसानों के अरमानों पर गंगा की बाढ़ ने फेरा पानी, तबाही का मंजर देख कांप उठते हैं खादरवासी
जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: बाढ़ आकर चली जाती है, लेकिन बबार्दी के निशान छोड़ देती है। कुछ ऐसा ही गंगा खादर इलाके में हुआ। बाढ़ ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। दरअसल हजारों बीघा फसल को बाढ़ के पानी ने चौपट कर दिया है। किसानों की लागत भी गंगा में डूब गई। वहीं, खादर इलाके में अब भी पानी भरा हुआ है। बाढ़ के पानी का असर फसलों पर बहुत ज्यादा पड़ा है। खादर इलाके में जिन जगहों पर पानी में फसल डूब गई थी वह पूरी तरह चौपट हो चुकी है।
गांवों और खेतों से बाढ़ का पानी तो निकल गया, लेकिन गंगा बर्बादी के निशान छोड़ गई है। बाढ़ से खेतों में लहलहाती धान और गन्ने की फसल बर्बाद हो गई। गांवों से पानी निकलने के बाद सड़कें और गलियां कीचड़ में तब्दील हो गईं। सरकारी तामझाम के करोड़ों खर्च करने के बाद भी सुगम रास्ते ही नजर आ रहे हैं। न खेतों में फसल बची है।

स्टेट हाइवे से लेकर गांव की हर गली तक नजर आ रहा तो महज बबार्दी का मंजर। ग्रामीणों का कहना है कि इस साल आई बाढ़ ने तो तबाह कर दिया है। वहीं अब बाढ़ का पानी उतरने के बाद गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जिससे की बीमारी फैलने का खतरा हो गया है। मवेशियों के मरने से भी इलाके में बीमारियों के फैलने का खतरा मंडरा रहा है। गांवों की बात तो दूर शहर के कई इलाकों बाढ़ का पानी उतरने के बाद बड़े पैमाने पर गंदगी फैली हुई है। बाढ़ के पानी में सड़कें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।
हस्तिनापुर के खादर में आई भीषण बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित खादर क्षेत्र में बाढ़ का पानी अब उतरने लगा है, लेकिन बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही चारों ओर बाढ़ से हुई बबार्दी के निशां दिखाई देने लगे है। बाढ़ का पानी जैसे-जैसे उतर रहा है वैसे-वैसे बर्बाद का आलम चारों ओर नजर आ रहा है। गांवों तक चारों ओर बाढ़ की तबाही के मंजर दिखाई दे रहे है। वहीं, दूसरी ओर ओर खादर में बाढ़ की विभीषका के साथ ही लोगों को प्रशासन की संवेदनहीनता भी झेलने को मजबूर होना पड़ा है।
बाढ़ग्रस्त इलाकों के लोग अब भी राहत की बाट जोह रहे हैं। बाढ़ को आए एक सप्ताह गुजर गए हैं, लेकिन बाढ़ प्रभावितों के पास अब तक सरकारी मदद नहीं पहुंच पाई है। अभी सर्वे का काम चल रहा है, जिसके आधार पर ही बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा। बाढ़ पीड़ित सैकड़ों लोग सड़क किनारे खुले में रहने को मजबूर है। बाढ़ पीड़ितों के मुताबिक उनके पास जीवन जीने का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ ने उनका सबकुछ छीन लिया है और वह अब दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं। लोगों को अब भी सरकारी मदद का इंतजार है, ताकि वह अपनी जिंदगी को फिर से शुरू कर सकें।।

अधिकारी लगातार कर रहे क्षेत्र का दौरा
चार दिन पूर्व आई बाढ़ के बाद बाढ़ राज्यमंत्री दिनेश खटीक से लेकर तमाम अधिकारियों ने क्षेत्र का दौरा किया, लेकिन राहत भरी बात न तो किसी ने कहीं और न ही किसी ने खराब फसलों का आकलन कर मुआवजे की बात कही, लेकिन मुआवजा क्या होगा? किसी को पता नहीं, बंद लिफाफा किसानों के दर्द पर कितना मरहम लगाता है, यह शायद ही कोई जानता है।
चारे का संकट गहराया
गंगा की बाढ़ ने चारे का संकट भी खड़ा कर दिया है। खादर में पशु चराने वाले चरवाहे अपने पशुओं को लेकर गांव की तरफ लौट आए थे। जिनके सामने पशुओं और खुद की जान बचाने का डर था अब खादर में पानी भरा हुआ है। पशुओं को चराने की भी जगह नहीं है। इसके अलावा खेतों में बोया गया चारा भी बाढ़ के पानी ने नष्ट कर दिया है। इसके चलते गंगा किनारे बसे लगभग सभी गांव में लोग चारे की समस्या से जूझ रहे हैं।
खेतों से चारा काट कर लाने की स्थिति भी नहीं है। क्योंकि अभी काफी पानी भरा हुआ। गंगा के जलस्तर में धीमी गति से कमी होने के बावजूद हस्तिनापुर खादर में हालत जस की तस बनी हुई है। बाढ़ में दर्जनों घर ध्वस्त हो चुके हैं। पीड़ित पानी से भरे घरों की एवं सामान की सुरक्षा के लिए खाट पर, चौकी पर, मचान पर शरण लिए हुए हैं। दर्जनों गांव टापू बने हुए हैं। सड़क किनारे एवं ऊंचे स्थानों पर शरण लेने वाले की भी जिंदगी बदतर बनी हुई है।
गलती का खामियाजा भुगत रहे किसान
हाल ही में मेरठ-बिजनौर की सीमा को जोड़ने के लिए गंगा पर बनाएंगे बैकुंठपुर एप्रोच रोड बनकर तैयार है, लेकिन इस एप्रोच रोड में पीडब्ल्यूडी विभाग की गलतियों का खामियाजा किसान लगातार भुगत रहे हैं। इससे पूर्व में आई बाढ़ में किसानों ने एप्रोच रोड पर छोटे पुल बनाने की मांग की थी। जिसे तमाम अधिकारियों ने दरकिनार कर दिया। जिसके चलते तीनों समय पर साथ में फतेहपुर प्रेम से लेकर मखदूमपुर तक तमाम फसलों को तहस-नहस कर दिया।

