Friday, March 13, 2026
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नई शिक्षा नीति भविष्य की रीढ़: कुंवर शेखर विजेंद्र

वर्धमान कॉलेज में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिभागियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए


जनवाणी संवाददाता |

बिजनौर: वर्धमान कॉलेज बिजनौर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन शोभित यूनिवर्सिटी के चांसलर कुंवर शेखर विजेंद्र ने कहा कि नई शिक्षा नीति भविष्य की रीढ़ होगी। क्षेत्रीय भाषाओं पर जोर होगा।
रविवार को वर्धमान कालेज में राष्ट्रीय सेमिनार का दूसरा दिन रहा।

इस राष्ट्रीय सेमिनार में लगभग 100 शोध पत्र आॅनलाइन एवं आफलाइन दोनों माध्यम से प्रस्तुत किए गए। जेएनयू नई दिल्ली के डा. अरविंद कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में उच्च शिक्षा से जुडे पहलुओं पर चर्चा की। वहीं डा. राजेश कुमार नागर कोटी-डायट, नैनीताल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रारंभिक शिक्षा की संरचना पर विस्तार से बात की।

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संगोष्ठी के समन्वयक डा. राजीव जौहरी ने सभी सम्मानित अतिथियों का स्वागत बाल वृक्ष देकर किया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि कुंवर शेखर विजेंद्र कुलाधिपति शोभित यूनिवर्सिटी मेरठ ने नई शिक्षा नीति के बारे में बताया कि देश में शिक्षा को लेकर पिछले कई सालों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

इस नई शिक्षा नीति को लेकर सभी में उत्साह है। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति भविष्य की रीढ़ साबित होगी। नई शिक्षा नीति में छात्र कभी भी पढ़ाई के बीच में ब्रेक ले सकेगा। इसके अलावा नवाचार और रिसर्च करने के साथ जड़ों से जुड़ा जाएगा। नई शिक्षा नीति में नौकरी के साथ छात्र राष्ट्र निर्माण में कैसे योगदान दे सकेंगे की जानकारी मिलेगी। इसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं पर जोर दिया जाएगा।

विशिष्ट अतिथि देवेद्र नारायण ने नई शिक्षा नीति के विषय में बताया कि नई शिक्षा नीति में स्किल पर विशेष जोर दिया गया है। यदि शिक्षा रूचि के अनुरूप होगी तो वह हमें बोझ नहीं लगेंगी। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्राचार्य सेंट जोन्स कॉलेज आगरा ने अपने संबोधन में नई शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम में डा. ओडी आर्य द्वारा लिखित पुस्तक चलो चले चौपाल का विमोचन अतिथियों के कर कमलों द्वारा किया गया। ने संगोष्ठी से जुडे अपने अनुभव साझा किए। इस मौके पर प्राचार्य प्रोफेसर सीएम जैन ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन संगोष्ठी की सह संयोजक डा. वैशाली पूनिया ने किया।

संगोष्ठी की सफलता में सचिव डा. अंजू बंसल, डा. सुरभि सिंघल, डा. निंदा खान, डा. मेघना अरोड़ा, डा. मनीष गुप्ता, डा. धर्मेद्र यादव, डा. सुनील पंवार आदि का विशेष योगदान रहा।

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