- दो हजार से ज्यादा डेयरियां आज भी हो रही संचालित
- प्रशासन के कोर्ट में दाखिल जवाब में डेयरी निकालने का दावा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: महानगर में संचालित की जा रही पशु डेयरियों को आबादी से बाहर किए जाने के मामले पर हाईकोर्ट में सोमवार को अंतिम सुनवाई होने जा रही है। महानगर में करीब दो हजार से ज्यादा डेयरियां संचालित की जा रही हैं। हाईकोर्ट में अफसरों की ओर दायर किए गए जवाब में डेयरियों को बाहर किए जाने का दावा किया गया है, जबकि दायर पीआईएल में प्रशासन के दावों की हवा निकाल दी गई है।
हालांकि इस बात की उम्मीद कम है कि डेयरियों को बाहर किए जाने के लिए कोई कठोर फैसला सामने आए या फिर सुनवाई किसी दूसरी कोर्ट या फिर ऊपरी अदालत में सुनवाई के भी विकल्प पर विराम लग जाए। पीआईएल दाखिल करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना का कहना है कि अभी कुछ भी कहना या किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। चंद घंटे का इंतजार बाकी है।
ये है डेयरियों की हालत
महानगर के कैंट व शहर के इलाकों में यदि डेयरियों की स्थिति की बात की जाए तो शहर में करीब दो हजार डेयरियां हैं और कैंट क्षेत्र में इनकी संख्या करीब ढाई सौ आंकी जा रही है। शहर की एक डेयरी में करीब 50 पशुओं का अनुमान लगाया जा रहा है। इस तरह शहर की डेयरियों में कुल पशुओं की संख्या करीब एक लाख अनुमानित है। इसी तर्ज पर कैंट में करीब ढाई सौ डेयरियां हैं। इसी तर्ज पर कैंट की डेयरियों में करीब बाहर सौ से ज्यादा पशुओं की मौजदूगी मानी जा रही है।
घनी आबादी के बीच डेयरियां
शहर और कैंट दोनों ही इलाकों में तमाम पशु डेयरियां घनी आबादी के बीच चल रही हैं। शहर के कोतवाली, लिसाड़ीगेट, देहलीगेट, रेलवे रोड, नौचंदी सरीखे ऐसे इलाके हैं जो पुरानी आबादी में शुमार किए जाते हैं। इनमें मकबरा घोसियान, ईस्माइल नगर, विकासपुरी, इस्लामाबाद, प्रहलाद नगर, गोलाकुआं, शोहराब गेट, भगत सिंह मार्केट, शीश महल, सरीखे ऐसे इलाके हैं जो शहर की बेहद घनी आबादी में शुमार हैं। कमावेश यही स्थिति कैंट क्षेत्र की है। यहां भी तमाम डेयरियां आबादी के बीच ही संचालित की जा रही हैं।
अफसरों के दावों की खोली पोल
फाइनल हेयरिंग से पहले अफसरों की ओर से दायर किए गए जवाब में डेयरियों को बाहर किए जाने का दावा किया गया है। डेयरियों के खिलाफ चलाए गए अभियानों को लेकर मीडिया की खबरों का जिक्र किया गया है। वहीं, दूसरी ओर आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने अफसरों के दावों की पोल कोर्ट के सामने खोल कर रख दी है। उन्होंने बताया कि मसलन एक डेयरी में पचास पशु हैं। वहां से दो पशु जब्त कर उन्हें छोड़ने की एवज में दस हजार का जुर्माना लिया जाता है। पशु दोबारा डेयरी में पहुंच जाता है। तो फिर डेयरी हटी कहां।
घुट रहा है शहर का दम
डेयरियों से निकलने वाला गोबर शहर के नाले नालियों में जमा हो गया है। गहराई तक जमा हो गए गोबर से अब कई स्थानों पर मिथेन गैस निकल रही है। यह पर्यावरण और सेहत के लिए जानलेवा है। यदि हालात नहीं सुधरे तो मिथेन गैस की वजह से बड़ी संख्या में लोग बीमार होंगे। मौतों का आंकड़ा बढेगा।
नालियां ऊंची, मकान नीचे
डेयरियों से निकलने वाले गोबर के नाले नालियों में जम जाने की वजह से हो रही समस्या का समाधान करने के बजाय अफसरों ने शॉट कट अपना लिया है। नाले नालियों की क्षमता बढ़ाने के बजाय उन्होंने नालियों को ऊंचा कर दिया है। महानगर में कई स्थानों पर तो मकान आठ से दस फीट तक नीचे हो गए हैं। तमाम नालियां सड़क के समानांतर बह रही हैं। बारिश के मौसम में इससे भयंकर जलभराव हो रहा है। नाले नालियों में जमे गोबर के कारण पानी का बहाव रूक गया है।
प्रतिदिन करोड़ों लीटर पानी का दोहन
पशु डेयरियों में पशुओं को नहाने और गोबर बहाने के लिए प्रतिदिन करोड़ों लीटर पानी को दोहन किया जाता है। आरटीआई एक्टिविस्ट बताते हैं कि पानी के दोहन की ओर तो किसी भी विभाग की नजर ही नहीं। पानी के दोहन के अलावा डेरियों से निकलने वाला पानी जो नाले नालियों में बहा दिया जाता है, उसका कुछ हिस्सा भूगर्भ में पहुंचकर पेयजल को भी दूषित कर रहा है। हालात जितने नाजुक व खतरनाक हैं, प्रशासन की लापरवाही भी उतनी ज्यादा बड़ी नजर आती है।

