Saturday, June 15, 2024
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HomeUttar Pradesh NewsBijnorभारतीय संस्कृति का महापर्व है कुम्भ: उमाशंकर

भारतीय संस्कृति का महापर्व है कुम्भ: उमाशंकर

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  • डीपी सिंह ने कहा कुंभ पर्व देव संस्कृति की अनमोल घरोहर है
  • बिजनौर, मुजफ्फरनगर व सहारनपुर के सदस्यों को दिया प्रशिक्षण
  • गायत्री शक्तिपीठ पर आयोजित किया कार्यक्रम

जनवाणी संवाददाता |

नजीबाबाद: गायत्री शक्तिपीठ पर गायत्री परिवार के जनपद मुजफ्फरनगर, सहारनपुर तथा बिजनौर के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया। जिसका उद्देश्य घर-घर पवित्र गंगाजल एवं कुंभ का साहित्य पहुंचाना रखा गया है।

गुरुवार को नजीबाबाद-बिजनौर मार्ग पर जयनगर कालौनी स्थित गायत्री शक्तिपीठ पर शांति कुंज की ओर से आयी टोली के उमाशंकर पटेल, डीपी सिंह, उदय सिंह चौहान व सुनील सिंह ने गायत्री साधकों को प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों में जनपद सहारनपुर, मुजफ्फरनगर व बिजनौर के महिला मंडल, प्रज्ञा मंडल एवं युवा मंडल के कार्यकर्ता शामिल रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ जनपद बिजनौर के जिला संयोजक अमरेश राठी ने दीप प्रज्जवलित कर किया।

प्रशिक्षकों की टोली के नायक उमाशंकर पटेल ने नारा दिया कि गंगा हमारी माता है, जनमानस की भाग्य विधाता है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ पर्व के अवसर पर हरिद्वार की गंगा का पवित्र गंगा जल एवं महाकुंभ का साहित्य घर-घर पहुंचाने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया है। प्रशिक्षण के माध्यम से कार्यकर्ताओं की टोलियां तैयार की जा रही हैं।

गंगा, गुरु, गाय, गायत्री और गीता हमारी संस्कृति के आधार हैं। कुंभ भारतीय संस्कृति का महापर्व है। एक बार समुद्र में छिपी विभूतियों को प्राप्त करने के उद्देश्य से देवताओं और दैत्यों ने समुद्र मंथन किया था। जिसके फलस्वरूप समुद्र से 14 रत्न प्राप्त हुए थे।

इनमें से एक अमृत कलश भी था। अमृत पाने के लिए देवताओं और दैत्यों में युद्ध छिड़ गया। ऐसे में देव गुरु वृहस्पति ने दैत्यों के हाथों से अमृत कलश को बचाया। सूर्य देव ने इसे फूटने से बचाया और चन्द्र देव ने इसे छलकने से बचाया। हालांकि संग्राम की उथल-पुथल में अमृत कुंभ से छलककर चार बूंदे हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन तथा नासिक में गिर गयी। जिन चार स्थानों पर बूंदें गिरी, वहीं प्रत्येक 12 वर्ष में महाकुंभ पर्व मनाया जाता है और कुंभ मेले आयोजित होते हैं।

डीपी सिंह ने कहा कि कुंभ पर्व देव संस्कृति की अनमोल धरोहर है। लोक मंगल के लिए समर्पित व्यक्ति कुंभ से निकलते हैं। उदय सिंह चौहान ने कहा कि विचारों का मंथन ही समुद्र मंथन है। सद्ज्ञान ही वह अमृत है, समाज और व्यक्ति का कल्याण होता है। अज्ञान, अशिक्षा और कुसंस्कार ही दु:खों का मूल कारण है। आदर्शो के समुच्चय का नाम ही भगवान है।

कार्यक्रम का संचालन गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक डा. दीपक कुमार ने किया। प्रशिक्षण शिविर में कमल शर्मा, जितेन्द्र सिंह, हरीश शर्मा, सुरेन्द्र कुमार एड., समर सिंह, राम सिंह, विशम्बर सिंह, विजेन्द्र राठी, मधुबाला गुप्ता, ऋतु कीर्ति, सोमेश्वर दत्त शर्मा, घसीटा सिंह आदि उपस्थित रहे।

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