जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर 378 दिन चला किसान आंदोलन खत्म हो गया। बॉर्डर पर डेरा डाले किसानों की अब 11 दिसंबर से घर वापसी आरंभ हो जाएगी, लेकिन भाकियू के राष्टÑीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि यह किसान आंदोलन केन्द्र सरकार के खिलाफ था, अब गन्ना भुगतान, बढ़े हुए बिजली के बिल और अन्य मुद्दों को लेकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भाकियू बात करेगी।
सीएम व भाकियू एक टेबल पर बैठेगी, जहां पर बकाया गन्ना भुगतान करने की मांग सीएम से की जाएगी। क्योंकि व्यापक स्तर पर चीनी मिलों पर गन्ने का बकाया हैं। यही नहीं, बिजली के बढ़े हुए बिलों को लेकर भी मुख्यमंत्री से बात की जाएगी। क्योंकि यूपी में किसानों के ट्यूबवेलों के बिजली बिल बढ़ा दिये गए हैं, जो किसानों पर बड़ा भार बढ़ गया है।
भाकियू के राष्टÑीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि यूपी में चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले इन तमाम मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलेंगे तथा अपनी मांग उनके सामने रखकर बकाया गन्ने का भुगतान कराया जाएगा। आलू के किसानों को दाम सही नहीं मिले। बाजरा व धान की फसल में भी दिक्कत आयी। राकेश टिकैत ने कहा कि 378 दिन से वो अपने घर नहीं गए।
अब 13 दिसंबर को उनकी घर वापसी होगी। क्योंकि 12 दिसंबर को उनकी कैराना में पंचायत पहले से प्रस्तावित हैं, उस पंचायत को बतौर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करेंगे। इसके बाद दिल्ली लौट जाएंगे, फिर दिल्ली बॉर्डर से एक-एक किसान की सकुशल घर वापसी जब तक नहीं हो जाएगी, तब तक वह दिल्ली में ही बने रहेंगे, इसके बाद ही घर लौटेंगे। राकेश टिकैत ने एक सवाल के जवाब में कहा कि चढूनी पंजाब में पार्टी बनाकर चुनाव लड़ेंगे, यह उनका निजी निर्णय हैं। संयुक्त किसान मोर्चे से इसका कोई लेना-देना नहीं हैं। रही बात हमारी तो मैं और मेरा परिवार कभी चुनाव नहीं लड़ेगा। किसानों को आंदोलन के जरिये ही उनकी मांगों को पूरी कराने के लिए आंदोलन करने से कभी पीछे नहीं हटेंगे।
आंदोलन ने देखे बहुत उतार-चढ़ाव
378 दिन दिल्ली बॉर्डर पर चले किसान आंदोलन ने बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं। बॉर्डर पर किसानों को उकसाने का प्रयास भी हुआ। लोनी के भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर की तरफ से आंदोलित किसानों को लेकर अभद्र टिप्पणी भी की। आरोप है कि उनके समर्थकों ने बॉर्डर पर पहुंचकर किसानों के साथ मारपीट भी कर दी थी। यह घटना उस दिन की है, जब राकेश टिकैत की आंखों से आंसू की धारा फूट पड़ी थी।
पुलिस व किसानों के बीच कई बार टकराव के हालात भी बने। दिल्ली पुलिस ने सड़कों में किसानों को रोकने के लिए कीले भी ठोंक दी थी। इसको लेकर किसान आंदोलन एक बार फिर खूब सुर्खियों में बन गया था। दिल्ली में ट्रैक्टर रैली पिछले वर्ष 26 जनवरी को निकाली गई, उस दिन किसान व जवान आमने-सामने हो गए थे।
इस तरह से खूब बवाल भी हुए। लालकिले पर सिख धर्म का निशानी झंडा फहराने के बाद किसानों की घेराबंदी करने की कोशिश हुई। बड़ी तादाद में दिल्ली पुलिस ने ट्रैक्टर कस्टडी में ले लिये थे तथा लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था। मुकदमें भी दर्ज किये गए। गर्मी, बारिश और सर्दी, तमाम मौसम किसानों के सड़क पर खुले आकाश के नीचे ही गुजरे।

