जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जाम की समस्या शहर के लिए नासूर बन गई हैं। ट्रैफिक पुलिस की लंबी-चौड़ी फौज शहर में लगी होती हैं, लेकिन इसके बावजूद ट्रैफिक जाम की समस्या खत्म नहीं हो रही है। खैर नगर चौराहे पर मंगलवार को दो तस्वीर हम आपको दिखाने जा रहे हैं। पहली तस्वीर थी कि खैरनगर चौराहा जाम था। लोग परेशान थे, मगर वाहन दौड़ नहीं रहे थे, बल्कि रैंग रहे थे।
दूसरी तस्वीर थी ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिस कर्मी एक तरफ खड़े होकर मूकदर्शक बने थे। जाम खुलवाने की दिशा में कोई प्रयास ट्रैफिक पुलिस की तरफ से नहीं की जा रही थी। घंटे भर तक यहां बेवजह जाम से घिरा रहा। आखिर इस समस्या के निस्तारण के लिए पहल क्यों नहीं हो रही हैं?

ट्रैफिक पुलिस इसमें आगे बढ़कर जनता को समस्या से निजात क्यों नहीं दिला पा रही हैं। दावे तो ट्रैफिक कंट्रोल करने के किये जाते हैं, लेकिन धरालत पर लगने वाले जाम ट्रैफिक पुलिस अफसरों के दावे की कलई खोल रही है। खैरनगर चौराहे पर जाम लगना आम बात हैं, लेकिन यहां पर ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए कम से कम तीन पुलिस कर्मियों की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन यहां पर ऐसा नहीं किया गया।
ट्रैफिक पुलिस कर्मी उन्हीं प्वांइटों पर तैनात किये जाते हैं, जहां पर गैर राज्यों की गाड़ियों को रोककर चेकिंग के नाम पर वसूली की जाती हैं, लेकिन शहर के भीतरी इलाके में ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की ड्यूटी सिर्फ खानापूर्ति करने के लिए लगाई जाती है।
यही वजह है कि जहां पर जाम लगने की समस्याएं आम हैं, वहां पर गिनती के पुलिस कर्मी तैनात किये जाते हैं। बुढ़ाना गेट पर भी यही स्थिति हैं। इंदिरा चौक पर भी कुछ ऐसी ही अवस्था हैं। शहर के लोग ट्रैफिक समस्या से जूझते रहते हैं, मगर उस तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

